Kamaal Karte ho

कमाल करते हो | Kamaal Karte ho

कमाल करते हो

( Kamaal karte ho ) 

 

लगाकर चाँद पर दाग कमाल करते हो,
बातें बड़ी आजकल बेमिसाल करते हो।

बेचैन हो जाता दिल मेरा बातें सुन तुम्हारी,
खुद से क्यों नहीं तुम ये सवाल करते हो?

यूँ उलझा नहीं करते हर बार ही किसी से,
बेवज़ह तुम हर बात पर बवाल करते हो!

करता हूँ कोशिश तुम्हें लाख समझाने की,
मेरी हिदायत पे तुम क्यूं मलाल करते हो।

 

कवि : सुमित मानधना ‘गौरव’

सूरत ( गुजरात )

यह भी पढ़ें :-

मैं और चाय | Main aur chai

Similar Posts

  • दिल में हमारे आज भी

    दिल में हमारे आज भी ( ‘वाचाल’ ग़ज़लमतलआ छोड़कर सारे अश्आर तिटंगे ) दिल में हमारे आज भी अरमान पल रहा हैयूँ मानिए कि दिल को ये दिल ही छल रहा है रंगे-निशात झेला बारे-अलम उठा करना जाने किस बिना पर ये साँस चल रहा हैजुड़ता है टूट-टूट कर फ़िर-फ़िर संभल रहा है वो पूछते…

  • मुस्कुराने के बाद | Muskurane ke Baad

    मुस्कुराने के बाद ( Muskurane ke Baad ) दिल की महफ़िल से मुझको उठाने के बादकोई रोता रहा मुस्कुराने के बाद उनके तीर – ए – नज़र का बड़ा शुक्रियाज़िन्दगी खिल उठी चोट खाने के बाद हौसलों को नई ज़िंदगी दे गयाएक जुगनू कहीं झिलमिलाने के बाद उसने दीवाना दिल को बना ही दियाइक निगाह…

  • हमेशा रहे बेसहारों में शामिल

    हमेशा रहे बेसहारों में शामिल रहे तनहा होकर हज़ारों में शामिलहमेशा रहे बेसहारों में शामिल सदा ही रही है ख़ुशी दूर हमसेरहे हम सदा ग़मगुसारों में शामिल नहीं बन सके हम महाजन कभी भीसदा ही रहे देनदारों में शामिल ज़मीं पे मिलन हो न पाया हमाराचलो होंगे अब हम सितारों में शामिल मिली हमको मन…

  • बड़ी उम्मीद से माँ ने हमारी पाला है

    बड़ी उम्मीद से माँ ने हमारी पाला है बड़ी उम्मीद से माँ ने हमारी पाला हैखिलाया उसने बड़े प्यार से निवाला है झुकाया शीश है हमने उसी के चरणों मेंहमारे वास्ते अब भी वही शिवाला है जहाँ जहाँ भी बिखरने की आई थी नौबतदुआ ने माँ की हमेशा मुझे सँभाला है किसी के हुस्नो-तबस्सुम का…

  • परी आसमान की | Pari Aasman ki

    परी आसमान की ( Pari aasman ki )    जब बात चल रही थी वहाँ आन-बान की लोगों ने दी मिसाल मेरे खानदान की मैं हूँ ज़मीन का वो परी आसमान की कैसे मिटेगी दूरी भला दर्मियान की देखूं मैं उसके नखरे या माँ बाप की तरफ़ सर पर खड़ी हुई है बला इम्तिहान की…

  • समझते ही नहीं | Samajhte hi Nahi

    समझते ही नहीं वो मुहब्बत को मेरी कुछ क्योंकर समझते ही नहींप्यार के वादों पे अब तो वो उछलते ही नहीं एक हम हैं जो उन्हें देखे सँभलते ही नहींऔर वो हैं की हमें देखे पिघलते ही नहीं मिल गये जो राह में हमको कभी चलते हुएइस तरह मुँह फेरते जैसे कि मिलते ही नहीं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *