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मतदान | Matdan par kavita
ByAdminमतदान ( Matdan ) ( 3 ) पलट दो सत्ता को पलट दो आवाम पर्व है लोकतंत्र का चलो चले करें मतदान लालच बुरी बला है संकट इससे कहां टला है स्वयं में स्वतंत्र बनो नहीं तुम परतंत्र बनो वोट हमारी पूंजी है समर्थ देश की कुंजी है जात धर्म मजहब से ऊपर देश हमारा…

कई उलझने हैं सुलझाने को | Poem Kai Uljhane hai Suljhane ko
ByAdminकई उलझने हैं सुलझाने को ( Kai uljhane hai suljhane ko ) नये रास्ते हैं आगे बढ़ जानेको सुंदर नजारे दिल मे समानेको नजर उठती है ठहर जाने को बेखौफ नदी जैसे बहजाने को रंजो गम को दबा जाने को महफूज जगह रुक जाने को बेपनाह मोहब्बत पा जाने को नैनों में ख्वाब सजा…

गणगौर का पर्व | Gangaur par Kavita
ByAdminगणगौर का पर्व ( Gangaur ka parv) यह दो शब्दों से जुड़कर बना ऐसा पावन-पर्व, विवाहित कुॅंवारी लड़कियाॅं करती इसपर गर्व। गण से बने भोलेशंकर गौर से बनी माॅं पार्वती, प्रेम व पारिवारिक सौहाद्र का ये गणगौर पर्व।। १६ दिनों तक प्रेम पूर्वक पर्व ये मनाया जाता, पौराणिक काल से है इससे उम्मीद व…

झूले पड़ गए सावन के | Jhule pad gaye sawan ke
ByAdminझूले पड़ गए सावन के ( Jhule pad gaye sawan ke ) आजा साजन आजा साजन झूले पड़ गये सावन के उमड़ घुमड़ बदरिया छाई बूंदे बरसे मोती बनके इठलाती बलखाती सी नदियां लहर लहर लहराये सुरभीत बाग बगीचे महके तन मन सारा हरसाये हरियाली से भरी वादियां फूल खिले मनभावन से…

सत्यमेव जयते | Satyameva Jayate | kavita
ByAdminसत्यमेव जयते ( Satyameva Jayate ) ***** डाॅ० कफिल की रिहाई, मीडिया में है छाई। यह बात फिर उभरकर आई, सत्य परेशान हो सकता है- पराजित नहीं भाई । यह कोई नहीं बात नहीं सैकड़ों ऐसे किस्से है सदियों सुने , सुनाए जा रहे हैं। फिर भी वही गलती सब दोहराए जा रहे हैं। ताज़ा…

आनंदा आसवले की कविताएं | Ananad Asawle Poetry
ByAdminबढ़ना सीखो लिखते लिखते चलना सीखो,चलते चलते बढ़ना सीखो।रुकना मत तूम राहों में अब,हर मुश्किल से लड़ना सीखो।।धृ।। काग़ज़ पे उतरे ख्वाब जो तेरे,उन्हें हकीकत बनाना सीखो।हर गिरने को सीढ़ी समझकर,मंज़िल तक जाना सीखो।।१।। लिखते लिखते चलना सीखो,चलते चलते बढ़ना सीखो….. थोड़ा दर्द, थोड़ा सुख होगा,हर रंग में जीना सीखो।आंधी आए या हो तूफ़ाँ,जैसे दीपक,…

