• जीवन का लक्ष्य

    जीवन का लक्ष्य (कुछ प्रेरणादायक बातें जो मैं स्वयं से कहता हूँ..) अपने लिए जीना सीखो कब तक औरों के लिए तुम ऐसे जीते रहोगे,अपनी खुशी के लिए करना सीखो कब तक औरों को खुश करते रहोगे। नापसंद को मना करना सीखो कब तक यूँ झिझक महसूस करते रहोगे,जब तुम सच्चे हो अपने जीवन में…

  • चालाकियां चलता रहा

    चालाकियां चलता रहा ( ग़ज़ल : दो काफ़ियों में ) मुफ़लिसी से मेरी यूँ चालाकियाँ चलता रहाज़हनो-दिल में वो मेरे ख़ुद्दारियाँ भरता रहा मैं करम के वास्ते करता था जिससे मिन्नतेंवो मेरी तक़दीर में दुश्वारियाँ लिखता रहा मोतियों के शहर में था तो मेरा भी कारवाँफिर भला क्यों रेत से मैं सीपियाँ चुनता रहा कहने…

  • कहाँ थे पहले?

    कहाँ थे पहले? खिड़की के हिलते पर्दों के पासतुम्हारी परछाईं नज़र आती हैकाश !तुम होते –ख़यालों में, कल्पनाओं मेंकितने रंग उभरते हैंदूर कहीं अतीत कीझील में डूब जाते हैंकभी लगता है, स्वप्न देख रही हूँकभी लगता है जाग रही हूँ यह बोझिल सन्नाटा, यादों का तूफ़ान,तुम्हारे ख़यालों की चुभती लहरें,मेरे भीतर कहीं टूटती, बिखरती,एक अनकही…

  • यह नवल वर्ष

    यह नवल वर्ष यह नवल वर्षमन में भर देउत्साह और हर्षघटे निराशाओं का तमहों कामयाब हम स्वार्थ का दैत्यकभी छल न सकेअब मंथराकोई चाल चल न सके आशाओं के कँवल खिल जायेंनिर्धारित लक्ष्य मिल जायें हर स्वप्न संपूर्ण होकामना परिपूर्ण हो सुदृढ़ और विश्वास होसार्थक हर प्रयास हो उदय ज्ञान का आदित्य होप्रफुल्लित निरन्तर साहित्य…

  • राजनीति व्यंग्य

    राजनीति व्यंग्य इंड़ी फेल हुआ है तो क्याजनता में विश्वास जगाएँचलो नया दल एक बनाएँ राजनीति के मकड़जाल जाल सीअधरों पर मुस्कान लियेमफ़लर स्वैटर टोपी चप्पलकंगालों सी शान लियेलोगों के काँधे चढ़ जाएँ किस को याद रहा है कब-कबकिस ने किस-किस को लूटाकब फ़िर धोती चप्पल वालापहन लिया सूटा-बूटाजनमानस को फ़िर उलझाएँ गुमनामी में बीता…

  • गाड़ी बुला रही है

    और अंततः वो छुक छुक गाड़ी बंद हो ही गयी.. पिछले करीब एक सो पच्चास सालो से अनवरत चलने वाली मिटर गेज रेल गाड़ी ने साल 2016 के अंतिम दिन अपना अंतिम सफर पूरा किया। नए साल का पहला दिन पूरी शांति के साथ बिता.. बीते डेढ़ सौ वर्षो का शौर थम गया.. स्टेशन खामोश…

  • प्रकृति की गोद में

    प्रकृति की गोद में जगमगाते सितारों से, आसमान सजता है।प्रकृति की शांति में, मन को सुकून मिलता है।। विस्तृत मैदानों में, खुशी दोस्तों के संग।मन के सारे दर्द, भूले जाते हैं वहां।। प्रकृति का सौंदर्य है, जो सबको मोह लेता है।मन की तनाव से राहत, इससे ही मिलती है।। बारिश के गीत से, जीवन को…

  • उपहार | Uphar

    उपहार आता नववर्षसब होते मिलकर हर्षदेते उपहार प्यारा नववर्षघर आंगन देते दर्षमिलता उपहार अपने जीवनजीवन में बने श्रीमनउपहार संग नववर्ष वेलानववर्ष पर लगता मेलाईश्वर उपहार उपहार प्यारामिलता जब उसे प्याराखुशियों संग चहुंओर खुशीमिलती हैं जब ताजपोशीअनमोल उपहार सुनील कुमारनकुड़ सहारनपुरउत्तर प्रदेश भारत यह भी पढ़ें :-

  • चले आइए | Chale Aaiye

    चले आइए आपको दिल पुकारे चले आइएराह पलके बुहारे चले आइए क्या हँसी हैं नजारे चले आइएचल पड़े नैन धारे चले आइए यार छत पर कभी आप आये नज़रतो करें हम इशारे चले आइए पास बैठो कभी तो घड़ी दो घड़ीआपको हम निहारे चले आइए होश बाकी रहा आपको देखकरजुल्फ़ फिर हम सँवारे चले आइए…

  • नया पुराना जोड़-तोड़ कर

    नया पुराना जोड़-तोड़ कर नया पुराना जोड़-तोड़ करजन-जन की बाहें मरोड़ कर छाती धर कर ले जाएंगेलाख-हज़ारों को करोड़ कर लूट तंत्र की नींव धरेंगेनयी चुनरिया ओढ़-ओढ़ कर अब भारत के लोकतंत्र कीधाराओं को तोड़-मरोड़ कर नया रचें इतिहास आइयेशर्म-हया का घड़ा फोड़ कर देशपाल सिंह राघव ‘वाचाल’गुरुग्राम महानगरहरियाणा यह भी पढ़ें:-