Poem Socha koi Geet Likhungi

सोचा कोई गीत लिखूंगी | Poem Socha koi Geet Likhungi

सोचा कोई गीत लिखूंगी

( Socha koi geet likhungi ) 

 

सोचा कोई गीत लिखूंगी
फिर से आज अतीत लिखूंगी।
निश्चल भाव समर्पित मन हो
ऐसी कोई प्रीत लिखूंगी

स्वर्णिम भोर सुहानी रातें
वह मधुसिक्त रसीली बातें
दंभ और अभिमान नहीं था
होती खुशियों की बरसातें
ऋतुओं सा परिवर्तित कैसे
हुआ वही मनमीत लिखूंगी।
सोचा कोई गीत लिखूंगी

व्याकुल हृदय अधीर हुआ है
अंत: उर में पीर सजाए
बीत रहा मधुमास भी अब तो
नयन तके टकटकी लगाए।
लौटेंगे प्रियतम जब मेरे
उस दिन अपनी जीत लिखूंगी।
सोचा कोई गीत लिखूंगी…

सजे हुए सुरताल सभी थे
गाते राग बिहाग कभी थे
धवल चंद्रिका मधुर यामिनी
दृश्य मनोहर यहीं अभी थे
वह रुठा तो हुए बेसुरे
जीवन के संगीत लिखूंगी।
सोचा कोई गीत लिखूंगी।

सीमा पाण्डेय ‘नयन’
देवरिया  ( उत्तर प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

वो नहीं ज़िद ठानता | Zid Shayari

Similar Posts

  • भगवत दर्शन तुम्हें कराएँ

    भगवत दर्शन तुम्हें कराएँ भेद भाव के पथ को त्यागेंचलो चलें हम कुंभ नहाएँ ।संत जनों का पुण्य समागम,भगवत दर्शन तुम्हें कराएँ ।। गंगा यमुना सरस्वती सेसारे जग की प्रीति पुरानी ।रात लगे रानी दिन राजाशुभ संगम की अमर कहानी।। सत्य सनातन भारत की जयसंस्कृति अपनी तुम्हें दिखाएँ ।चलो चले हम कुंभ नहाएँ ।। साधु…

  • गणपति की जय जयकार | Ganpati ki Jai Jaikar

    गणपति की जय जयकार ( Ganpati ki jai jaikar )    एक दो तीन चार, गणपति की जय जयकार। करते सबका बेड़ा पार, विघ्न हरे भरे भंडार। गणपति की जय जयकार गौरीनंदन शंकर प्यारे, प्रथम पूज्य गजानंद प्यारे। रिद्धि सिद्धि संग घर आओ, गजानंदजी देव हमारे। एकदंत विनायक दरबार, छत्र फिरे गल सुमन हार। सुख…

  • अलख निरंजन | Alakh Niranjan

    अलख निरंजन ( Alakh Niranjan )   भज अलख निरंजन प्यारे, अलख निरंजन गाता जा। ये दुनिया सब मोह माया है, जग में प्यार लुटाता जा। अलख निरंजन गाता जा खाली मुट्ठी आया जग में, मानव हाथ पसारे जायेगा। क्या खोया क्या पाया नर, किसका हिसाब लगाएगा। यह दुनिया एक रंग मंच है, बस किरदार…

  • सावन में | Geet Sawan Mein

    सावन में ( Sawan Mein ) मधुर मिलन का ये महीना। कहते जिसे सावन का महीना। प्रीत प्यार का ये महीना, कहते जिसे सावन का महीना। नई नबेली दुल्हन को भी, प्रीत बढ़ाता ये महीना।। ख्वाबों में डूबी रहती है, दिन-रात सताती याद उन्हें। रिमझिम वारिश जब भी होती, दिलमें उठती अनेक तरंगे। पिया मिलन…

  • थोड़ा सा | Geet Thoda Sa

    थोड़ा सा ( Thoda Sa ) थोड़ा सा अखबार पढ़ा फिर , बैठ गया तह करके . जो भी मुँह में आया मुखिया , चला गया कह करके . बाएँ – दाएँ देखा उसने , हँसी खोखली हँसकर . निकल गई ज्यों कील जिगर से, कुछ अंदर तक धँसकर . मुख पर थोड़ा दर्द न…

  • माया का बंधन | Maya ka Bandhan

    माया का बंधन माया का बंधन हमको छलताप्रेम फिर भी मन में पलतायह राज न जाने कोई ।मां का बंधन सबको प्यारासारा जग यह जानता ।प्रेम माँ का होता निश्छलसारा जग यह मानता ।भूखे रहकर खाना देतीसहती रहती कुछ न कहतीयह राज न जाने कोई ।कई रूप होते बंधनो केबुझना होता कठिन ।जन्म देना सरल…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *