Poem in Hindi on Kshama

क्षमा | Poem in Hindi on Kshama

क्षमा

( Kshama ) 

रूपहरण घनाक्षरी

 

दया क्षमा हो संस्कार, सदाचार और प्यार।
परोपकार गुण को, घट नर ले उतार।

व्यक्तित्व को चार चांद, यश कीर्ति हो अपार।
क्षमा बड़ों का गहना, भव सागर दे तार।

बड़े वही जगत में, छोटों को करते माफ।
तारीफ में ताकत है, परचम ले विस्तार।

क्षमा वीरों को सुहाती, क्षमा सरलता लाती।
क्षमा से ही महकते, गुलिस्तां हो गुलजार।

 

कवि : रमाकांत सोनी
नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

प्यारे राम | Poem on Shree Ram

Similar Posts

  • दान और दक्षिणा | Chhand daan aur dakshina

    दान और दक्षिणा ( Daan aur dakshina )   मनहरण घनाक्षरी     दान दीजिए पात्र को, दक्षिणा विप्र जो होय। रक्तदान महादान, जीवन बचाइए।   पात्र सुपात्र को देख, दान जरूर कीजिए। अन्नदान सर्वोत्तम, भोजन खिलाइए।   अनुष्ठान करे कोई, जप तप पूजा-पाठ। ब्राह्मण भोजन करा, दक्षिणा दिलाइए।   तुलादान छायादान, कर सको कन्यादान।…

  • साथी | छंद

    साथी ( Sathi ) मनहरण घनाक्षरी   वृंदावन सा हृदय, गोकुल सा मन मेरा। बजे बंशी मोहन की, झूम झूम गाइये। आंधी तूफां मुश्किलों का, सुख सागर हो जाना। मन भाती प्रीत साथी, मनमीत आइए। महका मधुमास सा, प्यार के मोती लुटाता। तेरा मेरा प्रेम सच्चा, रस बरसाइये। सद्भाव प्रेम आनंद से, तय सफर हो…

  • नैनो में सावन | कुण्ड़लिया छन्द

    नैनो में सावन ( Naino mein sawan ) नैनो में सावन लिए , करती हूँ मनुहार । ऐसे मत छेड़ो पिया , लगती जिया कटार ।। लगती जिया कटार , बूँद सावन की सारी । आ जाओ इस बार , विरह की मैं हूँ मारी ।। भीगूँ तेरे संग , यही कहता मनभावन । नही…

  • परीक्षा | Pareeksha par Chhand

    परीक्षा ( Pareeksha )   पग पग पे परीक्षा, लेता जग करतार। जीवन की डगर पे, चलिए जरा संभल। हर आंधी तूफां से, हर मुश्किल बाधा से। हौसलों की उड़ान से, छूएं आसमा नवल। घड़ी-घड़ी धैर्य धर, हर छानबीन कर। रिश्तो को परख कर, साख रखिए धवल। जिंदगी की जंग लड़े, उन्नति पथ पे बढ़े।…

  • कर्म ही पूजा है | Chhand karm hi pooja hai

    कर्म ही पूजा है ( Karm hi pooja hai ) मनहरण घनाक्षरी   कर्म श्रद्धा कर्म भक्ति कर्म धर्म पुनीत है कर्म ही पूजा हरि की कर्म नित्य कीजिए   कर्म योग कर्म ज्ञान कर्म पथ पावन है कर्म कर जीवन की नौका पार कीजिए   कर्म सेवा हरि आस्था कर्मशील पुरुषार्थी कर्म से मंजिलें…

  • Chhand Shailputri | शैलपुत्री

    शैलपुत्री   मनहरण घनाक्षरी   शैलपुत्री वृषारूढ़ा, गिरिराज प्रिय सुता। त्रिशूलधारी भवानी, दुख हर लीजिए।   मंगलकारणी माता, दुखहर्ता सुखदाता। कमल नयनी देवी, वरदान दीजिए।   पार्वती मां हेमवती, शिव गौरी जगदंबे। यश कीर्ति वैभव दो, माता कृपा कीजिए।   सजा दरबार तेरा, अखंड ज्योति जलती। शक्ति स्वरूपा अंबे, शरण में लीजिए।   रचनाकार : रमाकांत…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *