भैय्या दूज

यम द्वितीय ( भैय्या दूज )

यम द्वितीय

यम द्वितीया कार्तिक मास के द्वितीया को मानते हैं,
यह त्यौहार भाई-बहन के प्रेम-सौंदर्य को दर्शाते हैं।
बहन अपना स्नेह भाई के प्रति अभिव्यक्ति करती हैं,
ये त्योहार यम द्वितीय और भ्रातदूज कहाते हैं।।

बहने अपने भाई के खुशहाली की कामना करती हैं,
बहने सुबह-सुबह घर में भैयादूज का पूजन करती हैं।
भाई की आयु वृद्धि व सर्व सुख की कामना करती,
बहन प्रणकरके अपने भाई के सारे संकट हरती हैं।।

यमुना किनारे भोजन करने से नरक से छुटकारा मिलता है,
पाप मुक्त हो मानव को जग बंधन से छुटकारा मिलता है।
सारी खुशियां व धन-धान्य को प्राप्त करता है वह मानव,
जो भाई इस दिन बहन के हाथों खुशी से भोजन करता है।।

चावल के घोल से घर में शंक्वाकार आकृति बनाते हैं,
यह आकृति पंच परमेश्वर,पंचदेव के हमें दर्शन कराते हैं।
स्वच्छ जल सिंदूर पान के पत्ते, सुपारी,इलायची, दही,
कुम्हड़े के फूल से यमुना जी को अपने घर बुलाते हैं।।

बहन के घर जाकर मनुष्य को मुख्य भोजन करना चाहिए,
बहन के द्वारा बनाए गए भोजन को ग्रहण करना चाहिए।
बहन को वस्त्र आदि आभूषण धन आदि दान करके,
बहन के चरण को छूकर शुभाशीष प्राप्त करना चाहिए।।

प्रभात सनातनी “राज” गोंडवी
गोंडा,उत्तर प्रदेश

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