उड़ता युवा

उड़ता युवा

उड़ता युवा

आज के युग का उड़ता युवा ।
खेल रहा वह जीवन से जुआ ।।

युवाओं की आज बिगड़ी संगत ।
संगत से ही मिलती सदा रंगत ।।

गफलत में होते आज के युवा ।
नहीं देखते आगे खाई है या कुआं ।।

सब युवा करते अपनी मनमानी ।
नशें में बर्बाद कर रहे जिंदगानी ।।

घर-घर में हो रहा नशे से नाश।
युवा कर जीवन का सत्यनाश ।।

समझ नहीं पा रहे इसका आभास ।
रिश्तों में नशा ला रहा सबके खटास ।।

आज गली मोहल्ले में बने नशे के अड्डे ।
नशे के अड्डें वालों को मारने पड़ेंगें डंडे ।।

युवाओं को नशे से सबको बचाना है ।
अपना भारत देश नशा मुक्त बनाना है ।।

सुनील कुमार
नकुड़ सहारनपुर
उत्तर प्रदेश भारत

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