ऋषि पंचमी | Rishi Panchami

ऋषि पंचमी

( Rishi Panchami ) 

 

आज का दिन माहेश्वरी का रक्षाबंधन कहलाता है,
ऋषि पंचमी को ही हर माहेश्वरी राखी बंधवाता है,
सजती है हमारी भी सुनी कलाई पर राखी आज
राखी बांधने कभी बहन कभी भाई बंधवाने आता है।

मायके में भी फिर से खुशी का माहौल छा जाता है,
बेटी को अंगना में देख हर कोई फूला ना समाता है,
तिलक लगा मिठाई खिला राखी बांधती है बहन
भाई भी अपनी बहन के लिए प्यारे उपहार लाता है।

बहते आँखों से अश्क जब मायके से बहना जाती है,
विदाई की इस बेला पर सबकी आँखें भर आती है,
शादी के बाद रहती वो भी जैसे मेहमां बनकर
फिर एक बार बेटी माँ बाप से बिछड़ जाती है!

 

कवि : सुमित मानधना ‘गौरव’

सूरत ( गुजरात )

यह भी पढ़ें :-

आडंबर | Adambar

Similar Posts

  • किसानों की सुन ले सरकार!

    किसानों की सुन ले सरकार! ******* आए हैं चलकर दिल्ली तेरे द्वार, यूं न कर उनका तिरस्कार; उन्हीं की बदौलत पाते हम आहार। सर्द भरी रातों में सड़कों पर पड़े हैं, तेरी अत्याचारी जल तोप से लड़ रहे हैं। सड़कों के अवरोध हटा आगे बढ़ रहे हैं, शायद कोई इतिहास नया गढ़ रहे हैं। आखिर…

  • शान्ति दूत | Shanti doot par kavita

    शान्ति दूत ( Shanti doot )   हम है ऐसे शान्ति के दूत, माॅं भारती के सच्चे सपूत। वतन के लिए मिट जाएंगे, क्योंकि यही हमारा वजूद।।   सीमा पर करते रखवाली, सेवा निष्ठा के हम पुजारी। देश भक्त निड़र व साहसी, हर परिस्थितियों के प्रहरी।।   जीना- मरना इसी के संग, बहादूर एवं सैनिक…

  • एक मां की बेबसी | Kavita

    एक मां की बेबसी ( Ek Maa Ki Bebasi ) विकल्प नहीं है कोई देखो विमला कितना रोई सुबककर दुबककर देख न ले कोई सुन न ले कोई उसकी पीड़ा अनंत है समाज बना साधु संत है जानकर समझकर भी सब शांत हैं किया कुकृत्य है शोहदों ने जिनके बाप बैठे बड़े ओहदों पे सुधि…

  • हसरत | Kavita Hasrat

    हसरत ( Hasrat ) मेरे दिल की किसी धड़कन में तेरी याद रहती है। कहीं जिंदा हैं वो लम्हे जिन्हें पल पल ये कहती है। चले आओ जरा बैठें हम उसी घाट पे चलके ! जहां की लहरों में अब भी तेरी तसवीर रहती है ।। के मुझको तो गिला कोई नहीं तेरी रुसवाई का…

  • कर्म पथ | Karm Path

    कर्म पथ ( Karm Path )   जुड़ने की कोशिशों मे टूटा हूं कई बार अपनों के साथ होने मे छूटा हूं कई बार पहुंचकर भी ऊंचाई तक गिरा हूं कई बार फिर भी अभी हारा नही हूं कमजोर जरूर हूं,बेचारा नही हूं…. मरते देखा हूं कई बार अपनों के नाते ही स्वाभिमान को कर…

  • होलिया में गरवा लगवा | Holiya me

    होलिया में गरवा लगवा छुटि जाई दुनिया -जहान, होलिया में गरवा लगावा। जाई नहीं सथवाँ ई महल-अटरिया, दाग से बचावा तू अपनी चदरिया। अपनी चदरिया हो,अपनी चदरिया, अपनी चदरिया हो,अपनी चदरिया, नाहीं करा तनिको ग़ुमान, होलिया में गरवा लगावा, नाहीं करा तनिको ग़ुमान, होलिया में गरवा लगावा, छुटि जाई दुनिया -जहान, होलिया में गरवा लगावा।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *