• हिंदी : बोलचाल की भाषा

    हमारे कण – कण में व्याप्त आम बोलचाल की भाषा हिंदी है । हिंदी भाषा के द्वारा स्वाध्याय, लेखन आदि का सही से ज्ञान होता है । पुराने समय में वह अभी प्रचलित भाषा में एक हिंदी है । मन के भाव व्यक्त करने का माध्यम की भाषा हिंदी है । साहित्यिक रस धार की…

  • नेह शब्द नही | Neh Shabd Nahi

    नेह शब्द नहीप्रसंग का विषय नहीयह दृष्टिगोचर नही होतायह कहा भी नही जातायह सिर्फ और सिर्फअनुभूत करने का माध्यम हैयह अन्तरतम मेंउठा ज्वार हैनितान्त गहराजिसमें केवल समाहित होना हैउसके बाद फिर होश ही कहाँ रहता हैयह एक ऐसा आल्हाद हैजिसको शब्दातीत, वर्णातीतनही किया जा सकता।यह शब्दों के बंधनों में नहीं बंधतासिर्फ अनुभूत किया जा सकता…

  • छत पर चाँद बुलाने से अच्छा

    छत पर चाँद बुलाने से अच्छा छत पर चाँद बुलाने से अच्छा,उसपर टहला जाए तो अच्छा, मिलता ना कोई इन्सां से इन्सां,खुद से मिलन हो जाए तो अच्छा, होती है अब ना कोई खातिरदारी,कोई मन ही सहला जाए तो अच्छा, होता ना हमसे चहरे पे लेपन,सेहत सम्हाली जाए तो अच्छा, इस जग में कितनी है…

  • मुहब्बत के झूठे रिवाजों से पूछो

    मुहब्बत के झूठे रिवाजों से पूछो मुहब्बत के झूठे रिवाजों से पूछोवफ़ा चाहतों के फ़सानों से पूछो यहाँ बंद सारे मकानों से पूछोगिरी गाज जिन उन किसानों से पूछो छुपा कौन दिल के खयालों में मेरेउन्हीं के सुनों तुम इशारों से पूछो रुलाया यहाँ कौन है चालकों कोयहां पे खड़े मेज़बानों से पूछो वफ़ा का…

  • उड़ता युवा

    उड़ता युवा आज के युग का उड़ता युवा ।खेल रहा वह जीवन से जुआ ।। युवाओं की आज बिगड़ी संगत ।संगत से ही मिलती सदा रंगत ।। गफलत में होते आज के युवा ।नहीं देखते आगे खाई है या कुआं ।। सब युवा करते अपनी मनमानी ।नशें में बर्बाद कर रहे जिंदगानी ।। घर-घर में…

  • दिल में हमारे आज भी

    दिल में हमारे आज भी ( ‘वाचाल’ ग़ज़लमतलआ छोड़कर सारे अश्आर तिटंगे ) दिल में हमारे आज भी अरमान पल रहा हैयूँ मानिए कि दिल को ये दिल ही छल रहा है रंगे-निशात झेला बारे-अलम उठा करना जाने किस बिना पर ये साँस चल रहा हैजुड़ता है टूट-टूट कर फ़िर-फ़िर संभल रहा है वो पूछते…

  • दादी जी का घर

    दादी जी सलुम्बर में अकेले ही रहती थी.. नागपुर छोड़ने के बाद वे और दादाजी दोनों सलूंबर में स्थायी हो गए थे.. दादा जी के निधन के बाद मैने दादी जी को बहुत बार कहा की चलो मेरे साथ अकोला.. मगर वे नही मानी। वे तो भरेपूरे समाज में समाज के साथ रहना चाहती थी…..

  • गुरु गोविंद सिंह जी | Guru Gobind Singh Ji 

    गुरु गोविंद सिंह जी खालसा पंथ की स्थापना करने वाले,महान योद्धा, चिंतक देश के रखवाले।पौष शुक्ल पक्ष सप्तमी संवत् 1723 ,धरा की रक्षा के लिए अवतरित होने वाले।। अन्याय,अपराध के खिलाफ लड़ने वाले,युद्ध में मुगलों के छक्के छुड़ाने वाले।धर्म की रक्षा के लिए सरबंसदानी बने,कलगीधर,दशमेश की उपाधि पाने वाले।। पिता गुरु तेग बहादुर माता गुजरी…

  • दुल्हन किसकी?

    शाम को जब पवन मजदूरी से घर वापस आया तो… उसको पता चला कि पवन का दूर का मौसेरा भाई मोहित उसके पीछे अपनी शादी का कार्ड पड़ोस में देकर गया है। शादी के कार्ड पर जब उसने लड़की का नाम नीलम, पिता का नाम रामस्वरूप, गांव रामनगर, जिला काशीपुर, राज्य उत्तराखंड लिखा देखा तो……

  • बलिदानी गुरु गोविन्द सिंह

    बलिदानी गुरु गोविन्द सिंह देशभक्ति का खून रग-रग में दौड रहा था,स्वाभिमान से दुश्मनों को वह तोड रहा था।देश खातिर साहसी सर झुकाते रहे गुरूवर,तलवार धर्म पर बलिदान हेतु मोड़ रहा था। राष्ट्रभक्त, धर्मनिष्ठ, त्यागी वीर गुरु गोविन्द,धन्य गुजरी माता, पिता तेगबहादुर और हिन्द।खालसा पंथ निर्माण कर सिक्ख किया एकजुट,बचपन से कुशल कवि दार्शनिकता दौड…