• फालतू की राय

    “पिताजी, मैं ग्रीन सिटी के बराबर में जहाँ पर प्लॉटिंग हो रही है, वहाँ एक प्लॉट लेना चाहता हूँ। आपकी इस बारे में क्या राय है? क्या मेरा वहाँ प्लॉट लेना ठीक रहेगा?”मोहित ने अपने एडवोकेट पिता नरेश जी के ऑफिस में घुसते हुए पूछा। “ठीक है। ले लो। कोई दिक्कत नहीं।”अपने वकील मित्र राजेश…

  • दिसंबर गुज़रा

    दिसंबर गुज़रा तेरे वादे पे कहें क्या ऐ-सितमगर गुज़राराह तकते ही फ़कत अपना दिसम्बर गुज़रा जनवरी से ये नवम्बर का महीना है अबइतनी मुद्दत में इधर से न वो होकर गुज़रा काश वैसा ही गुज़र जाये महीना यह भीजितना रंगीन तेरे साथ सितम्बर गुज़रा शायरी करते हैं कहने को हज़ारों शायरमीर ग़ालिब सा न कोई…

  • अहं का नशा

    अहं का नशा नशा मदांध कर देता हैमनुष्य जन्म का मूलउद्देश्य ही भुला देता हैजो उड़ते है अहं के आसमानों मेंज़मीं पर आने में वक़्त नही लगताहर तरह का वक़्त आता है ज़िंदगी मेंवक़्त गुज़रने में वक़्त नही लगता हैंनशा जहर से ज़्यादा घातक हैअहं का नशा हावी हो ही जाता हैऔर उनके विवेक पर…

  • संत गुरु घासीदास | Sant Guru Ghasidas

    संत गुरु घासीदास छोटे-बड़े का भेद मिटाकर,सबको एक समान बनाए।संत गुरु घासीदास का संदेश,जो जग को राह दिखाए।दूसरे का धन पत्थर समझो,परस्त्री को माता मानो।सत्य की डगर पर चलकर,जीवन को उजियारा जानो। जुआ-शराब के मोह को छोड़ो,ये दुख का कारण है।पाप की राह जो चुने,वो केवल संकट का दर्पण है।संत की वाणी अपनाकर, सत्य की…

  • निभाए तो कैसे, कौन-सा रिश्ता?

    निभाए तो कैसे, कौन-सा रिश्ता? गुलिस्तां जो थे सुनसान हो गए।पंछी पेड़ों से अनजान हो गए॥ आदमी थे जो कभी अच्छे-भले,बस देखते-देखते शैतान हो गए॥ सोचा ना था कभी ज़ख़्म महकेंगे,गज़लों का यू ही सामान हो गए॥ निभाए तो कैसे, कौन-सा रिश्ता?दिल सभी के बेईमान हो गए॥ पूछते हैं काम पड़े सब हाल मियाँ,मतलबी अब…

  • सर्दी | Sardi

    सर्दी सर्दी में होती जब कड़क ठंडी हवा ।चाय की प्याली होती सबकी प्यारी दवा।।मास दिसंबर में जब होती प्यारी सर्दी।भाई पहन लेते सब अपनी गर्म वर्दी।। सर्दी में जब-जब ठंडी हवा चलती।कपड़े भी देखो कहा हवा सुखाती।।ठंडी हवा में चाय की प्याली होती प्यारी।ठंडी हवा में चाय का मजा लें दुनिया सारी।। किट-किट बजते…

  • चिट्ठी और संदेश

    चिट्ठी और संदेश तेरी यादें, हवाओं में सजी हैं,हर आहट में तेरी कोई कड़ी बसी है।चिट्ठी न कोई, न ही कोई पैगाम,तेरे बिना वीरान लगे ये सारा जहां तमाम। तेरे जाने का दर्द, अब भी दिल से उतरता नहीं,हर रास्ता तेरा पता पूछता है, कहीं पर भी रुकता नहीं।जाने वो कौन सा देश है, जहाँ…

  • जख़्म के हर निशान से निकला

    जख़्म के हर निशान से निकला जख़्म के हर निशान से निकलादर्द था वो अज़ान से निकला लोग जो भी छिपा रहे मुझसेबेजुबां की जुबान से निकला इश्क़ के हो गये करम मुझ परतीर जब वो कमान से निकला आँख भर ही गई सुनो मेरीआज जब वो दुकान से निकला आज सब कुछ लिवास से…

  • मां तुम रोना मत | Maa Tum Rona Mat

    मां तुम रोना मत अब अगले जन्म में मिलनामैं बनने वाला हूंकिसी भी पल लाशयहां बस जंगल हैंगीदड़, कुत्ते, भेड़ियों के दंगल हैंखा जाएंगे नोच –मेरी देह कोतुम्हें मेरी मिट्टी भी नहीं मिलेगीवहीं अपने खेत की मिट्टी कोअपनी छाती से लगा लेनामुझे राजा बेटा कह- कहपुकार लेनामां मत रोना मुझे याद हैजब पहली बार तुमखेत…

  • चश्मे-तर बोलना

    चश्मे-तर बोलना कैसे कोशिश करे चश्मे-तर बोलनाहुक्म उसका उसे राहबर बोलना पूरी कर दूँगा तेरी हरिक आरज़ूप्यार से तू मगर उम्र भर बोलना इस ख़मोशी से कैसे कटेगा सफ़रकुछ तो तू भी मेरे हमसफ़र बोलना मैंने मजबूर होकर के लब सी लियेरूबरू उसके है बेअसर बोलना मेरी ख़ामोशी चुभने लगी क्या उसेकह रही है वो…