दिसंबर गुज़रा

दिसंबर गुज़रा

दिसंबर गुज़रा

तेरे वादे पे कहें क्या ऐ-सितमगर गुज़रा
राह तकते ही फ़कत अपना दिसम्बर गुज़रा

जनवरी से ये नवम्बर का महीना है अब
इतनी मुद्दत में इधर से न वो होकर गुज़रा

काश वैसा ही गुज़र जाये महीना यह भी
जितना रंगीन तेरे साथ सितम्बर गुज़रा

शायरी करते हैं कहने को हज़ारों शायर
मीर ग़ालिब सा न कोई भी सुख़नवर गुज़रा

हम जिसे देख के दो चार ग़ज़ल कह लेते
तेरे जैसा न कोई दूसरा पैकर गुज़रा

इसलिए लोग मुझे शौक से पढ़ते हैं यहाँ
मेरी ग़ज़लों से तेरा अक्स बराबर गुज़रा

जिस पे लिख्खा था मेरा नाम किसी ने साग़र
मेरे सर के ही बराबर से वो पत्थर गुज़रा

Vinay

कवि व शायर: विनय साग़र जायसवाल बरेली
846, शाहबाद, गोंदनी चौक
बरेली 243003

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • शिकायत न शिकवा | Ghazal Shikayat na Shikwa

    शिकायत न शिकवा ( Shikayat na Shikwa ) चलो अब रहा तुम से वादा हमारा, पलटकर ना तुमको देखेंगे दोबारा ! मुसीबत में डाले खुदी को खुद से, दिखाया मुहब्बत ने कैसा नज़ारा ! टूटे है कहाँ से कैसे हम बताये, हुआ कैसा दिल का ख़सारा ख़सारा ! नहीं है शिकायत न शिकवा किसी से,…

  • पास बैठो | Paas Baitho

    पास बैठो ( Paas Baitho ) पास बैठो दो घड़ी मेरे सनमगर न बैठे तो तुम्हें दूंगी कसम जिंदगी में मौज ही सबकुछ नहींध्येय को भी सामने रखना बलम खुद के पैरों पर ही चलना ताकि येकह सको इस जग को हैं खुद्दार हम मुस्कुराकर प्रेम से हर फ़र्ज़ कोगर निभाओगे सफल होगा जनम राक्षसों…

  • हमने देखी है | Hamne Dekhi Hai

    हमने देखी है ( Hamne Dekhi Hai ) वह्म जैसी कोई बला ही नहीं।इस मरज़़ की कहीं दवा ही नहीं। हमने देखी है हम बताएंगे।हिज्र जैसी कोई सज़ा ही नहीं। लाख कोशां रहे अ़दू लेकिन।क़द हमारा कभी घटा ही नहीं। ज़ुल्म ढाता है रात दिन फिर भी।उसकी नज़रों में ये ख़ता ही नहीं। अ़हदे ह़ाज़िर…

  • हमने देखा है | Humne Dekha Hai

    हमने देखा है मुस्कुराते गुलाब की मानिंद।हर ख़ुशी है शराब की मानिंद। हमने देखा है ग़ौर से इसको।ज़िन्दगी है ह़बाब की मानिंद। धुन है गर आसमान छूने की।बनिए ज़िद्दी उ़क़ाब की मानिंद। कैसे ढालूं मैं हाय रे ख़ुद को।चश्मे-जानां के ख़्वाब की मानिंद। कोई सानी ही जब नहीं उनका।किसको लिक्खूं जनाब की मानिंद। मिल न…

  • ज़िंदगी खुल के जियो | Zindagi Khul ke Jiyo

    ज़िंदगी खुल के जियो ( Zindagi Khul ke Jiyo ) ज़िंदगी खुल के जियो बस ये भरोसा करकेएक दिन मौत बुला लेगी इशारा करके कौन ऋण इनका चुका पाया है इस दुनिया मेंअपने माँ बाप को छोड़ो न किनारा करके आपकी दीद को हर रोज तड़पते हैं हमथक गए चाँद का हर रात नज़ारा कर…

  • बाहों में जब वो आएंगे | Bahon Mein Jab

    बाहों में जब वो आएंगे ( Bahon mein jab bahon woh aayenge ) बाहों में जब वो आएंगे।ग़म ख़ुशियों में ढल जाएंगे। याद उन्हें जब आएंगे हम।मन ही मन वो मुस्काएंगे। अ़र्ज़ -ए-तमन्ना पर वो हमारी।ग़ौर कभी तो फ़रमाएंगे। रह-रह कर यूं दिल वो हमारा।देखें कब तक तड़पाएंगे। इक दिन ऐसा भी आएगा।गीत हमारे सब…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *