Ram Hey Ram

राम हे राम | Ram Hey Ram

राम हे राम मेरे राम

राम
हे राम
मेरे राम
तुम आओ म्हारे घर में
मेरे भाग खुल जाए
तुम आओ म्हारे दिल में
मेरा जीवन सफल हो जाए

राम
हे राम
मेरे राम
मैं डुबा हूं इस जीवन में
मुझे तो तारो राम
औरों को तारा
मुझे भी निकालो मेरे राम

राम
हे राम
मेरे राम
अखियां तरसी
तेरे दर्शन को
ओठ सुख गए
तेरी आस में
बस मिल जाए
दर्शन तेरी मेरे राम
राम
हे राम
मेरे राम

 नवीन मद्धेशिया

गोरखपुर, ( उत्तर प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

कैसे लिखू | Kaise Likhoon

Similar Posts

  • राम दूत हनुमान | Hanuman ji kavita

    राम दूत हनुमान ( Ram doot hanuman )    शंकर भोलेनाथ के आप ग्यारवें रूद्र अवतार, मंगलवार व शनिवार ये दोनों है आपके वार। जो नर-नारी श्रृद्धा से यह लेता आपका नाम, बन जातें है बिगडे़ हुऐ उसके सारे वह काम।।   माता अंजनी के पुत्र और श्रीराम प्रभु के दूत, बचपन में सूरज को…

  • लोग सोचते हैं | Poem log sochte hain

    लोग सोचते हैं ( Log sochte hain )    मगरूर हो रहा हूं बेशऊर हो रहा हूं जैसे जैसे मैं मशहूर हो रहा हूं, लोग सोचते हैं।   वक्त ने सिखा दी परख इंसान की मैं अपनों से दूर हो रहा हूं, लोग सोचते हैं।   दूर हो रहा हूं मगरूर हो रहा हूं मै…

  • सबको ही बहलाती कुर्सी | Poem in Hindi on Kursi

    सबको ही बहलाती कुर्सी   सबको ही बहलाती कुर्सी अपना रंग दिखाती कुर्सी दौड़ रहे हैं मंदिर-मस्जिद कसरत खूब कराती कुर्सी ख्वाबों में आ-आ ललचाऐ आपस में लड़वाती कुर्सी पैसे से है हासिल डिग्री कितनों को अब भाती कुर्सी ऊँचे- नीचे दम-खम भर कर मन-मन आग लगाती कुर्सी :सड़को से संसद तक वादे खूब उन्हें…

  • प्रश्न | Prashn

    प्रश्न ( Prashn )   हर आदमी गलत नहीं होता किंतु ,घटी घटनाएं और मिलते-जुलते उदाहरण ही उसे गलत साबित कर देते हैं भिन्नता ही आदमी की विशेषता है किसी की किसी से समानता नहीं न सोच की ना व्यवहार की तब भी कर लिया जाता है शामिल उसे भ्रम और वहम की कतार में…

  • भोलेनाथ है मतवाला | Kavita Bholenath

    भोलेनाथ है मतवाला ( Bholenath Hai Matwala )   औघड़ दानी शिव भोले हैं वरदानी। भस्म रमाए बैठे शिवशंकर ध्यानी। काशी के वासी बाबा है अविनाशी। बम बम भोले शिवशंकर हे कैलाशी। शिव डमरू वाले हैं बाघाम्बर धारी। सर्पों की माला शिव महिमा है भारी। जटा गंग साजे चंद्रमा मस्तक साजे। शंकर गौरी संग बैठे…

  • जाने दो | Jaane do kavita

    जाने दो ( Jaane do )   हे प्रिय प्रकाश को बन्द करो, अन्धियारे को तुम आने दो। कोई देख ना ले हम दोनो को, जरा चाँद को तुम छुप जाने दो।   तब तक नयनों से बात करो, कोई हास नही परिहास करो। मन के भावों को रोक प्रिये, घनघोर अन्धेरा छाने दो।  …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *