Private Naukari

प्राइवेट नौकरी | Private Naukari

प्राइवेट नौकरी

( Private naukari ) 

 

यूं लगता है बंद पिंजरा उस पंछी को तड़पाता है।
यूं लगता है उमड़ा सावन फिर से लौट जाता है।

यूं लगता है लटक रही हो ज्यों चांदी की तलवार‌।
संभल संभल कर चलते जाने कब हो जाए वार।

यूं लगता है स्वाभिमान का कत्ल नहीं हो जाए।
कड़ा परिश्रम करें फिर भी आंखें लाल दिखाए।

यूं लगता है सेवाभाव से शायद सुख मिल जाते।
निजी नौकरी निजी मामला वो कैसे टांग अड़ाते।

यूं लगता किरदार हमारा धूमिल नहीं हो जाए।
रंगमंच का पर्दा जाने कब आकर गिर जाए।

स्थाई सरकार नहीं है बदलावों भरी बयार चली।
एक नौकरी छूट गई तो समझ दूसरी तूझे मिली।

 

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

उफ्फ ये गर्मी | Uff ye Garmi

Similar Posts

  • आजादी का अमृत उत्सव | Poem azadi ka amrit utsav

    आजादी का अमृत उत्सव (  Azadi ka amrit utsav )   आजादी का अमृत उत्सव, घर में चलो मनायेंगे। पापा ला दो एक तिरंगा, गीत वतन के गायेंगे।। वीर शहीदों की कुर्बानी, फिर से याद करेंगे हम भारत माँ की जय जयकार, मिलकर आज कहेंगे हम रंगोली तोरन हारों से, आँगन खूब सजायेंगे। पापा ला…

  • हम अपने भाग्य के निर्माता स्वयं है | Kavita Apne Bhagya ke

    हम अपने भाग्य के निर्माता स्वयं है ( Hum apne bhagya ke nirmata swayam hai )   हर एक इंसान मे होता है कोई न कोई हुनर, अलग-अलग काम करता ये है उसका कर्म। अपने आप को कोई समय से ही जगा लेता, लेकिन कई नींद में अपनी उम्र निकाल देता।। किसी का छिप जाता…

  • चीर हरण | Cheer Haran Par Kavita

    चीर हरण ( ककहरा ) ( Cheer haran )   कुरुवंश सुवंश में आगि लगी कुरुपति द्युत खेल खेलावत भारी।     खेलने बैठे हैं पांच पती दुर्योधन चाल चलइ ललकारी।     गुरुता गुरु द्रोण की छीन भई संग बैठे पितामह अतिबलकारी।     घर जारत है फुफकारत है शकुनी जस मातुल कुटिल जुवारी…

  • धुंआ | Dhuaan

    धुंआ ( Dhuaan )   धुंये के कितने रंग…|| 1.उठता है ऊपर आसमान, छूने का जनून होता है | उसे देखकर लोगों मे, हलचल सा शुरूर होता है | भीड जमा होती है, जाने कितने सबाल होते हैं | धुंआ कहाँ से उठा है, पता कर के निहाल होते हैं | धुंये के कितने रंग…||…

  • दुस्साहस | Kavita dussahas

    दुस्साहस ! ( Dussahas ) *** भय से भी भयभीत नहीं हो रहे हैं हम, लाख चेतावनियों के बाद भी- कान में तेल डाल, सो रहे हैं हम। दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा आंकड़ा- दानव रूपी कोरोना का, हम ताली थाली पीट रहे- सहारा ले रहे जादू टोना का ! सरकार जुटी है सरकार बनाने…

  • आसमान | Aasman kavita

     “आसमान” ( Aasman : Hindi poem )   –> आसमान सा बनकर देखो || 1.आसमान कितना प्यारा, फैला चारो ओर है | रंग-बिरंगी छटा बटोरे, मेघों का पुरजोर है | दिन में सूरज किरण लिए, रात में चाँद-सितारे | दिन मे धूप की गर्मी रहती, रात को मोहक नजारे | –> आसमान सा बनकर देखो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *