• शब्दाक्षर राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था राजस्थान के तत्वावधान में नववर्ष पर कवि गोष्ठी

    शब्दाक्षर राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था राजस्थान के तत्वावधान में जांगिड अस्पताल परिसर में नववर्ष पर कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डाॅ दयाशकर जांगिड ने की। मुख्य अतिथि समाजसेवी कैलाश चोटिया तथा विशिष्ट अथिति मुरली मनोहर चोबदार रामावतार सबलानिया सीताराम घोड़ेला थे। शब्दाक्षर राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि प्रताप सिंह ने सबको नववर्ष की शुभकामनाएं…

  • कवि गोपालदास नीरज

    कवि गोपालदास नीरज नमन है, वंदन है, जग में तुम्हारा पुनः अभिनंदन है,लाल है भारत के, आपके माथे पर मिट्टी का चंदन है।पद्मश्री हो आप, पद्म भूषण से सम्मानित हुए आप हो,प्रणाम है आपको, आपका बारंबार चरण वंदन है।। खो गए मस्त गगन में प्रेम का गीत पढ़ा करके हमको,चले गए जग को कितने मधुर…

  • होली में

    होली में किया जख़्मी उसी ने है मुझे हर बार होली मेंगुलो के रंग से मुझपर किया जो वार होली में नही रूठों कभी हमसे भुला भी दो गिले सारेतुम्हारे ही लिए लाएँ हैं हम यह हार होली में रही अब आरजू इतनी कि तुमसे ही गले लगकरबयां मैं दर्द सब कर दूँ सुनों इस…

  • प्रकृति का अद्भुत श्रृंगार

    प्रकृति का अद्भुत श्रृंगार ( 2222 2222 222 )निर्मल गंगा सी धारा तुम बहती होशबनम के मोती जैसी तुम लगती हो चंद्रप्रभा रातों की सुंदरता में तुमआँचल बन कर फैली नभ में दिखती हो यूँ लगता है जैसे ऊँचे परबत सेकल-कल करती झरने जैसी बहती हो फूलों की कोमल पंखुड़ियों के जैसेभँवरे की प्रीती की…

  • जीवन का लक्ष्य

    जीवन का लक्ष्य (कुछ प्रेरणादायक बातें जो मैं स्वयं से कहता हूँ..) अपने लिए जीना सीखो कब तक औरों के लिए तुम ऐसे जीते रहोगे,अपनी खुशी के लिए करना सीखो कब तक औरों को खुश करते रहोगे। नापसंद को मना करना सीखो कब तक यूँ झिझक महसूस करते रहोगे,जब तुम सच्चे हो अपने जीवन में…

  • चालाकियां चलता रहा

    चालाकियां चलता रहा ( ग़ज़ल : दो काफ़ियों में ) मुफ़लिसी से मेरी यूँ चालाकियाँ चलता रहाज़हनो-दिल में वो मेरे ख़ुद्दारियाँ भरता रहा मैं करम के वास्ते करता था जिससे मिन्नतेंवो मेरी तक़दीर में दुश्वारियाँ लिखता रहा मोतियों के शहर में था तो मेरा भी कारवाँफिर भला क्यों रेत से मैं सीपियाँ चुनता रहा कहने…

  • कहाँ थे पहले?

    कहाँ थे पहले? खिड़की के हिलते पर्दों के पासतुम्हारी परछाईं नज़र आती हैकाश !तुम होते –ख़यालों में, कल्पनाओं मेंकितने रंग उभरते हैंदूर कहीं अतीत कीझील में डूब जाते हैंकभी लगता है, स्वप्न देख रही हूँकभी लगता है जाग रही हूँ यह बोझिल सन्नाटा, यादों का तूफ़ान,तुम्हारे ख़यालों की चुभती लहरें,मेरे भीतर कहीं टूटती, बिखरती,एक अनकही…

  • यह नवल वर्ष

    यह नवल वर्ष यह नवल वर्षमन में भर देउत्साह और हर्षघटे निराशाओं का तमहों कामयाब हम स्वार्थ का दैत्यकभी छल न सकेअब मंथराकोई चाल चल न सके आशाओं के कँवल खिल जायेंनिर्धारित लक्ष्य मिल जायें हर स्वप्न संपूर्ण होकामना परिपूर्ण हो सुदृढ़ और विश्वास होसार्थक हर प्रयास हो उदय ज्ञान का आदित्य होप्रफुल्लित निरन्तर साहित्य…

  • राजनीति व्यंग्य

    राजनीति व्यंग्य इंड़ी फेल हुआ है तो क्याजनता में विश्वास जगाएँचलो नया दल एक बनाएँ राजनीति के मकड़जाल जाल सीअधरों पर मुस्कान लियेमफ़लर स्वैटर टोपी चप्पलकंगालों सी शान लियेलोगों के काँधे चढ़ जाएँ किस को याद रहा है कब-कबकिस ने किस-किस को लूटाकब फ़िर धोती चप्पल वालापहन लिया सूटा-बूटाजनमानस को फ़िर उलझाएँ गुमनामी में बीता…

  • गाड़ी बुला रही है

    और अंततः वो छुक छुक गाड़ी बंद हो ही गयी.. पिछले करीब एक सो पच्चास सालो से अनवरत चलने वाली मिटर गेज रेल गाड़ी ने साल 2016 के अंतिम दिन अपना अंतिम सफर पूरा किया। नए साल का पहला दिन पूरी शांति के साथ बिता.. बीते डेढ़ सौ वर्षो का शौर थम गया.. स्टेशन खामोश…