पुराने प्रेम से

पुराने प्रेम से दुबारा प्यार नहीं हो सकता

पुराने प्रेम से दुबारा प्यार नहीं हो सकता

बुरी तरह वही तोड़ते हैं ,
जो अच्छी तरह जानते है !
लाख करो खिदमत ,
दिल से बेवफा ही मानते हैं !
बेवफा से प्यार, वफादार से तकरार ,
समय का मार , गिरेबान पर वार
फलता नहीं …….!

कभी किसी ने कहा था मुझे ,
तेरा हँसता हुआ चेहरा अच्छा लगता है !
नशीली आँखों से आँसू न बहाया करो ,
दुनिया में एक तू ही सच्चा लगता है !

प्रेमिका के रुप में असीमित प्यार चाहा उसने ,
शहनाई के बाद भी इकरार चाहा उसने !
मिली थी एक रोज कुछ समय के लिए ,
समय कम था, पर काफी था अनुभव के लिए !
पुराने प्रेम से दुबारा प्यार नहीं हो सकता… ,
पीछे छूट चुका यार, कभी तुम्हारा नहीं हो सकता !
वो ढूँढ़ेगा पहली-सी बात ,
और
शादी के बाद किसी में कुंवारापन नहीं हो सकता !

काश कि हम मिले ही नहीं होते ,
जज्बातों से जज्बात गिले नहीं होते !
पश्चाताप नहीं करता घायल दिल ,
दिल की हसरत, फिर से ना मिल !
अंदर तक फिर से तोड़ दिया ,
अधभरा घाव फिर से कुरेद दिया !
न लौटना अब कभी उसकी गली में
बेदर्दी ने सारे रास्ते पर छल्ला उकेर दिया !!

प्रतिभा पाण्डेय “प्रति”
चेन्नई

यह भी पढ़ें :-

सबके संग रम जाते कृष्ण

Similar Posts

  • श्याम सलोने | Kavita

    श्याम सलोने ( Shyam Salone )   राधा को मिल गए श्याम राधा प्यारी गाती फिरे राधा जाने लगी संग गईया चली श्याम माखन में डुबकी लगाने लगे संग राधा के झूम झूम गाने लगे राधा बैठन लगी संग पायल बजी श्याम पांव में मेहंदी लगाने लगे संग राधा की झूम-झूम गाने लगे राधा खेलन…

  • अम्मा याद आईं | Kavita Amma Yaad Aayi

    अम्मा याद आईं ( Amma yaad Aayi )   अबकी होली में ‌ न जाने क्यों अम्मा याद आईं, मेरे पास कोई ऐसा भी नंबर होता, जो उससे भी बात हो पाती , उस देश का पता होता, जहां वो चली गई है, तो जरूर उसे, एक चिट्ठी लिखता, उसे लिखता कि, तेरे बिन यह…

  • अंतरराष्ट्रीय बेटी दिवस | Beti Divas

    अंतरराष्ट्रीय बेटी दिवस ( Antarrashtriya antarrashtriya beti divas )    बेटी की आहट से खुलते,खुशियों के अनंत द्वार मनुज सौभाग्य जागृत, मंगलता गृह प्रवेश । सुख समृद्धि सरित प्रवाह, आह्लाद पूर्ण परिवेश । दर्शन कर भव्य उपमा , आशा उमंग असीम संचार । बेटी की आहट से खुलते,खुशियों के अनंत द्वार ।। सृजन दिव्य अठखेलियां,…

  • वो गांव बहुत याद आता है

    वो गांव बहुत याद आत है बीता बचपन गांव में वह गांव बहुत याद आता है l टेढ़ी ~मेढ़ी गलियां चुभ गये कांटे छाले पड़ गए पांव में वो गांव बहुत याद आता है l हम खेले खेल नदिया तीरे भरी दुपहरिया आम की बगिया l कुहके कोयलिया खाएं कच्ची अमिया लेकर नमक मिर्च की…

  • क़ुबूलनामा | Qubool Nama

    क़ुबूलनामा ( Qubool nama ) प्यार छुपाना क्यों बताती क्यों नहीं, अपने जज़्बात तुम जताती क्यों नहीं, मिलना न मिलना बात है मुकद्दर की अपना हूँ एहसास कराती क्यों नहीं। इश्क़ में आँसू नहीं हम चाहते है खुशी, बात ये अपनों को समझाती क्यों नहीं। दुश्मन है जो भी हमारी मोहब्बत के, बग़ावत में आवाज़…

  • श्याम | Shyam kavita

    श्याम ( Shayam )   रस लेकर रसखान सरीखे, काँन्हा तुम आ जाओ। जग मे घटते प्रीत मोह रस, फिर से आ बरसाओ।   सूखी धरती उमड मेघ बन,जग की प्यास बुझाओ। नटवर नागर कृष्ण कन्हैया,अब तो तुम आ जाओ।   कालीदास के मेघदूत बन, उमड घुमड कर आओ। तृप्त करो मन की चंचलता,अब तो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *