Samajh mein Kyon Nahi Aaya

समझ मे क्यों नही आया | Samajh mein Kyon Nahi Aaya

समझ मे क्यों नही आया

( Samajh mein kyon nahi aaya )

 

जितना भी मांगा था रब से,
उससे ही ज्यादा ही पाया।
मन पागल ना शुक्ररा निकला,
जब देखा रोता ही पाया।

प्रेमिका माँगी पत्नी दे दी,
एक नही दो दो से मिला दी।
जो मांगा वो सबकुछ दे दी,
पर मन को संतुष्टि नही दी।

मांगा था इक बेटा दे दो,
एक नही दो दो को दे दी।
पर बेटी की ख्वाहिश तोडी,
बेटी काहे मुझको ना दी।

एक दुकान था दो दो कर दी,
घर भी सुन्दर भाग्य मे लिख दी।
पर मन संतुष्ट नही है मेरा,
ईश्वर तूने क्या क्या ना दी।

मन मे ऐसी गागर रख दी,
जो थोडी सी खाली रख दी।
कब छलके गागर से पानी,
काहे वो संतुष्टि नही दी।

राम रमैया जग है माया,
जानता हूँ पर समझ न पाया।
मन की क्षुदा पूर्ति ना होती,
शेर समझ मे क्यों नही आया।

 

कवि :  शेर सिंह हुंकार

देवरिया ( उत्तर प्रदेश )

यह भी पढ़ें : –

प्रतिशोध | Pratishodh

Similar Posts

  • दिल की आवाज | Poem dil ki awaz

    दिल की आवाज ( Dil ki awaz )    मेरा दिल मुझे ही बार-बार आवाज दे खुद को तुम खुद के ही उमंग से नवाज ले। कल के कई है आईनें, आज का रख तु मायने। डर से भरी ज़िन्दगी निडर बन के तु निकल तेरे जैसे बदन बहुत । लेकिन अलग अंदाज दे खुद…

  • व्यर्थ की सोच | Vyarth ki Soch

    व्यर्थ की सोच ( Vyarth ki soch )    लक्ष्य सर हटकर अलग एक दिन की भी व्यर्थ सोच कर सकती है भ्रमित आपको बहक सकते हैं गैर की संगत से बदल सकती है मार्ग की दिशा और आप जा सकते हैं अपने उद्देश्य सर दूर आपकी प्रमुखता आपसे नही आपके कर्म से ही होती…

  • उदासी | Udasi par Kavita

    उदासी ( Udasi )   बादल  जैसी  छाई  उदासी । घिर- घिर कर फिर आई उदासी ।।   दिन-दिन बढ़ती ही जाती है । जैसे  हो  महंगाई  उदासी ।।   सूने दिल में बजती जैसे । दूर कहीं शहनाई उदासी ।।   सागर की लहरों सी खुशियां सागर की गहराई उदासी ।।   शमा  जली …

  • खुद भी हिंदी बोलिये | 14 September Hindi diwas par kavita

    खुद भी हिंदी बोलिये ( Khud bhi hindi boliye )   खुद भी हिंदी बोलिये, औरों को दो ज्ञान। हिंदी में ही है छिपा, अपना हिंदुस्थान।।   चमत्कार हर शब्द में, शब्द शब्द आनंद। विस्तृत है साहित्य भी, दोहा रोला छंद।।   सब भाषा का सार है, सबका ही आधार। माँ हिंदी की वंदना, सुधि…

  • हसरत | Kavita Hasrat

    हसरत ( Hasrat ) मेरे दिल की किसी धड़कन में तेरी याद रहती है। कहीं जिंदा हैं वो लम्हे जिन्हें पल पल ये कहती है। चले आओ जरा बैठें हम उसी घाट पे चलके ! जहां की लहरों में अब भी तेरी तसवीर रहती है ।। के मुझको तो गिला कोई नहीं तेरी रुसवाई का…

  • मुरलीवाला | Kavita Muraliwala

    मुरलीवाला ( Muraliwala ) दुनिया से निराला है तू बंसी वाला। जन्म दिया देवकी ने यशोदा ने पाला। गोपियों का प्रेमी, जग का रखवाला। नाचती हैं ठुमुक ठुमुक वो बृजबाला। छोटे छोटे पांव हैं, रंग का है काला। मगर चितचोर तू वो मुरलीवाला। शांत हो जाती है अंतर से ज्वाला। जपे जो भी कोई, तेरे…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *