Parchai chhand

परछाई | जलहरण घनाक्षरी | Parchai chhand

परछाई

( Parchai )

 

चल पड़ती साथ में
साया बन परछाई
अपनी छवि जग में
पहचान बनाइए

 

हरदम देती साथ
हर राह डगर पे
अपनी परछाई को
उज्जवल बनाइए

 

मां की परछाई बेटी
खुशियों का है खजाना
हर खुशी उन्नति में
साथ सदा निभाइये

 

रोशन जीवन सारा
परछाई दे सहारा
समय की पहचान
श्रीमान जान जाइए

   ?

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

भूख और पेट | Poem on bhookh aur pet

Similar Posts

  • धनतेरस | Dhanteras par kavita

    धनतेरस ( Dhanteras ) धन की देवी लक्ष्मी, सुख समृद्धि भंडार। यश कीर्ति वैभव दे, महालक्ष्मी ध्याइये। नागर पान ले करें, धूप दीप से पूजन। दीप जला आरती हो, रमा गुण गाइए। रिद्धि सिद्धि शुभ लाभ, सब सद्गुण की दाता। खुशियां बरसे घर, दीपक जलाइए। रोली मोली अक्षत ले, पूजन थाल सजाएं। मन वचन कर्म…

  • तुलसी | Tulsi par kavita

    तुलसी ( Tulsi )   हरी पूजन तुलसी बिना रहता सदा अधूरा हैl विष्णु आशीष से पूजित घर-घर तुलसी चौरा है l वृंदा के पतिव्रत के आगे नारायण भी हारे है l शालिग्राम से ब्याह रचाया तुलसी मान बढ़ाया हैl भोग बिना तुलसी के हरि को कब भाया हैंl नारी की सतीत्व ने हरि को…

  • कर गया बात वो अजनबी की तरह | Kar gaya baat woh ajnabi ki tarah | Ghazal

    कर गया बात वो अजनबी की तरह ( Kar gaya baat woh ajnabi ki tarah )   कर गया बात वो अजनबी की तरह बन गया और वो अब सभी की तरह   और वो कर रहा है दग़ा प्यार में अपना माना उसे जिंदगी की तरह   दोस्ती में दरार फ़िर न आती मगर…

  • लगाव | Lagaav

    लगाव ( Lagaav )   यदि आप अपनी श्रेष्ठता को सिद्ध करते हुए किसी पर अपना अधिकार जमाना चाहते हैं या रुआब में उसे दबाना चाहते हैं तो निश्चय ही वह झुक जाएगा कर देगा स्वीकार्य आपको किंतु आपको अपनापन नहीं दे पाएगा लगाव की डोर से बंध नहीं पाएगा सम्मान खरीद कर मांग कर…

  • राम नवमी विशेष | Kavita

    राम नवमी विशेष ( Ram navami vishesh )   अवधपुर में राम का आज अभिनंदन        जनम लियो रघुकुल में दशरथ के नंदन …..   कौशल्या ने जाया जब यज्ञ खीर खाया पुत्र रूप राम को तब ममता ने पाया दूर करने आए दशरथ का क्रंदन !! अवधपुर में राम जी का ……

  • हद कर दी आपने | Geet had kar di aapne

    हद कर दी आपने ( Had kar di aapne )   वादे प्रलोभन भारी, नित्य नियम बदले सरकारी। नेताओं की लीला न्यारी, चमचे आला अधिकारी। हद कर दी आपने, हद कर दी आपने।   सड़क पुल नदियां निगले, निगल रहे हैं वोट। फन फैलाए विषधर बैठे, करते विषैली चोट। सत्ता के गलियारों में, मिल जाएंगे…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *