• मैं हूं एक जग भिक्षुक

    मैं हूं एक जग भिक्षुक मैं भिक्षुक हूं यारों बस, इस सारे जमाने का,कुछ नहीं है मेरे पास, लोगों को दिखाने का।। जरिया भी नहीं है मेरे पास रोटी कमाने का,साधन भी नहीं खुद को जग से मिटाने का।। मैं कोई गीत भी नहीं हूं जमाने के गुनगुनाने का,मैं सरगम भी नहीं हूं दीवाने के…

  • चक्र जो सत्य है

    चक्र जो सत्य है कुछ भी अंतिम नहीं होता,न स्पर्श , न प्रकृति और न कविता ,बस दृष्टिकोण बदल जाता हैक्योंकि, चक्र जीवन , पवन , गुरुत्वाकर्षण काअनवरत सहयात्री बन धरा को थामे ,खड़ा है पंच तंत्र के केंद्र पर तन्हा,पूछताक्या मजहब पेड़ , पानी, धरा, पवन , आकाश का ,लिखा है किसी ने बस…

  • परिवार अपना | Parivaar Apna

    परिवार अपना ( Parivaar Apna ) जहाँ से निराला है परिवार अपनाइसी पे लुटाता रहूँ प्यार अपना कदम बेटियों के पड़े घर हमारेमहकने लगा है ये संसार अपना ये बेटे बहू कब हुए है किसी केजो इनपे जताऊँ मैं अधिकार अपना मजे से कटी ज़िन्दगी भी हमारीचला संग मेरे जो दिलदार अपना करूँ मैं दुआएं…

  • ज़माने के चलन | Zamane ke Chalan

    ज़माने के चलन ( Zamane ke Chalan ) ज़माने के चलन ही सीख यह हमको सिखाते हैंकिसी को याद रखते हैं किसी को भूल जाते हैं छलकते हैं किसी की आँख से हर वक़्त पैमानेमुहब्बत से हमें हर बार वो जी भर पिलाते हैं न जाने कौन सा वो गुल खिलाने पर हैं आमादाअदाओं से…

  • यम द्वितीय ( भैय्या दूज )

    यम द्वितीय यम द्वितीया कार्तिक मास के द्वितीया को मानते हैं,यह त्यौहार भाई-बहन के प्रेम-सौंदर्य को दर्शाते हैं।बहन अपना स्नेह भाई के प्रति अभिव्यक्ति करती हैं,ये त्योहार यम द्वितीय और भ्रातदूज कहाते हैं।। बहने अपने भाई के खुशहाली की कामना करती हैं,बहने सुबह-सुबह घर में भैयादूज का पूजन करती हैं।भाई की आयु वृद्धि व सर्व…

  • कुछ नज़ीरों से

    कुछ नज़ीरों से ये बात आज भी साबित है कुछ नज़ीरों सेगये हैं शाह सुकूँ माँगने फ़क़ीरों से क़दम बढ़ाने से मंज़िल करीब आती हैउलझ रहा है तू क्यों हाथ की लकीरों से बहुत दिनों से है बरबाद ज़िन्दगी अपनीलड़ाई कितनी लड़ें अपने हम ज़मीरों से किया है सामना कुछ यूँ भी तंग दस्ती कालिबास…

  • सविता जी की कविताएँ | Savita Hindi Poetry

    पुरानी तस्वीर कुछ तस्वीरें पुरानी सी है। बीते दिनों की आखिरी निशानी सी है। पुराने होकर भी कुछ किस्से पुराने नहीं लगते। अंजान होकर भी कुछ लोग अनजाने नहीं लगते। यूं तो अक्सर हम आगे बढ़ जाते हैं वक्त के साथ । फिर भी कुछ लम्हे वहीं ठहर जाते हैं अपनों के पास। कभी-कभी लगता…

  • बिजलियां | Bijliyan

    बिजलियां ( Bijliyan ) किस क़दर रक़्स़ां हैं हाय बहरो-बर में बिजलियां।ख़ौफ़ बरपा कर रही हैं दिल-जिगर में बिजलियां। जिनकी हैबत से लरज़ता है बदन कोहसार का।बन्द हैं ऐसी तो मेरे ख़स के घर में बिजलियां। या ख़ुदा मेह़फ़ूज़ रखना , आशियाने को मिरे।वो गिराते फिर रहे हैं शहर भर में बिजलियां। क्या डरेंगे हम…

  • आओ पेड़ लगाएं

    आओ पेड़ लगाएं बच्चो आओ पेड़ लगाएं।अच्छे से फिर हम उन्हें बचाए,पेड़ो को हम देखे भाले।समय समय पर पानी डालें, पेड़ो को हम खूब सजाएं।पेड़ो पर भी चित्र बनाएं,पेड़ो पर भी बच्चे खेले।उन पेड़ो पर झूला झू‌ले, पेड़ो पर हम खेले कूदे।झूला डाल कर झूला झू‌ले। असदुल्लाह एजाजकक्षा 6विद्यालय उच्च प्राथमिक विद्यालय बनकसही यह भी…

  • भगवान विश्वकर्मा | शिल्प कौशल के दिव्य वास्तुकार

    विश्वकर्मा शिल्प कौशल के हिंदू देवता और देवताओं के वास्तुकार हैं। उन्होंने महलों, विमानों और देवताओं के दिव्य हथियारों को डिजाइन किया और बनाया। वह ब्रह्मांड के वास्तुकार भी हैं। उन्हें समर्पित विश्वकर्मा पुराण नामक एक पुराण है जिसमें उन्हें भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव का निर्माता माना जाता है। विश्वकर्मा शब्द में…