सवाल-जवाब

सवाल-जवाब

पिंकी दसवीं कक्षा में पढ़ती है। पिंकी की अर्धवार्षिक परीक्षाएं चल रही हैं। पिंकी जैसे ही एग्जाम देकर घर लौटी, उसके दादाजी ने पिंकी से प्रश्नपत्र को लेकर सवाल-जवाब शुरू कर दिए-

“पिंकी बेटा, एग्जाम कैसा हुआ?”

“बहुत अच्छा हुआ, दादाजी।”

“किस सब्जेक्ट का था पेपर?”

“दादाजी साइंस का था।”

“अपना पेपर दिखाना, पिंकी बेटा। मैं भी तो देखूं… क्या-क्या आया था एग्जाम में?

“ये लीजिए दादाजी।” पिंकी ने प्रश्नपत्र देते हुए कहा।

दादा जी ने प्रश्नपत्र को ध्यान से पढ़ा तथा एक-एक करके प्रश्नपत्र में आए प्रश्नों को पिंकी से पूछना शुरू कर दिया। पिंकी ने सभी प्रश्नों के जवाब दादाजी को सही-सही दे दिए।

“मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा कि तुम पूरा पेपर ठीक से हल करके आयी हो। मुझे तो शक है कि घर आते समय रास्ते में तुमने प्रश्नोत्तर याद कर लिए होंगे। तुम्हें यह तो पता ही था कि घर पर जाकर पापाजी या दादाजी प्रश्नपत्र के बारे में जरूर पूछेंगे।”

“दादाजी ऐसा नहीं है। मेरा पेपर सच में बहुत अच्छा गया है। मेरे 100 में से 100 मार्क्स आएंगे। मुझे यकीन है।”

“मुझे सब पता है कि तुम कितना पढ़ती हो? अब तो तुम्हारा रिजल्ट ही बताएगा कि तुम सच बोल रही हो या झूठ?”
दादाजी ने चिढ़ाते हुए पिंकी से कहा।

“ठीक है, ठीक है। आप रिजल्ट ही देख लेना दादाजी। अब मुझे अगले पेपर की तैयारी करनी है। मेरा मूड खराब मत कीजिए।” यह कहकर पिंकी अपने रूम में अगले पेपर की तैयारी करने चली गई।

अगले दिन पुनः जब पिंकी हिंदी का एग्जाम देकर वापस आयी तो दादा जी ने कल की तरह ही पिंकी से प्रश्नपत्र ले लिया और प्रश्नपत्र को लेकर सवाल-जवाब करने लगे-

“आज का पेपर कैसा गया पिंकी बेटा? आज तुम्हारे कितने नंबर आ सकते हैं?”

“मुझे नहीं पता। यह तो रिजल्ट ही बताएगा कि मेरा पेपर कैसा गया है और मेरे कितने नम्बर आएंगे? पिंकी ने मुँह बनाकर जवाब दिया।
दादाजी समझ गए कि पिंकी कल वाली बात से नाराज़ है। इसके बावजूद उन्होंने पिंकी को चिढ़ाते हुए कहा-

“पिंकी बेटा, जो एग्जाम देकर आता है, उसे पता होता है कि उसके कितने नंबर आएंगे? तुम्हारी बातों से लग रहा है कि तुम्हारा पेपर आज कुछ खास नहीं गया है। तुम्हें कुछ याद नहीं है। तभी तुम मेरे प्रश्नों के उत्तर देने से बच रही हो और इस तरह की बातें कर रही हो।”

“मैं आपके प्रश्नों के उत्तर देने से नहीं बच रही। मैं आपसे नाराज़ हूँ इसलिए आपके सवालों का जवाब नहीं दे रही हूँ।”

“मेरी किस बात से नाराज़ है मेरी गुड़िया? मुझे बताओ तो सही। तभी तो मुझे पता चलेगा और मैं अपनी गलतियों पर काम करके गलती की पुनरावृत्ति नहीं करूँगा।” दादाजी ने पिंकी की बेरुखी का कारण जानने की कोशिश की।

“दादाजी, कल आपने मेरी बात पर यकीन नहीं किया और आज जब मैं आपकी कल वाली बात दोहराने लगी तो आप कहने लगे जो पेपर देकर आता है, उसको पता होता है कि उसके कितने नंबर आएंगे।

जब आपको मुझपर और मेरी किसी बात पर भरोसा नहीं तो मैं आपको क्यों बताऊं कि मेरा पेपर कैसा गया है या मेरे कितने नंबर आएंगे? मेरे बताए नंबर पर तो आप यकीन करेंगे नहीं? आप मेरा रिजल्ट देख लेना। तभी आपको तसल्ली होगी।” नाराजगी व्यक्त करते हुए पिंकी बोली।

“अच्छा मेरी गुड़िया, मेरी कल वाली बात से नाराज है। मैं कान पकड़ता हूँ। मुझसे गलती हो गई। चल अब बता तेरा पेपर कैसा हुआ है?” दादाजी अपनी गलती मानते हुए बोले।

पिंकी फिर भी खामोश रही।

“क्या मैं अब अपने प्रश्नों के उत्तर जान सकता हूँ। अब तो मैंनें सॉरी भी बोल दिया है।” दादाजी अजीब-सी रोनी सूरत बनाकर पिंकी से बोले। पिंकी दादाजी की शक्ल देखकर मुस्कुराने से खुद को रोक न सकी। उसने सहमति में अपना सिर हिला दिया। दादाजी पिंकी से प्रश्न पूछने लगे और पिंकी भी दादाजी के प्रश्नों का जवाब सही-सही देने लगी।

लेखक:- डॉ० भूपेंद्र सिंह, अमरोहा

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • टोना- टोटका | Tona- Totka

    अनिल जी एक विद्यालय में प्रधानाध्यापक हैं। वे समाज में व्याप्त रूढ़ियों से बच्चों को बचाने के लिए अक्सर वे बच्चों से इस विषय पर चर्चा करते रहते हैं। एक दिन उन्होंने देखा कि बहुत से बच्चे काली-काली ताबीज गले में बांधे हुए हैं। कुछ हाथ में भी बांधे हैं। उन्होंने सुमित नाम के लड़के…

  • रंग | Kahani Rang

    कमर के नीचे मिनी स्कर्ट ,छह इंच ऊँची एड़ी को सेंडिल , कीमती जेवर ,चार इंच पेट दिखाती लाल रंग की टॉप और होठो में सिगार दबाए मोना अपनी शेवरले गाड़ी में धुँए कर छल्ले छोड़ती फर्राटे भरती सडक़ पर दौड़ी जा रही थी कि अचानक उसे गङ्गा बैराज का पुल नजर आया तो देखते…

  • अनाथ

    “कहाँ मर गयी? और कितनी आवाज लगानी पड़ेगी? जल्दी से भैया का दूध गर्म करके लेकर आ। देख नहीं रही कि भैया भूख के कारण लगातार रोता जा रहा है।” राधा ने गुस्से से तेज़ आवाज में दस वर्षीय आराध्या से कहा। “बस अभी लायी मम्मी। थोड़ा सा स्कूल का काम बाकी रह गया था,…

  • सही फैसला

    राजू और रीना एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे, लेकिन परिस्थितियों के कारण वे एक दूसरे से अलग हो गए थे। राजू की शादी कविता से हो गई थी, लेकिन वह अभी भी रीना को प्यार करता था, उसे भुला नहीं पाया था। उसके दिल में रीना के लिए एक गहरा प्यार और आकर्षण…

  • हमसफ़र | Laghu Katha Humsafar

    अक्सर हम यही सोचते रहते है कि यार हमसफ़र ऐसा होना चाहिए, वैसा होना चाहिए।लेकिन कभी ये नहीं सोचते कि जो हमारे लिए हम जैसा हो उसके लिए हम भी वैसे हो पाएंगे क्या? नहीं ना? तो फिर उम्मीद बस एक से ही क्यूं?हम खुद को भी तो उसके हिसाब से ढालने का प्रयास कर…

  • पारदर्शी दृष्टि | Laghu Katha Paradarshi Drishti

    पारदर्शी दृष्टि ( Paradarshi Drishti ) दो मित्र के लिए अपने पसंद की दो राजनीतिक पार्टियांँ हो सकती है, लेकिन मित्रता अपनी जगह पर कायम रहती है, इसमें पार्टियां नहीं आती, आती हैं तो बस मित्रता। इसे कभी भी टूटने नहीं देना चाहिए। लेकिन बहुत कम ही लोग होते हैं जो इस बात को समझते…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *