पौधे देख सुन सकते हैं

पौधे देख सुन सकते हैं | Poem on plant in Hindi

पौधे देख सुन सकते हैं

( Paudhe dekh sun sakte hain )

*****

 

देख सुन और बात है करते!
पौधे !
क्या आप हैं जानते ?
क्या?
हां ,सही सुना आपने-
यह सत्य भी है भैया,
यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न आस्ट्रेलिया की
मोनिका गागलियानों ने है साबित किया।
पहले तो थे यही जानते,
पौधे हंसते हैं और हैं गाते।
जगदीश चंद्र बसु ने बताया था,
शोध में सिद्ध कर दिखाया था।
अब पता चला कि ये-
देख,सुन,गिन और पहचान सकते हैं,
आपस में बात भी कर सकते हैं।
सुन हम खुश हुए-
पौधे और हम सब सजीव हैं,
कोशिकाओं के मेल से हैं बनें।
जब वे बोल सकते हैं तो-
एक दिन हम भी उनसे बात कर सकेंगे,
उनके हाल चाल ले सकेंगे;
उनकी इच्छा और पसंद पूरी करेंगे।
अभी तक ऐसा नहीं था,
जो बिल्कुल सही नहीं था।
आखिर हम सजीव आपस में बातें क्यों न करें?
अपना दुःख दर्द साझा क्यों न करें?
इस बात का था दर्द,
अब निभा पाऊंगा फर्ज!
ऐसा है विश्वास ,
जल्द ही वैज्ञानिक देंगे खुशखबरी-
है इसका आस ।
मोनिका जी ने बताया-
पौधे हमारी सोच से भी हैं स्मार्ट!
याद कर लेते हैं सबकुछ खटाक ।
शिकार करने व दुश्मन पहचानने में हैं निपुण,
ऐसे अनेक विद्यमान हैं उनमें गुण।
कीटभक्षक पौधों को दो बार जो छेड़ते हैं,
उन्हें वो कतई नहीं छोड़ते है ‌।
लताएं ध्वनि उत्सर्जित करती है,
लौटती गूंज से पता करतीं हैं;
दीवार चढ़ने लायक है या नहीं!
फिर निर्णय लेतीं हैं।
मिर्च के पौधे बेसिल पौधों के पास
जल्दी उग जाते हैं,
क्योंकि वे इन्हें कीटों से सुरक्षा दे पाते हैं।
देखा! कितने समझदार है ये पौधे?
सस्ते में नहीं करते कभी सौदे !
इनकी खासियत सुन गिरे कई मुंह औंधे!!

 

?

नवाब मंजूर

लेखक– मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

यह भी पढ़ें :

सब मौन क्यों | Poem sab maun kyon

Similar Posts

  • माता लक्ष्मी जी | Laxmi ji par kavita

    माता लक्ष्मी जी ( Mata lakshmi ji )    मेरे मन-मंदिर में मैया आप करना सदा निवास, जन्मों-जन्मों से भक्त हूॅं मैं उदय आपका दास। मुझको है भरोसा आप पर और पूरा है विश्वास, सुख शान्ति समृद्धि का मेरे घर में रखना वास।।   शरद पूर्णिमा के दिन हुआ माता आपका जन्म, पुराणों के अनुसार…

  • माता-पिता और हम

    माता-पिता और हम   ->पिता जडें-माँ वृक्ष, तो हम फल फूल पत्ते हैं || 1.लंम्बा रास्ता-लंम्बा सफर, मुसाफिर हम कच्चे हैं | नहीं है अनुभव नई राहों का, अभी तो हम बच्चे हैं | चले अकेले बिना तजुर्बे, पग-पग मे बस धक्के हैं | पिता रास्ता-माँ सफर है, तो हम मुसाफिर अच्छे हैं | –>पिता…

  • मानवीय संवेदना ख़त्म हो गई!

    मानवीय संवेदना ख़त्म हो गई! हे ईश्वर ! आज तेरे मनुष्यों में,दयाभाव एवं मनुष्यता न रही।एक दूसरे के प्रति इन मनुष्यों में,बस! घृणा व शत्रुता समा रही है।मानवीय संवेदना ख़त्म हो गई!हैवानियत, हिंसा खूब बढ़ रही है।पति पत्नी की हत्या कर रहा है।आजकल मनुष्य पशु समान है।चंद पैसे हेतु हत्याएँ भी होती हैं।आज मनुष्य का,…

  • बुद्धिमती नारी | Buddhimati Nari

    बुद्धिमती नारी ( Buddhimati Nari )   नहीं लगती सबको प्यारी! जब भी मुखर, प्रखर दिखती है, तुरंत बन जाती है कुछ आंँखों की किरकिरी। अहं के मारे इन दिलजलों को, सुंदर लगती है मौन व्रत धारित, हांँ में हांँ मिलाती दीन-हीन, बुद्धिहीन नारी- बेचारी! देख-देख खुश, होते रहते हैं शिकारी। जब पड़ने लगते हैं…

  • देव भूमि उत्तराखंड | Uttarakhand par kavita

    देव भूमि उत्तराखंड ( Dev Bhoomi Uttarakhand )   ऋषि मुनियों की तपोस्थली बहती कल कल धारा उत्तराखंड देवभूमि पावन हो जहां हिमालय प्यारा   ऊंची ऊंची पर्वत चोटियां पावन सरिताएं बहती हसीं वादियां मनभावन कुदरत भी हर्षाती रहती   देवदार के वन घने जहां पर देव रमण को आते फल फूलों से लदी धरा…

  • संग हमें रहना है | Geet sang hamen rahana hai

    संग हमें रहना है ( Sang hamen rahana hai )   हर मुश्किल संघर्षों को मिलकर हमें सहना है। कुछ भी हो जाए जीवन में संग हमें रहना है। संग हमें रहना है   प्रीत की धारा बह जाए प्रेम सुधारस हम बहाये। प्यार के मोती लुटाए अपनापन अनमोल बढ़ाए। हमारी हर खुशियों का दिल…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *