अमेरिका को झटका

अमेरिका को झटका | Kavita

अमेरिका को झटका !

( America ko jhatka )

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ब्रिटेन,फ्रांस और जर्मनी ने अमेरिका को झटका दिया है,
ईरान पर पुनः प्रतिबंध की अमेरिकी प्रस्ताव खारिज कर दिया है।
विदेशी अखबारों ने इसे हेडलाइंस बनाया है,
इन देशों ने अमेरिकी दादागिरी को आईना दिखाया है।
2003 के इराक युद्ध के बाद, यह सबसे साहसी कदम है,
अमेरिका के खास सहयोगियों ने दिखाया दम है।
उसे साफ मना कर दिया है,
जोर का झटका धीरे से दिया है।
दरअसल अमेरिका ने सुरक्षा परिषद में ईरान पर नए सिरे से प्रतिबंध लगाने हेतु,
पिछले गुरुवार को एक प्रस्ताव लाया था,
जिसे उसके सहयोगियों ने ही नकार दिया था।
प्रतिबंध का प्रस्ताव ही खारिज हो गया,
इससे अमेरिका ही अलग-थलग पड़ गया।
ब्रिटेन,फ्रांस और जर्मनी ने अमेरिका को करारा जवाब दिया है,
कहा वाशिंगटन तानाशाह सा काम कर रहा है।
खुद को सबसे शक्तिशाली मान रहा है,
लेकिन अब वह अपना स्तर गिरा रहा है।
जिद करने लगा है,
स्वार्थी और दुराग्रही हो गया है;
जिससे अलग-थलग पड़ गया है ।
वह चाहता है कि पूरी दुनिया उसकी नीतियों का समर्थन करें,
लेकिन वह किसी भ्रम में नहीं रहे।
कि दुनिया उसकी गुलाम है?
सबकी अपनी संप्रभुता और पहचान है।
सबके पड़ोसी मित्र और अपने हित हैं,
ईरान भौगोलिक रूप से यूरोप के करीब है;
उसकी स्थिरता यूरोप के लिए फायदेमंद है।
ईरान परमाणु समझौता बहाल होने पर- यूरोपीय कंपनियों ने वहां का रूख किया,
समझौता रद्द होने से यूरोप को सुरक्षा का खतरा उत्पन्न हो गया;
साथ ही आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा।
इसलिए यूरोपीय देशों की नाराज़गी समझी जा सकती है-
अमेरिका को यह याद रखना चाहिए कि उसकी नीतियां सदा हावी नहीं हो सकती है।
यदि वह अहंकार में प्रतिबंध लगाएगा?
तो खामियाजा खुद ही भुगतेगा ।
ब्रिटेन फ्रांस और जर्मनी का इंकार उसके लिए चेतावनी है,
यदि फिर भी जिद का रास्ता अपनाएगा?
तो उसे इससे भी बुरा परिणाम देखना पड़ जाएगा।
विश्व शांति का खतरा उत्पन्न हो जाएगा,
इल्जाम अमेरिका पर ही आएगा।

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नवाब मंजूर

लेखक-मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

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