Parchai chhand

परछाई | जलहरण घनाक्षरी | Parchai chhand

परछाई

( Parchai )

 

चल पड़ती साथ में
साया बन परछाई
अपनी छवि जग में
पहचान बनाइए

 

हरदम देती साथ
हर राह डगर पे
अपनी परछाई को
उज्जवल बनाइए

 

मां की परछाई बेटी
खुशियों का है खजाना
हर खुशी उन्नति में
साथ सदा निभाइये

 

रोशन जीवन सारा
परछाई दे सहारा
समय की पहचान
श्रीमान जान जाइए

   ?

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

भूख और पेट | Poem on bhookh aur pet

Similar Posts

  • संस्कृति नेह का | Sanskrti Neh ka

    संस्कृति नेह का ( Sanskrti neh ka )   हिंद संस्कृति नेह का,मृदुल मधुर अहसास निज संस्कृति अनन्या धरोहर, नैतिक कर्तव्य वंदन संभाल । अंतर अथाह प्रेम भाईचारा, आभा अनूप नागरिक भाल । गंगा सदृश पुनीत पावन, दर्शन धर्म कर्म उल्लास । हिंद संस्कृति नेह का,मृदुल मधुर अहसास ।। शीर्षस्थ स्वर्णिम इतिहास , भव्य गौरव…

  • लेडी डॉक्टर | Lady Doctor

    लेडी डॉक्टर ( Lady doctor )   रोज इन्ही आंखों से देखती है प्रसव पीड़ा को। नारी होकर भी नारी को दर्द से कराहते हुए वो। इन्ही हाथों से अनगिनत शिशुओं को जन्माया। मातृत्व सुख को महसूस करती डाक्टर दिल से। जच्चा बच्चा घर में गूंजती जब किलकारी। प्रसन्नता की रेखाएं मस्तक पर आती सारी।…

  • आंचल छांव भरा | Aanchal Chhanv Bhara

    आंचल छांव भरा ( Aanchal Chhanv Bhara ) हो गर साथ उसका तो तू क्या मिटा पायेगा।ख़ाक हो जाएगा तिरा अहम् तू निकल ना पायेगा। दर्द , ज़ख्म हैं पोटली में उठा और जिये जा।रिसते ज़ख्मों को भला कहां तू दिखा पायेगा। आंचल छांव भरा चला गया साथ मां के।ममता का साया तू अब कहां…

  • जयमाला की रस्म | Jayamala ki rasm kavita

    जयमाला की रस्म ( Jayamala ki rasm kavita )   सुबह से ही सजने लगा जयमाल का मंच, यह विवाह की रस्म है या धन का प्रपंच। शाम तक सज धज के मंच तैयार हुआ, निर्जीव फूलों से सजीवता का कार्य हुआ।   अब लगने लगा है स्वर्ग का यह सिंहासन, इससे सुंदर नहीं बैठने…

  • पर्व पर गर्व | Kavita Parv par Garv

    पर्व पर गर्व  ( Parv par Garv )   भले जली होलिका आज भी जल रही है जिंदा है आज भी हिरण कश्यप रावण आज भी जिंदा है बच गया हो प्रहलाद भले बच गई हों सीता भले अहिल्या को मिल गई हो मुक्ति तब भी आज भी स्थिति वही है खुशियां मनाएं किस बात…

  • आई लव यू | I Love You

    आई लव यू ( I love you )   आई लव यू के मर्म में, अपनत्व अमिय धार प्रेम जप तप लगन , तन मन मुदित भाव । निहार अक्स आकर्षण, जीवन सौम्य शीतल छांव । शब्द अर्थ अभिव्यंजना , हृदय श्रोत मधुरता अपार । आई लव यू के मर्म में,अपनत्व अमिय धार ।। अंतराल…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *