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बिखरा बिखरा | Suneet Sood Grover Poetry
ByAdminबिखरा बिखरा ( Bikhara bikhara ) बिखरा बिखरा कतरा कतरा इधर उधर से जो मैं सहेजती हूँ संजोती हूँ हवा का इक झोंका फिर उसे बिखरने को कर देता है मजबूर दो हाथों में कभी आगोश में तो कभी दामन के पल्लू में फिर उसे बचाती हूँ समेटती हूँ बाँध कर…

सुबह | Kavita Subah
ByAdminसुबह ( Subah ) अंधकार से उत्पन्न हुई एक किरण आकाश की गहराई से आई है। शिद्दत से प्रयास जारी रखकर, आशा की रोशनी संग मुसकाई है ।। ओस के सुखद स्पर्श से लबरेज पंछियों के कलरव सी मन को भाई है ।। सुबह की मंद मंद चल रही हवा पी के देस की महक…

डॉ. सत्यवान सौरभ की कविताएं | Dr. Satyawan Saurabh Hindi Poetry
ByAdmin“ये कांवड़ उठाने से कुछ नहीं होगा” कांवड़ उठाए घूम रहा है,कंधों पे धर्म लादे जा रहा है,गांव का होनहार मर गया,माँ बेटे की राख छू रही है……और सरकार चुप है। शिक्षक था बाप, फिर भी मौन रहा,सिखा न सका—कि आस्था नहीं, पढ़ाई बचाती है!पर वो चुप रहा…क्योंकि आस-पास मंदिर थेऔर इलेक्शन नज़दीक था। बच्चा…

तेरा शेष बचे | Tera Shesh Bache
ByAdminतेरा शेष बचे ( Tera Shesh Bache ) मेरा सभी नष्ट हो जाये, तेरा शेष बचे। महाशून्य के महानिलय में, तेरी धूम मचे। तब कोई व्यवधान न होगा। मान और अपमान न होगा। सुख-दुख, आशा और निराशा का कोई स्थान न होगा। मन की सभी कामनाओं में, तू ही मात्र रचे। मेरा सभी नष्ट…

हे शिव तनया ! मातु नर्मदे
ByAdminहे शिव तनया ! मातु नर्मदे ( नर्मदा जयंती – गीतिका ) हे शिव तनया ! मातु नर्मदे ! नमन तुम्हें हर बार । हमें प्यार से दुलराने तुम, खुद चल आईं द्वार !! सदा सदा आशीष दिया है, तुमने सब पुत्रों को सुख समृद्धि और सौभाग्यों के देकर उपहार !! दे अपने वरदान…

दिव्य भूमि | Kavita divya bhumi
ByAdmin1.दिव्य भूमि दिव्य भूमि साकेत जहाँ पर, राम ने जन्म लिया था। कलयुग में वो भाग्य पे अपने, जार जार रोया था। सृष्टि के साथ ही उदित हुआ,उस नगर का नाम था काशी। नराधमों ने काशी की महिमा को बना दिया दासी। नाम बदल दी धर्म बदल दी, इतिहास मिटा दी सारी।…

