सिंदूर
सिंदूर वक्त की चकाचौंधी इतनी भी मंजूर न कर। तेरा सिंदूर हूं तूं सर मुझे दूर न कर।। दीखता चुटकियों में हूं मगर विशाल हूं मै, हर एक रंग समेटे हुये पर लाल हूं मै।, तेरा श्रृंगार हूं तूं कांच जैसे चूर न कर।।तेरा सिंदूर ० नीले गगन मे सूर्य की चमक…
तारक मेहता का उल्टा चश्मा °°°°°° –> ऐपिसोड हुए 3000 अभी, आगे भी होने बांकी हैं |?| 1.निश दिन नूतन संदेशा लाते, खुद हँसते और हंसाते हैं | अलग-अलग है कल्चर फिर भी, संग-संग रोते-गाते हैं | गोकुल धाम केे सब हीरे-मोती, एक धागे मे पिरोये हैं | उदासी मे खुशियां…
है गुल से हम को उलफ़त तो ख़ार भी है प्यारा है गुल से हम को उलफ़त तो ख़ार भी है प्यारा। गुलशन में खुश वही है जो समझ गया इशारा।। पत्थर पे मैंहदी पिसती अग्नि में तपता सोना। दुःखों को सहन करके जीवन सभी निखारा।। हम डूब जायें बेशक…
दोस्त करनी दुश्मनी अच्छी नहीं दोस्त करनी दुश्मनी अच्छी नहीं! रिश्तों में यूं बेरुख़ी अच्छी नहीं जिंदगी की लुट जाये खुशियां अगर फ़िर ये कटती जिंदगी अच्छी नहीं प्यार से मिलकर रहों हाँ उम्रभर यूं करनी नाराज़गी अच्छी नहीं चैन दिल का लुट ले जाती है सभी हाँ ये करनी…
हमने पढने पर कब रोक लगाई है हमने पढने पर कब रोक लगाई है। कपड़े सही कर लो इसीलिए तो ड्रेस लगाई है।। मैं नहीं कहता कि पश्चिम की कल्चर छोड़ दे। बस जरा खुले तन पर तू ओड ले।। आपत्ति नहीं है हमें तेरे जींस पर ,बस तू उसको फुल…
महिलाएं *** स्वभाव से संजीदा हैं होती, यह नहीं किसी से है छिपी। पुनः एकबार प्रमाणित हुई है, येल यूनिवर्सिटी की शोध प्रकाशित हुई है। अमेरिकी! कोरोना संक्रमण से बचाव को कितने हैं संजीदा? देखा गया, महिलाओं और पुरुषों के व्यवहार पर अध्ययन किया गया; है कैसा उनका रहन-सहन? यह भी देखा गया। सुनकर न…
जरा सी बात इतनी भारी हुयी जरा सी बात इतनी भारी हुयी। उम्र भर की हमें बीमारी हुयी।। आज जी भर के शायद रोया है, इसी से आंख भारी भारी हुयी।। फरेबी नश्ल ही रही उसकी, हानि जो भी हुयी हमारी हुयी।। उसे सुला के ही सो पाता हू़, न जाने…
मेरा और उसका गुमान वो अपने को सरेख समझ, मुझे पागल समझती रही, अब देख मेरी समझ, उसके तजुर्बे बदल गए, अब मुझे ज्ञानी समझ , अपने को अज्ञानी समझ रही। कुछ शब्द बोल माइक पर, अपने को वक्ता समझती रही, अब मंचों पर देख शब्दों का सिलसिला मेरा,…
पी मुहब्बत की मैंनें भी चाय है पी मुहब्बत की मैंनें भी चाय है ! इसलिए आहें निकलती दिल से है मिल गया है दर्द दिल को इक ऐसा वो गया पीला दग़ा की चाय है बेवफ़ा से मैं मुहब्बत कर बैठा जो नहीं समझा वफ़ा की चाय है रह…
पास उसके हमारा घर होता काश कुछ इस कदर बसर होता। पास उसके हमारा घर होता ।। काटकर पेड़ उसने रोके कहा छांव मिलता जो इक शज़र होता।। रतजगे मार डालेंगे अब मुझे, यार तुम पर भी कुछ असर होता।। जीने मरने की तो फिकर ही कहां, जो भी होता…