• उड़ता युवा

    उड़ता युवा आज के युग का उड़ता युवा ।खेल रहा वह जीवन से जुआ ।। युवाओं की आज बिगड़ी संगत ।संगत से ही मिलती सदा रंगत ।। गफलत में होते आज के युवा ।नहीं देखते आगे खाई है या कुआं ।। सब युवा करते अपनी मनमानी ।नशें में बर्बाद कर रहे जिंदगानी ।। घर-घर में…

  • दिल में हमारे आज भी

    दिल में हमारे आज भी ( ‘वाचाल’ ग़ज़लमतलआ छोड़कर सारे अश्आर तिटंगे ) दिल में हमारे आज भी अरमान पल रहा हैयूँ मानिए कि दिल को ये दिल ही छल रहा है रंगे-निशात झेला बारे-अलम उठा करना जाने किस बिना पर ये साँस चल रहा हैजुड़ता है टूट-टूट कर फ़िर-फ़िर संभल रहा है वो पूछते…

  • दादी जी का घर

    दादी जी सलुम्बर में अकेले ही रहती थी.. नागपुर छोड़ने के बाद वे और दादाजी दोनों सलूंबर में स्थायी हो गए थे.. दादा जी के निधन के बाद मैने दादी जी को बहुत बार कहा की चलो मेरे साथ अकोला.. मगर वे नही मानी। वे तो भरेपूरे समाज में समाज के साथ रहना चाहती थी…..

  • गुरु गोविंद सिंह जी | Guru Gobind Singh Ji 

    गुरु गोविंद सिंह जी खालसा पंथ की स्थापना करने वाले,महान योद्धा, चिंतक देश के रखवाले।पौष शुक्ल पक्ष सप्तमी संवत् 1723 ,धरा की रक्षा के लिए अवतरित होने वाले।। अन्याय,अपराध के खिलाफ लड़ने वाले,युद्ध में मुगलों के छक्के छुड़ाने वाले।धर्म की रक्षा के लिए सरबंसदानी बने,कलगीधर,दशमेश की उपाधि पाने वाले।। पिता गुरु तेग बहादुर माता गुजरी…

  • दुल्हन किसकी?

    शाम को जब पवन मजदूरी से घर वापस आया तो… उसको पता चला कि पवन का दूर का मौसेरा भाई मोहित उसके पीछे अपनी शादी का कार्ड पड़ोस में देकर गया है। शादी के कार्ड पर जब उसने लड़की का नाम नीलम, पिता का नाम रामस्वरूप, गांव रामनगर, जिला काशीपुर, राज्य उत्तराखंड लिखा देखा तो……

  • बलिदानी गुरु गोविन्द सिंह

    बलिदानी गुरु गोविन्द सिंह देशभक्ति का खून रग-रग में दौड रहा था,स्वाभिमान से दुश्मनों को वह तोड रहा था।देश खातिर साहसी सर झुकाते रहे गुरूवर,तलवार धर्म पर बलिदान हेतु मोड़ रहा था। राष्ट्रभक्त, धर्मनिष्ठ, त्यागी वीर गुरु गोविन्द,धन्य गुजरी माता, पिता तेगबहादुर और हिन्द।खालसा पंथ निर्माण कर सिक्ख किया एकजुट,बचपन से कुशल कवि दार्शनिकता दौड…

  • जम्हूरा मन

    जम्हूरा मन वर्षों का विश्वास तोड़कर,चलता बना जम्हूरा मन।अब तक मुझे कचोट रहा है,मेरा यही अधूरापन। धड़कन तार-तार हो जाती,सपना दिन में तारे सा,साँस गटरगूँ करता रहता,अपना बिना सहारे सा।बनी ज़िन्दगी ढोल-नगाड़ा,बाजे ख़ूब तम्बूरा मन। आओ और उड़ाओ खिल्ली,मेरे एकाकीपन की।चिन्दी-चिन्दी छीन-झपट लो,बेढ़ंगे जर्जर तन की।ओखलिया में कूट-कूट कर,बना लिया है चूरा मन। जाने कैसी…

  • दोस्ती का खून | Dosti ka Khoon

    सन 2000 की बात है। आशु और अंकित दोनों की नई नई दोस्ती हुई थी। दोनों कक्षा 12 में पढ़ते थे। आशु एक अमीर परिवार से ताल्लुक रखता था। उसके पिता एक कंपनी में अकाउंटटेंट के तौर पर कार्य करते थे जबकि अंकित के पिता की सबमर्सिबल की एक छोटी सी दुकान थी। आशु के…

  • साहित्य और समाज

    साहित्य को समाज का दर्पण माना गया है। साहित्य के माध्यम से ही हम समाज के स्तर का आकलन कर सकते हैं। एक साहित्यकार अपने आस-पास के परिवेश में जो कुछ भी देखता या महसूस करता है, वह अपनी लेखनी के माध्यम से अपने मन के भाव अभिव्यक्त करता है। चिरकाल से लेकर आज तक…

  • आदिवासी पटेलिया समाज

    आदिवासी पटेलिया समाज परथी भाई भूरा, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ( गांव-मालमसुरी,रिगोंल, भाबरा जिला अलीराजपुर मध्यप्रदेश ) स्वतंत्रता संग्राम सेनानी महान।सब समाज करते उनका सम्मान।।यह युवा प्रेरणा दिवस उनके नाम।हिंदुस्तान की थे वो शान।।देश की संस्कृति को बचाया।हिंदुस्तान का मान बढ़ाया।।सच रहा पर वो सदा चले।धार्मिक का पाठ सबको पढ़ाया।।गरीब की मदद करो बताया।दिलों में देश…