मैं ढूंढ़ता उसका ही रहा घर
मैं ढूंढ़ता उसका ही रहा घर मैं ढूंढ़ता उसका ही रहा घर उसका नहीं मुझको है मिला घर वो छोड़ के ही जब से गया है सूना बहुत मेरा ये हुआ घर उल्फ़त यहां दिल से मिट गयी है की नफरतों में ही ये जला घर देखो ग़म के साये…
मैं ढूंढ़ता उसका ही रहा घर मैं ढूंढ़ता उसका ही रहा घर उसका नहीं मुझको है मिला घर वो छोड़ के ही जब से गया है सूना बहुत मेरा ये हुआ घर उल्फ़त यहां दिल से मिट गयी है की नफरतों में ही ये जला घर देखो ग़म के साये…
साथ रहबर ना कोई सहारा हुआ साथ रहबर ना कोई सहारा हुआ। मुश्किलों में ना कोई हमारा हुआ।। देखते -देखते सब पराए हुए। वक्त आता नहीं सँग गुजारा हुआ।। काम आया कभी जो वतन के लिए। इस जहां में सभी का वो प्यारा हुआ।। पास आए सभी मांगने के लिए।…
मुशलशल अश्क बरसाया है पहली बार नहीं है मुशलशल अश्क बरसाया है पहली बार नहीं है। बस इतना कह के चले जा कि मुझसे प्यार नही है।। कत्ल करके मेरा कन्धे पे ले गया मुझको भला मैं कैसे कहूं मेरा मददगार नही है।। जाके तन्हाई में इत्मिनान से पढ़ ले इसको,…
हर बशर जी रहा दर्द छुपाए हुए हर बशर जी रहा दर्द छुपाए हुए। ग़म किसी भी तरह से भुलाए हुए।। दाग़ किसको दिखाएं ना आता समझ। सब नज़र आ रहे चोट खाए हुए।। साथ देता ना कोई बुरे वक्त पर। है हमारे सभी आजमाए हुए।। हाल-ए-दिल क्या सुनाए किसी शख्स…
प्यार से मां बना रही रोटी प्यार से मां बना रही रोटी हाँ खिलाती उल्फ़त भरी रोटी हो रही मां गुस्सा बहुत मुझसे खा गया है कोई सभी रोटी आया जब से परदेश में हूँ मैं याद आती मां की वही रोटी इसलिए रह गया हूँ भूखा मैं चूल्हे पे…
मुझे मुहब्बत की वह ज़माना याद है मुझे मुहब्बत की वह ज़माना याद है तुम्हारा हम से रूठ जाना याद है तुम्हे याद हो के ना उसका याद हो हमें दिन रात का फ़साना याद है उफ़्फ़ यह मुहब्बत का सजा भी अब तक हमको तेरा बहाना याद है बीमारी-ए-दिल…
रक्त बीज ( फिल्म स्क्रिप्ट ) एक मॉल मे प्रिन्टेड कपडे खरीदतीं तीन सहेलियों के साथ उनके तीन मंगेतर,बॉय फ्रेंड,हंसी-मजाक के साथ खाना खाया |अगले दिन चर्च,दुल्हन की तरह सजी है,मेहमानों के बीच शानदार पार्टी,लजीज खाने की तारीफ करते लोग,तभी एक गाडी आ कर रूकी,लीजा गाडी से उतर जोंस के पास आई,किश की,शादी कर,पार्टी मे…
दिवाली फिर आई 1 हर दिल अज़ीज, सदियों पुरानी, त्यौहारों की रानी, दिवाली फिर आई। 2 उर्ध्वगामी लौ से, सतत विकास करने, पुरातन को शोधने, दिवाली फिर आई। 3 ज्ञान के आलोक से, अज्ञान-तम मिटाती, हृदय ज्ञान जगाती, दिवाली फिर आई। 4 मति-देव का पूजन, महालक्ष्मी आरती, दरिद्रता दूर भगाती, दिवाली फिर आई। 5 सकल…
खादी एक शान है खादी एक शान है, खादी एक सम्मान है। स्वाभिमान है खादी, खादी एक सद विचार है। देसी धागों से बना हुआ, देश प्रेम मे सना। रेशम के तानों से तना, खादी एक सत्कार है। गांधी जी का जीवन दर्शन है, अपना तो दर्पण है, समर्पण है। तन ढकने को…