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आधुनिकता | Aadhunikta
ByAdminआधुनिकता ( Aadhunikta ) चाँद की हो गई, दुनिया दीवानी । तारों में बसने लगे, शहरे हमारी ।। ख्वाहिश पूरी हुई , इंसानो की । दुनिया छोड़ दी,घर बनाने के लिए ।। जल हो गई, प्रदूषित भारी । ज़हर बन गई, प्राणवायु ।। जिए तो जिए कैसे इंसान । नरक बन गई, धरती…

मोबाईल की महिमा | Kavita Mobile ki Mahima
ByAdminमोबाईल की महिमा ( Mobile ki Mahima ) कितना प्यारा है कितना न्यारा है सबके आंखों का तारा है तू! क्या बच्चे क्या व्यस्क क्या बालायें क्या बूढे उंगलियां उनके नीचे सदा दिन-रात घनघनाती बच्चे गेम्स में व्यस्क चैट कर वूढें यूट्यूब पर झूमते-गाते रहते! वनिता ओं के कहने शरमों-हया को धता बता कर…

शुक्र है | Shukar hai
ByAdminशुक्र है ( Shukar hai ) बेशक,लगी है आग कस्बे और मुहल्ले मे लेकिन,खुदा का शुक्र है आग हमारे घर से अभी दूर है…. बांध रखे हैं संविधान के बांध हमने खड़े कर दिए हैं सैनिकों के जंगल सुरक्षा कर्मियों की नहरें हैं आग तो बुझ जायेगी उनसे ही खुदा का शुक्र है आग…

रखवारे राम दुलारे | Bhajan Rakhware Ram Dulare
ByAdminरखवारे राम दुलारे ( Rakhware Ram Dulare ) रखवारे रखवारे, हे हनुमत राम दुलारे। अंजनी के लाला आजा, आजा हनुमान प्यारे। रखवारे रखवारे -2 गिरि द्रोण संजीवनी लाए, लक्ष्मण प्राण बचाए। सिंधु पार सीता माता को, ले मुद्रिका दे आए। आग लगा पूंछ को सीधे, जला दिए घर द्वारे। दहक उठी लंका…

धर्म कर्म में हो बदलाव
ByAdminधर्म कर्म में हो बदलाव धर्म , संस्कृति की सरल धारा में ,कर्म की क्षमता को भूल गए हैं । कुरीतियां , जहरीली हवा बहाकर ,कैसे सबको मानव धर्म में वापस लाएं । आंखों को बंद कर मन की ग्रंथि चोक हुई,आलोचक भी हथियार डाल चुके हैं । शुद्ध विचारों की गंभीरता पर हास्य आया…

हृदय मेरा पढ़ पाए | kavita
ByAdminहृदय मेरा पढ़ पाए ( Hriday mera padh paye ) अन्तर्मन में द्वंद बहुत है, जाकर किसे दिखाए। ढूंढ रहा हूँ ऐसा मन जो, हृदय मेरा पढ़ पाए। मन की व्याकुलता को समझे,और मुझे समझाए। राह दिखे ना प्रतिद्वंदों से, तब मुझे राह दिखाए। बोझिल मन पर मन रख करके,हल्के से मुस्काए।…

