खुशियों की मंगल भोर | Pran Pratishtha par Kavita

खुशियों की मंगल भोर

रामलला प्राण प्रतिष्ठा,खुशियों की मंगल भोर

कलयुग आभा त्रेता सम,
प्रभु श्री राम अवतरण बेला ।
भू देवलोक उमंग हर्षोल्लास,
रज रज रग रग भाव नवेला ।
अहो भाग्य साक्षी ऐतिहासिक पल,
सर्वजन सजल नयन भाव विभोर ।
रामलला प्राण प्रतिष्ठा,खुशियों की मंगल भोर ।।

बाईस जनवरी मध्यान्ह साढ़े बारह बजे,
श्याम वर्ण मूर्ति अंतर राम प्रतिष्ठा ।
अभिजीत मुहूर्त उत्तम संयोग,
अयोध्या त्रेता दोहरान उतिष्ठा ।
अमृत सिद्धि रवि योग संग,
पांच सौ वर्षी प्रतीक्षा सुफलन ओर।
रामलला प्राण प्रतिष्ठा,खुशियों की मंगल भोर ।।

गुणवान तेजस्वी सामर्थ्य शाली,
दृढ़ प्रतिज्ञ सहयोगी प्रियदर्शनी छवि ।
धैर्यवान जितेंद्रिय सत्यवादी सहिष्णु,
धर्मज्ञ कृतज्ञ वीर कांतिवान नवि ।
सोलह गुण द्वादश कला अनुपमा,
मर्यादा पुरुषोत्तम जनमानस ठोर ।
रामलला प्राण प्रतिष्ठा,खुशियों की मंगल भोर ।।

विधिक कारण दीर्घ काल,
प्रभु निर्वासित मूल स्थान ।
तिरपाल अस्थाई शरण स्थली,
प्राकृतिक विपदा बाधा विधान ।
अंत सत्य विजय शंखनाद सर्वत्र,
सृष्टि दृष्टि परम आनंद सराबोर ।
रामलला प्राण प्रतिष्ठा, खुशियों की मंगल भोर ।।

 

महेन्द्र कुमार

नवलगढ़ (राजस्थान)

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