• जम्हूरा मन

    जम्हूरा मन वर्षों का विश्वास तोड़कर,चलता बना जम्हूरा मन।अब तक मुझे कचोट रहा है,मेरा यही अधूरापन। धड़कन तार-तार हो जाती,सपना दिन में तारे सा,साँस गटरगूँ करता रहता,अपना बिना सहारे सा।बनी ज़िन्दगी ढोल-नगाड़ा,बाजे ख़ूब तम्बूरा मन। आओ और उड़ाओ खिल्ली,मेरे एकाकीपन की।चिन्दी-चिन्दी छीन-झपट लो,बेढ़ंगे जर्जर तन की।ओखलिया में कूट-कूट कर,बना लिया है चूरा मन। जाने कैसी…

  • दोस्ती का खून | Dosti ka Khoon

    सन 2000 की बात है। आशु और अंकित दोनों की नई नई दोस्ती हुई थी। दोनों कक्षा 12 में पढ़ते थे। आशु एक अमीर परिवार से ताल्लुक रखता था। उसके पिता एक कंपनी में अकाउंटटेंट के तौर पर कार्य करते थे जबकि अंकित के पिता की सबमर्सिबल की एक छोटी सी दुकान थी। आशु के…

  • साहित्य और समाज

    साहित्य को समाज का दर्पण माना गया है। साहित्य के माध्यम से ही हम समाज के स्तर का आकलन कर सकते हैं। एक साहित्यकार अपने आस-पास के परिवेश में जो कुछ भी देखता या महसूस करता है, वह अपनी लेखनी के माध्यम से अपने मन के भाव अभिव्यक्त करता है। चिरकाल से लेकर आज तक…

  • आदिवासी पटेलिया समाज

    आदिवासी पटेलिया समाज परथी भाई भूरा, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ( गांव-मालमसुरी,रिगोंल, भाबरा जिला अलीराजपुर मध्यप्रदेश ) स्वतंत्रता संग्राम सेनानी महान।सब समाज करते उनका सम्मान।।यह युवा प्रेरणा दिवस उनके नाम।हिंदुस्तान की थे वो शान।।देश की संस्कृति को बचाया।हिंदुस्तान का मान बढ़ाया।।सच रहा पर वो सदा चले।धार्मिक का पाठ सबको पढ़ाया।।गरीब की मदद करो बताया।दिलों में देश…

  • ट्यूशन | Tuition

    मेरे पिता जी का ट्रांसफर जलालाबाद ( थानाभवन) से बदायूं हो गया,बदायूं के पास एक छोटा सा गाँव था तातागंज, वहाँ मैं कुछ दिन ही रहा,मेरे पापा डॉक्टर थे, नीचे अस्पताल था ऊपर मकान जिसमें हम लोग रहते थे। मकान की ख़ाशियत ये थी की दरवाज़े तो थे पर कुंडी नहीं थी,उस गाँव में मुझे…

  • सपने | Sapne

    सपने सपने नितांत जरूरी हैंजैसे हवा और पानीसपने बंजर भूमि में खिले फ़ूल हैंजो ख़ुशबू की तरहआपका जीवन महकाते हैंआपके नीरस और बेमक़सद जीवन को उद्देश्य देते हैं सपने देखे जाते हैंकभी सोते हुएकभी जागते हुएसपनों को यूहीं न जाने दोआज नहीं तो कल पूरे होंगेसपनों को यूहीं न जाने दोक्योंकि यदि सपने मर गएतो…

  • माँ की उलाहने

    माँ की उलाहने बिटिया जब छोटी थीमॉं के लिए रोती धी,पल भर न बिसारती थीमाँ – माँ रटती रह जाती थी। थोड़ी सी जब आहट पायेचहुओर नजरे दौड़ाये,नयन मिले जब माँ सेदोंनो हृदय पुलकित हो जाये। अब तो बिटिया हुई सयानीआधुनिकता की चढ़ी रवानी,नये तेवर में रहती है अति बुद्धिमानी अपने को,माँ को बुद्धॣ कहती…

  • ‘वाचाल’ की हरियाणवी कुंड़लियाँ

    ‘वाचाल’ की हरियाणवी कुंड़लियाँ तड़कै म्हारे खेत में, घुस बेठ्या इक साँड़।मक्का अर खरबूज की, फसल बणा दी राँड़।।फसल बणा दी राँड़, साँड़ नै कौण भगावै।खुरी खोद कै डुस्ट, भाज मारण नै आवै।।फुफकारै बेढ़ाल़ भगावणिये पै भड़कै,घुस्या मरखणा साँड़ खेत में तड़कै-तड़कै।। बहुअड़ बोल्ली जेठ तै, लम्बा घूंघट काढ़।दीदे क्यूँ मटकावता, मुँह में दाँत न…

  • साग़र के दोहे

    साग़र के दोहे 1.सर्दी के आवेग से ,निकली सबकी हाय ।ऐसे में सब ने कहा ,हो जाये अब चाय ।।2.सर्दी में सूझा यही ,सबको एक उपाय।गरम गरम पिलवाइये ,साहब हमको चाय।।3.ठन्डा ,वन्डा रख दिया ,सबने आज उठाय ।सबके मन को भा रही , गरम गरम ही चाय ।।4.सर्दी में क्या पूछना , क्या है किस…

  • अनमोल तोहफा : बाल कहानी

    न्यू ईयर चार दिन बाद आने वाला था। 10 वर्षीय राजू की मम्मी सन्ध्या का बर्थडे इत्तेफाक से न्यू ईयर पर ही पड़ता था। अपनी मम्मी के जन्मदिन पर राजू ने अपनी मम्मी को गिफ्ट देने का प्लान बनाया। उसने बातों बातों में अपनी मम्मी से पूछा:-“मम्मी जी, इस न्यू ईयर पर आपके जन्मदिन के…