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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • काहे बावड़ी पे बैठी राधा रानी
    कविताएँ

    Kavita | काहे बावड़ी पे बैठी राधा रानी

    ByAdmin April 1, 2021

    काहे बावड़ी पे बैठी राधा रानी ( Kahe Bawri Pe Baithi Radha Rani )   काहे बावड़ी पे बैठी राधा रानी, चलो चलते है यमुना के घाट पे। आया  सावन   भरा  नदी   पानी, चलो चलते है नदियां के घाट पे।।   बैठ कंदम्ब की डाल कन्हैया, मुरली  मधुर  बजाए। जिसकी धुन पर बेसुध गैय्या, ऐसी …

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  • दिल में मेरे इस कदर अहसास तेरा
    शेरो-शायरी

    Ghazal Dil Mein Mere | दिल में मेरे इस कदर अहसास तेरा

    ByAdmin April 1, 2021February 12, 2023

    दिल में मेरे इस कदर अहसास तेरा ( Dil Mein Mere Is Kadar Ehsaas Tera )   दिल में मेरे इस कदर अहसास तेरा। हर जगह अब हो रहा आभास तेरा।।   दिल बहलता ही नहीं तस्वीर से अब। हमको  भी  दीदार होता काश तेरा।।   रोज  करते  हो नए तुम तो बहाने। कैसे आए…

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  • जंग लगी हो गर लोहे में तो ताले नहीं बनाते
    कविताएँ

    Kavita | जंग लगी हो गर लोहे में तो ताले नहीं बनाते

    ByAdmin April 1, 2021

    जंग लगी हो गर लोहे में तो ताले नहीं बनाते ( Jang Lagi Ho Gar Lohe Mein To Tale Nahin Banate )   जंग लगी हो गर लोहे में तो ताले नहीं बनाते  गरीब गर गरीब है तो लोग रिश्ते नहीं बनाते   जर्जर हो गर बुनियाद तो मीनारें रूठ जाती हैं सुखे हो गर…

    Read More Kavita | जंग लगी हो गर लोहे में तो ताले नहीं बनातेContinue

  • रिश्ता प्यार का जोड़ना चाहता हूँ
    शेरो-शायरी

    Ghazal | रिश्ता प्यार का जोड़ना चाहता हूँ

    ByAdmin April 1, 2021April 1, 2021

    रिश्ता प्यार का जोड़ना चाहता हूँ ( Rishta Pyar Ka Jodna Chahta Hoon )   रिश्ता प्यार का  जोड़ना चाहता हूँ! दीवारें नफ़रतें  तोड़ना चाहता हूँ   मिली है किसी दर से ही बेदिली है अब यें शहर मैं छोड़ना चाहता हूँ   ख़फ़ा होते है लोग मुझसे यहां कुछ यहां सच जब भी बोलना…

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  • ब्याज दर घटाने का फैसला वापस!
    कविताएँ

    Kavita Bayaj Dar | ब्याज दर घटाने का फैसला वापस!

    ByAdmin April 1, 2021February 12, 2023

    ब्याज दर घटाने का फैसला वापस! ( Bayaj Dar Ghatane Ka Faisla Wapas )   निर्णय बदल लिया है, वित्त मंत्री ने ट्विटर कर जानकारी दिया है; सरकार ने ब्याज दर घटाने का फैसला वापस ले लिया है। पुरानी दरें रहेंगी बरक़रार, बधाई हो सरकार! वरना गरीबों की समस्याएं बढ़ती बेशुमार। बचत ही नहीं होती,…

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  • नींद नहीं आसां
    कविताएँ

    Neend par Kavita | नींद नहीं आसां

    ByAdmin April 1, 2021February 12, 2023

    नींद नहीं आसां ( Neend Nahi Aasan ) चीज नई नहीं है, सहज भी नहीं है। बमुश्किल आती है, मेहनतकशों को लुभाती है। आरामतलबों को रूलाती है, बमुश्किल उन्हें आती है; अनिद्रा रोगी बनाती है। खाते औषधि दिन रात, फिर भी बनती नहीं बात। बद से बदतर जब होते हालात- तो निकलते सुबह सैर पर,…

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  • शफ़क़ का वह शिहाब बन यूं आया
    शेरो-शायरी

    शफ़क़ का वह शिहाब बन यूं आया | Suneet Sood Amazing Ghazal

    ByAdmin March 31, 2021February 12, 2023

    शफ़क़ का वह शिहाब बन यूं आया ( Shafaq Ka Wah  Shihab Ban Yoon Aya )   शफ़क़ का वह शिहाब बन यूं आया कि  शाम  रौशन  कर  गया  मेरी   लगा हज़ारों चाँद उतर आये ज़मीं पर वो  रात  भी  हर  रात  जैसी  न  थी   जो   छुआ   उस   महताब   को  तो भर गये…

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  • इक़रार ए मुहब्बत का वो ज़वाब देता
    शेरो-शायरी

    Love Shayari | इक़रार ए मुहब्बत का वो ज़वाब देता

    ByAdmin March 31, 2021March 31, 2021

    इक़रार ए मुहब्बत का वो ज़वाब देता ( Iqrar -E- Muhabbat Ka Wo Jawab Deta )   इक़रार  ए  मुहब्बत  का  वो  ज़वाब देता तो मैं उसे मुहब्बत का आज़म गुलाब देता   अहसास नफ़रतों का लगता नहीं मुझे फ़िर जो  प्यार  की  रवानी  दिल से ज़नाब देता   कर  लेता  वो मुहब्बत मेरी क़बूल…

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  • मुझे आजाद कर दो
    कहानियां

    Laghukatha | मुझे आजाद कर दो

    ByAdmin March 31, 2021March 31, 2021

    वेंटिलेटर पर पड़ी वह बार-बार एक ही बात बोले जा रही है “मैं मर जाना चाहती हूं,प्लीज मुझे मर जाने दो।” जिंदगी और मौत के बीच झूलती उस लड़की को जिंदगी से इस कदर नफरत हो गयी है कि अपने हाथों से ऑक्सीजन मास्क,तमाम नलियां नोचने की कोशिश कर रही है। नर्सें उसके दोनों हाथ…

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  • करो शिकवा किसी से मत ग़मों को झेलना सीखो
    शेरो-शायरी

    Ghazal | करो शिकवा किसी से मत ग़मों को झेलना सीखो

    ByAdmin March 31, 2021March 31, 2021

    करो शिकवा किसी से मत ग़मों को झेलना सीखो ( Karo Shikawa Kisi Se Mat Gamon Ko Jhelna Sikho)   कभी शिकवा नहीं करना ग़मों को झेलना सीखो। लिखा  तकद़ीर में रब ने उसी से जूझना सीखो।।   जो होता है उसे मर्जी खुदा की मान लेना तुम। सदा ही अपनी मर्जी को परे तुम…

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