Poem on bahon mein

बांहों में | Poem on bahon mein

बांहों में

( Bahon mein )

 

धरा गगन से कह रही लो आ गया मधुमास
प्रियतम ले लो बाहों में मदमाता बसंत खास

 

लिपट लता सी प्रीत भरे कुदरत करती श्रंगार
आलिंगन आतुर सरिताये चली सिंधु के द्वार

 

दीपक बाती का मिलन जग रोशन हो सारा
प्रेम की रसधार बहती ऐसा हो प्यार हमारा

 

मन की कलियां खिल उठे हो उमंगों की भरमार
बरसते मोती प्रेम भरे उमड़े प्रियतम का प्यार

 

दिल के सारे तार जुड़े छेड़ो प्रिय नेह भरा संगीत
आओ आकर मिलो प्रिय लो बाहों में भर प्रीत

 

मंद मंद मुस्काता यौवन आलिंगन हो बाहों में
मादकता के रंग बिखेरे प्रीत भरी इन राहों में

 

स्पर्श प्रिय का मन को भाता दिल तराने गाता है
झील से मादक नयनों में प्रेम सिंधु बल खाता है

 

दमकता सौंदर्य प्रियतम सारा जहां लगता प्यारा
खिल जाता मन का कोना महकाता प्यार हमारा

 

   ?

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

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