शिक्षा की डोर कभी ना छोड़

शिक्षा की डोर कभी ना छोड़ | Poem on education in Hindi

शिक्षा की डोर कभी ना छोड़
*****

चाहे लाख दुत्कारे ज़माना
कहे भला बुरा अपशब्द
छोड़ना नहीं तू अपना लक्ष्य।
निशाना साधे रखना
कदम न पीछे खींचना
मेहनत कर श्रमकण से सींचना।
तन मन को समझाना-
रखना है धैर्य साहस
विचलित नहीं होना है,
करना है न आलस।
शिक्षा की डोर को सदा पकड़े रहना,
मजबूती से तू उसको जकड़े रहना।
‘ग़रीबी’ शिक्षा की राह में नहीं आती आड़े,
मेहनती ही केवल मां वाग्देवी को हैं भाते।
धन से नहीं पढ़ाई होती-
यह एक तपस्या है
साधना है
जिसने साध लिया,
खत्म सारी उसकी समस्या है।
भटकें कितने धनवान!
शिक्षा की चाह में,
लगाएं न ध्यान शिक्षा की राह में।
केवल नोटों की गड्डी से,
न मिलतीं सरस्वती!
उनकी कृपा उन्हें ही मिलती जो होते-
मेहनती और हठी ।
‘मंजूर’ के इस मंत्र को सदा सीने से लगाना,
कुछ करना है?
कुछ पाना है?
तो शिक्षा….
और केवल शिक्षा को ही अपनाना है।

?

नवाब मंजूर

लेखक-मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

 

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****

Never leave the door of education

Whether it is a million days
Say bad abuses
Do not give up your goal.
Keep an eye on always
Never Step back
Get sweat with hard work.
Explain body-mind
Have patience courage
Don’t get distracted,
Don’t have laziness.
Always hold the door of education,
You hold it firmly.
‘Poverty’ does not come in the way of education,
Hardworking is only acceptable to Maa Vagdevi.( Goddess of education and knowledge)
Money does not teach –
It’s a penance
Have to practice
Who took care,
The finish is his problem.
Wander how rich!
For want of education,
Do not focus in the path of education
Only with a basket of notes,
Saraswati is not available
Only those who would have received His grace –
Hardworking and obstinate.
Always invoke this mantra of ‘Manzoor’ with the chest,
Have something to do?
Want to get something?
So education…
And only education is adopted

 

Author: Md. Manzoor Alam alias Nawab Manzoor
Salempur, Chapra, Bihar.

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