स्वयं का मोल | Swayam ka Mole

स्वयं का मोल

( Swayam ka mole ) 

 

मिलन सारिता,प्रेम,लगाव आदि
बेहद जरूरी है
बावजूद इसके,आपको अपनी भी
कीमत स्वयं ही निर्धारित करनी होगी..

आपका पद,रिश्ता,भूमिका
आपको खुली छूट नही देता
आप जहां,जिस जमीन पर ,जिसके साथ
खड़े हैं ,वहां आपका कुछ मूल्य भी है…

अधिक सस्ती या सुलभ उपलब्धता
वस्तु हो या व्यक्ति
उसकी गरिमा को गिरा देता है
निगाह मे आप बहुत हल्के हो जाते हैं..

मेल आपके मन मे नही बेशक
लोगों को आपसे लाभ लेना आता है
और ऐसी स्थिति मे ,एक दिन
आपका टूट जाना संभव है..

महंगे बनोगे तो महंगे बिकोगे
अन्यथा ,शोरूम और फुटपाथ के अंतर को
समझलेना ही बेहतर होगा
हर बात समझाई नही जा सकती…

 

मोहन तिवारी

 ( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

परिंदा | Parinda

Similar Posts

  • मोर छत्तीसगढ़ महतारी | Mor Chhattisgarh Mahtari

    मोर छत्तीसगढ़ महतारी ( Mor Chhattisgarh Mahtari )    मोर छत्तीसगढ़ महतारी हावय सबले महान, एकर कोरा मा खेलय का लईका का सियान। हमर राज्य के सुख सम्पदा हा सबके मन ला भावय, एक बार जेन आगे ईहां नई फेर कभू छोड़के जावय। हमर छत्तीसगढ़िया भुईयां हा कहाथे धान के कटोरा, दुसर के मदद करे…

  • मानव अधिकार

    मानव अधिकार स्वतंत्रता,समता अनेकों अधिकार मिला,मानव को न मानव अधिकार मिला,घर में मतभेद बच्चों -बूढो मेंरिश्ते नातों से बस घाव मिला,कौन लड़ें ,किससे कहें दिल कि बातेंअपनो से न अब वो भाव मिला,किस अधिकारों के लिए लड़ेंजब कहने, सुनने तक का न अधिकार मिला,घर से हो रही राजनीति देश तक जा मिला,हर परिवार को निगलने…

  • संसार एक जाल | Sansar ek Jaal

    संसार एक जाल ( Sansar ek jaal )   चारों तरफ फैली हुई धोखेबाजी और मक्कारी है, भोले भाले लोगों को लूटना इनकी कलाकारी है। सोच समझ करो भरोसा आज के तुम इंसानों पर, न जाने कब फेर दे पानी वो तुम्हारे अहसानों पर। जरूरतमंद जान तुम जिसका भला करने जाओगे, हो सकता है उसी…

  • उड़ान हौसलों की | Udaan Hauslon ki

    उड़ान हौसलों की ( Udaan hauslon ki )   जरूरी नही की स्वयं पर उठे हर सवालों का जवाब दिया ही जाय जरूरी है की उठे सवालों पर गौर किया जाए.. प्रश्न तो हैं बुलबुलों की तरह हवा के मिलते ही बिलबिला उठते हैं सोचिए की आपका बैठना किस महफिल मे है… किसकी आंखों ने…

  • उमंग | Kavita Umang

    उमंग ( Umang ) भारतवर्ष हमारा है विकसित, सभ्यता,संन्कृति भी है उन्नत, षटॠतुऔं का होता आवाजाही हर ॠतु में आते पर्व,वर्चस्व,माही।। फाल्गुन पूर्णिमा में होली तौहार रंग,गुलाल का बासंती विहार, नाना उमंग का होता आप्लावन नई नवेली बधु के लिए,रास,धन।। संयोगी के लिए खास है परव, नानाविध पकवान का लुत्फ, इष्ट,मित्र मंड़ल संग होली,राम उमंग…

  • उधम सिंह सरदार | Kavita Udham Singh Sardar

    उधम सिंह सरदार ( Udham Singh Sardar ) आन-बान थे देश की, उधम सिंह सरदार। सौरभ’ श्रद्धा सुमन रख, उन्हें नमन शत बार।। वैशाखी की क्रूरता, लिए रहे बेचैन। ओ डायर को मारकर, मिला हृदय को चैन।। बर्बरता को नोचकर, कर ओ डायर ढेर। लन्दन में दहाड़ उठा, भारत का ये शेर।। बच्चा-बच्चा अब बने,…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *