रश्मिरथी | Rashmirathi

रश्मिरथी

( Rashmirathi ) 

 

देख सखी दिनकर नहीं आए
आहट सुन रश्मि रथियों ने खोली द्वारा
निशाचर डींग हांक रहे थे जो
वह दुम दबाकर गये भाग

कल की रात्रि अति काली
जो अब ना दे दिखाई
सोच सखी उनके आने पर
क्या क्या देगा दिखाई

तेज स्वरूप- सिंहासन
संपूर्ण क्षितिज सुनहरी छाई
निशाचर देखो कापँ रहे हैं
उनको ना दें कुछ दिखलाई

सिमट गये एक बंद कोठरी में
पर वहाँ भी ठौर ना मिल पायी

तो उठो सखी करो स्वागत
मीठी मुस्कान से

नहीं रहेंगे वह हट गंभीर
चले जाएंगे अपने काम से
व्यर्थ निद्रा ना समय गवाओ
उठो अब कर्मठ हो जाओ

 

 नवीन मद्धेशिया

गोरखपुर, ( उत्तर प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

आओ जी लें प्यार से कुछ पल | Aao Jee le Pyar se

Similar Posts

  • होली के रंग अपनों के संग | Holi Ke Rang

    होली के रंग अपनों के संग ( Holi Ke Rang Apno ke Sang )   प्रीत पथ अप्रतिम श्रृंगारित, नयनन खोज निज संबंध । उर सिंधु अपनत्व प्रवाह, पुलकित गर्वित जीवन स्कंध । उत्सविक आह्लाद चरम बिंदु, मंगल कामना परिवेश उत्संग । होली के रंग, अपनों के संग ।। चरण वंदन आशीष वृष्टि, सम वय…

  • क्षितिज के तारे | Kavita

    क्षितिज के तारे ( Kshitij ke taare )   क्षितिज के तारे टूट रहे, अपनों के प्यारे छूट रहे। खतरों के बादल मंडराये, हमसे रब हमारे रूठ रहे।।   नियति का चलता खेल नया, कैसा  मंजर  दिखलाता है। बाजार बंद लेकिन फिर भी, कफ़न रोज बिकवाता है।।   मरघट  मौज  मना  रहा, सड़कों पर वीरानी…

  • क़ुबूलनामा | Qubool Nama

    क़ुबूलनामा ( Qubool nama ) प्यार छुपाना क्यों बताती क्यों नहीं, अपने जज़्बात तुम जताती क्यों नहीं, मिलना न मिलना बात है मुकद्दर की अपना हूँ एहसास कराती क्यों नहीं। इश्क़ में आँसू नहीं हम चाहते है खुशी, बात ये अपनों को समझाती क्यों नहीं। दुश्मन है जो भी हमारी मोहब्बत के, बग़ावत में आवाज़…

  • नया साल आया | Naya Saal Aaya

    नया साल आया ( Naya Saal Aaya )    मुहब्बत लुटाने नया साल आया सभी ग़म भुलाने नया साल आया।। ग़लत – फ़हमियां जो कभी हो गयीं थीं उन्हें अब मिटाने नया साल आया।। मुहब्बत के लम्हे जो रूठे हुए हैं उन्हें फिर मनाने नया साल आया।। नयी मंज़िलों का हमें जो पता दे वो…

  • बाल अपराध | Kavita bal apradh

    बाल अपराध ( Bal apradh )   क्या लिखूं मैं उस मासूमियत के लिए , जिसे सुन हाथों से कलम छूट जाती है। हृदय मेरा सहम जाता है। उनकी चीखें गूंज रही मेरे इन कानों में क्योंकि हर बच्चे के अश्रु ये कहते हैं यूं ही नहीं होता कोई बच्चा बाल अपराध का शिकार, कुछ…

  • बेशर्मी का रोग | Besharmi ka Rog

    बेशर्मी का रोग ( Besharmi ka rog ) कैकयी संग भरत के, बदल गए अहसास। भाई ही अब चाहता, भाई का वनवास।। सदा समय है खेलता, स्वयं समय का खेल। सौरभ सब बेकार हैं, कोशिशें और मेल।। फोन करें बस काम से, यूं ना पूछे हाल। बोलो कब तक हम रखें, सौरभ उनका ख्याल।। जिन…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *