काहे बावड़ी पे बैठी राधा रानी

Kavita | काहे बावड़ी पे बैठी राधा रानी

काहे बावड़ी पे बैठी राधा रानी

( Kahe Bawri Pe Baithi Radha Rani )

 

काहे बावड़ी पे बैठी राधा रानी,

चलो चलते है यमुना के घाट पे।

आया  सावन   भरा  नदी   पानी,

चलो चलते है नदियां के घाट पे।।

 

बैठ कंदम्ब की डाल कन्हैया,

मुरली  मधुर  बजाए।

जिसकी धुन पर बेसुध गैय्या,

ऐसी  तान  सुनाए।

 

काहे बावडी पे बैठी मन मार के,

चलो चलते है यमुना के घाट पे।

सखी  देखे  है  राह  राधा  रानी,

चलो चलते है नदियां के घाट पे।।

✍?

कवि :  शेर सिंह हुंकार

देवरिया ( उत्तर प्रदेश )

?

शेर सिंह हुंकार जी की आवाज़ में ये कविता सुनने के लिए ऊपर के लिंक को क्लिक करे

यह भी पढ़ें : –

फागुन के दिन | Holi Poem in Hindi

Similar Posts

  • मुहब्बत | Muhabbat Shayari Hindi

    मुहब्बत ( Muhabbat )    जाति , धर्म , मजहब का बहाना अच्छा नहीं लगता। प्यार में गुणा, भाग,जोड़, घटाना अच्छा नहीं लगता।। जीत का जज्बा लेकर कितने हारे मैदान ए मुहब्बत में, वरना किसी जंग में हार जाना अच्छा नहीं लगता।। मुश्किलें हमसफ़र हो जाती हैं राह ए मुहब्बत में यहाँ, वरना किसी मुसाफिर…

  • |

    पहचान | Pahchan par Bhojpuri Kavita

    पहचान ( Pahchan )    हम बिगड़ ग‌इल होती गुरु जी जे ना मरले होते बाबु जी जे ना डटले होते भ‌इया जे ना हमके समझ‌इते आवारा रूप में हमके प‌इते बहिन जे ना स्नेह देखाइत माई जे ना हमके खियाइत झोरी में ना बसता सरीयाइत आवारा रूप में हमके पाइत सुते में हम रहनी…

  • दीपावली पर कविता | Diwali Kavita in Hindi

    दीपावली पर कविता ( Diwali par kavita ) ( 2 ) आने वाला एक त्योहार, दिया जले उसमें दो चार। कुछ थे रंग बिरंगे वाले, कुछ थे कच्ची मिट्टी वाले। कुछ में घी और कुछ में धागे। बच्चे भी थे रात को जागे, दीपावली के जगमग रात में ।खुशियों का संचार है,एक दूसरे को सब…

  • सृष्टि की माया | Srishti ki Maya

    सृष्टि की माया ( Srishti ki maya )    इस सृष्टि की माया में जैसा इन्द्रियों को सुख चाहिए वैसा ही मिलता है मगर सुखों के अन्त में दुःख यह वि‌रोधाभास हर बार हर जगह मिलता है क्षणिक आनन्द के लिए परउत्पीडन क्यों हिंसा वन्य प्राणियों में प्रकृति का नियम है? पीड़ा रहित रक्तपात रहित…

  • साळी दैव ओळमो | Marwadi sahitya

    साळी दैव ओळमो   कदे जलेबी ल्यायो ना हंस हंस क बतलायो ना वार त्योहारां आयो ना हेतु घणों बरसायो ना   मैळो कदे दिखायो ना गाड़ी म घुमायो ना घूमर घालैण आयो ना गीत सुरीला गायों ना   साळी बोली हां र जीजा आव ओळमो तन दयू जीजी रा भरतार बता दें क्यां पै…

  • रामलला प्राण प्रतिष्ठा पर | Ramlala Pran Pratistha Par

    रामलला प्राण प्रतिष्ठा पर ( Ramlala Pran Pratistha Par )   रामलला प्राण प्रतिष्ठा पर,सविनय हार्दिक निमंत्रण सह्रदय करबृद्ध निवेदन, सानुग्रह शुभ मंगल प्रयोजन। बाईस जनवरी दिव्य बेला, घर द्वार उत्सविक आयोजन । विधिवत भव्य आराधना स्तुति, मर्यादा पुरुषोत्तम श्री चरण । रामलला प्राण प्रतिष्ठा पर,सविनय हार्दिक निमंत्रण ।। दीप प्रज्वलन प्रकाश श्रृंगार, स्वच्छ परिवेश…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *