• तेरी शिकायत | Teri Shikayat

    तेरी शिकायत ( Teri Shikayat ) तेरी मेहरबानी का किस्सा सबको सुनाया।अंधा समझ हाथ पकड़ तूने रास्ता दिखाया। अब तो तेरी शिकायत करें भी तो किससे।सबके दिलों में तुझे हमने ही बसाया। तू चाहे अब जितने सितम कर ले इस पर।सहता चल बस यही दिल को समझाया। हर बार दिखाते रहे तुम आईना हरेक को।हर…

  • गणपत लाल उदय की कविताएं | Ganpat Lal Uday Poetry

    मां नील सरस्वती का प्रतीक बहुत निराली और रहस्यमयी है जिसकी ये कहानी,समुद्र मंथन से प्रकट हुआ सुना बुजुर्गो की ज़ुबानी।उन 14 रत्नों में से एक है ऐसा कहते समस्त ज्ञानी,हरसिंगार पारिजात शेफाली कहते कोई रातरानी।। कल्पवृक्ष भी कहते इसको जो रोपा गया इन्द्रलोक,संपूर्ण रात सुगंध बिखेरता फूल जिसका इन्द्रलोक।आमतौर पर यह देर शाम अथवा…

  • मेरी तनहाई | Meri Tanhai

    मेरी तनहाई ( Meri Tanhai ) दिल के अन्दर है मेरी तनहाईगहरा सागर है मेरी तनहाई क़द्रो-क़ीमत न कोई अश्कों कीजैसे पत्थर है मेरी तनहाई हो ज़माना भले सितमगर यहइक सिकंदर है मेरी तनहाई वो उजाला करे उदासी मेंइक दिवाकर है मेरी तनहाई यादें तेरी अगर हैं नश्तर सीमेरी दिलबर हैं मेरी तनहाई ओढ़ती और…

  • फ़ौरन संभाल लेता है

    फ़ौरन संभाल लेता है वो गुफ़्तगू में मिसालों को डाल लेता हैबिगड़ती बात को फौरन संभाल लेता है बढ़ेगा कैसे मरासिम का सिलसिला उससेज़रा सी बात पे आँखे निकाल लेता है छुपाना उससे कोई राज़ है बड़ा मुश्किलवो बातों बातों में दिल भी खंगाल लेता है कशिश अजीब सी रहती है उसके लहजे मेंहरेक शख़्स…

  • दिवाली पर

    दिवाली पर मिष्ठान की तश्तरीअब भरी ही रहती हैरंगोली भरी दहलीज़ भीअब सूनी ही रहती है रामा श्यामा करना हमेंअब बोझ लगने लगाबुजुर्गों का आशीर्वादअब बोर लगने लगा यह काल का प्रभाव है याभविष्य पतन की दिशावर्तमान का झूठा सुख याकल के समाज की दुर्दशा दिवाली महज़ त्यौहार नहींसंस्कृति मिलन का रुप हैजीवन को अचूक…

  • छठ गीत | Chhath Geet

    ए छठी मइया बरबस अरगिया हमार ए छठी मइयासांझे लीं अरगिया हमारबरबस अरगिया हमार ए दीनानाथसांझे लीं अरगिया हमार।जलवा में अरग देत करींला बिनितियालिख दिहब हमरो कलम किस्मतियाहियवा के मिटे जुवार ए छठी मइया,सांझे लीं अरगिया हमार ,,,।भोरवो दीदार देब बोली जब चिरईंयाजेकर ना होला केहू होली छठी मइयाआदितदेव होलन रखवार ए छठी मइया,भोरे लीं…

  • अनुराग से उजियार

    अनुराग से उजियार जगमग धरती उजियार , स्नेह दीप है आज lहर कण में दीप सजे , हुवा अंधकार बौना l धन की वर्षा विश्व में , करती चंचल लक्ष्मी lसमय और विवेक की , शिक्षा से झोली भरी l माँ से मेवे – मिटाई , पिता से पटाकी lनभ को चंद्रमा तो , घर…

  • दीवाली का राम राम

    दीवाली का राम राम दीवाली के पावन पर्व पर मेरा सबको राम राम,टूटे रिश्ते भी जोड़ देती है अदृश्य इसका काम।नही लगता ख़र्चा इसमे कुछ भी न लगता दाम,दूरियां पल-भर में मिटाती बस करलो प्रणाम।। गले-मिलों वफादार-बनों समाज में बढ़ेगी शान,अमावसी अंधेरा दूर करलो खोलों ऑंख कान।हॅंसता खेलता घर लगता है तभी मन्दिर समान,खील बताशे…

  • मधुर-मधुर मेरे दीपक जल

    मधुर-मधुर मेरे दीपक जल नभ,जल और धरित्री का, अंधियारा छट जाएसदैव ऐसे मधुर-मधुर मेरे दीपक जल । पुनि स्नेहिल गंगा पर्वत शिलाओं से निकल जाए,सदैव ऐसे मधुर-मधुर मेरे दीपक जल । कभी भटकाव ना किसी की जिन्दगी में आए,सदैव ऐसे मधुर-मधुर मेरे दीपक जल । सत्य-न्याय की हवा, जल,थल,नभ में फैल जाए,सदैव ऐसे मधुर-मधुर मेरे…

  • मुझे दिवाली मनानी है

    मुझे दिवाली मनानी है आओ ना दिकु, ये दिवाली मुझे तेरे संग सजानी है,तेरी हंसी की रोशनी से हर रात को जगमगानी है। दीप जलें हैं चौखट पर, तेरे स्वागत की आस में,अब बस तेरी महक को साँसों में समेट लानी है। सजाई है रंगोली, जिसमें तेरी छवि उभर आई है,तेरी यादों की खुशबू से…