Sirf

सिर्फ | Sirf

सिर्फ

( Sirf ) 

 

मिला सिर्फ दर्द ,और मिले सिर्फ आंसू
आपसे लगाकर दिल,कहो हमे क्या मिला

मिल गई है मंजिल ,आपकी तो आपकी
आपकी यादों के सिवा,कहो हमे क्या मिला

कह दिए होते,नही मंजूर यह सिलसिला
रेत की तृष्णा के सिवा,कहो हमे क्या मिला

सिवा प्यार के कब तुम्हारा,साथ हमने मांगा
खामोशी के सिवाऔर,कहो हमे क्या मिला

इसे ही तो कहते नही,दिल का लगाना कभी
इंतजार के सिवा और ,कहो हमे क्या मिला

बेहतर है,ले लो ,अपनी यादों को भी मुझसे
इस दिल को तड़प के सिवा,और क्या हमे मिला

 

मोहन तिवारी

( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

ख्वाब | Khwab

Similar Posts

  • मैं हूं प्रयागराज | Prayagraj

    मैं हूं प्रयागराज ( Main Hoon Prayagraj )    इतिहास के पृष्ठों पर स्तंभ-अभिलेखों पर पथराई नजरों से ठंडे हाथों से नदी-नालों का खेत-खलिहानों का शहर-नगरी में तपती दुपहरी में संगम के तट पर कण-कण छानते हुए देख अतीत के अपने रूप-नक्शे दिखा इलाहाबाद उदास! उदास! उदास बोला उदास मन से रखना मेरे अतीत को…

  • महफिल | Mehfil

    महफिल ( Mehfil )   महफिले आम न कर चाहत मे अपनी लुटेरों की बस्ती मे न बसा घर अपना बच के रह जरा ,बेरुखी जहां की नजर से इस महफिल का उजाला भी शराबी है घरौंदे से महल के ख्वाब ,ठीक नही होते दीए का उजाला भी ,भोर से कम नहीं होता ये महफिल…

  • एकता का प्रतीक

    एकता का प्रतीक एकता का प्रतीक मकर संक्रान्तिजिन्हें जानकर दूर होगी भ्रांतिसभी जाति ,संप्रदाय, पंथ वालोंमिलकर रहो बनी रहेगी शांति । तिल है कालाचावल है उजलाशक्कर है गेरूआमूंग है हरासभी है एक रस में घुला । चावल , दाल मसाले मिलकरसबने एक खिचड़ी बनाईयह पर्व मानव को सौंपकरऋषि, मनि एक बात सिखाई । भले हमारा…

  • हिन्दी कविता बेटी | Poem by Sumit

    “बेटी” नील गगन को छूना चाहती हूँ, आसमान में उड़ना चाहती हूँ, माँ मुझे भी दुनिया में ले आ मैं भी तो जीना चाहती हूँ । मुझे भी खूब पढ़ने दे माँ, मैं आगे बढ़ना चाहती हूँ। भ्रूण हत्या है एक महा पाप, सबको समझाना चाहती हूँ। सब कर सकती है बेटी भी, जमाने को…

  • हंसती एक लड़की | Hansti ek Ladki

    हंसती एक लड़की ( Hansti ek Ladki ) ज़ोर से हंसती एक लड़की मानो खटकती है हर पुरुष की आँखों में मानो वो एक ख़तरा पैदा कर देती है हर उस स्त्री के लिये जिसे वो बांध कर आए हैं अपने घर की चारदिवारी में ज़िम्मेदारियों की ज़ंजीरों से। ये हंसी सीधा हमला कर देती…

  • खंजर लेकर घूम रहे हैं | Poem khanjar lekar ghoom rahe hain

    खंजर लेकर घूम रहे हैं ( Khanjar lekar ghoom rahe hain )      खंजर लेकर घूम रहे हैं कुछ अपने कुछ बेगाने। किसे सुनाऊं कौन सुनेगा हाले दिल ये अफसाने।।   कुछ तो भोला कह देते हैं कुछ कहते मगरूर बड़ा कुछ कहते ये नहीं बराबर, कहते कुछ मशहूर बड़ा कैसे इनको समझाएं अब,…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *