हिंदी कविता

  • मैं चाहता हूं

    मैं चाहता हूं   मैं चाहता हूं तुम्हारे हृदय में दो इंच ज़मीन जहाँ तुम रख सको मुझे विरासत की तरह सम्भाल कर पीढ़ियों तक बिना गवाएँ एक इंच भी……. बस तुम इतना कर लेना ज़मीन की तरह मुझ में बोते रहना अपने प्रेम का अंकुर और देखते रहना अपलक बढ़ते हुए……!!   ? कवि : सन्दीप…

  • रब की अदालत

    रब की अदालत   1. वो मजलूमों को बेघर कर बनाया था अलीशां मकां यहां, गरीब,लचारों की बद्दुवा कबूल हो गई रब की अदालत में वहां अब बरस रहा बद्दुवाओं का कहर देखो , जमींदोज हो रहा अलीशां मकां यहां। 2.     हुआ घमंड जब-जब वो गिराते रहे बार-बार, हुआ तालीम, परोपकार जब-जब उन्हीं दुवाओं…

  • चाय

    चाय ** अच्छी मीठी फीकी ग्रीन काली लाल कड़क मसालेदार होती है, नींबू वाली, धीमी आंच वाली, दूध वाली, मलाई और बिना मलाई की, लौंग इलायची अदरक वाली भी होती है। मौसम और मूड के अनुसार- लोग फरमाइश करते हैं, तो कुछ डाक्टरों की सलाह पर- मन मारकर फीकी ही पीने को विवश हैं। यह…

  • नैना बावरे जुल्फो में उलझाने लगे

    नैना बावरे जुल्फो में उलझाने लगे     दिल मचलने लगे अश्क बहने लगे हमे तुम्हे याद करके बहकने लगे   नजरे जब भी मिली मुस्कुराने लगे फूल गुलशन मे देखो गुनगुनाने लगे खिलकर भवरों के मन बहकाने लगे दिल को अपने यूॅ भी समझाने लगे दिल मचलने लगे अश्क बहने लगे हमे तुम्हे याद…

  • किताबें

    किताबें *** खाली अलमारियों को किताबों से भर दो, बैठो कभी तन्हा तो निकाल कर पढ़ लो। हो मन उदास तो- उठा लो कोई गीत गजल या चुटकुले कहानियों की किताब, पढ़कर भगा लो अवसाद। ये जीवनसाथी हैं, दोस्त हैं। दवा हैं, मार्गदर्शक हैं। समय समय पर उन्हें निहारो, समझो परखो विचारो। गूढ़ बात अपना…

  • माता-पिता और हम

    माता-पिता और हम   ->पिता जडें-माँ वृक्ष, तो हम फल फूल पत्ते हैं || 1.लंम्बा रास्ता-लंम्बा सफर, मुसाफिर हम कच्चे हैं | नहीं है अनुभव नई राहों का, अभी तो हम बच्चे हैं | चले अकेले बिना तजुर्बे, पग-पग मे बस धक्के हैं | पिता रास्ता-माँ सफर है, तो हम मुसाफिर अच्छे हैं | –>पिता…

  • स्वच्छता है जरूरी

    स्वच्छता है जरूरी ***** रखें ध्यान इसका विशेष, जन जन को दें यह संदेश। इसी से आती खुशहाली, दूर रहे संक्रमण बीमारी। जो स्वच्छ रहे परिवेश हमारा, तो स्वस्थ हो जाए जीवन प्यारा; गांधी जी का यही था नारा। सुन लो मेरे राज दुलारे, कह गए हैं बापू प्यारे। इधर उधर न कूड़ा डालो, बात…

  • मुसाफिर हैं आदमी: अहं किस बात की ?

    मुसाफिर हैं आदमी: अहं किस बात की ? ************ न कोई हैसियत अपनी,न स्थायी मकान, जिंदा हैं जब तलक,तभी तक है पहचान। ढ़ाई किलो का था,जब तू आया था यहां, बस उतना ही रह जाओगे,जब जाओगे वहां। विश्वास न हो तो उठा लाना! राख के उस ढ़ेर को- जो चिता की अग्नि में जल कर…

  • ए दिल सुन जरा

    ए दिल सुन जरा   1 उसकी यादों में दिन कटता उसके ख़्वाबों में रातें कटती ए दिल सुन जरा तू भूल जा उसको ज़रा 2 जो तेरा नहीं हुआ है उसको क्या याद करना भला ए दिल सुन ज़रा तू भूल जा उसको ज़रा 3 किया था वादा उसनें साथ निभाने का कभी और…

  • तुमसा बेवफा जमाने में नहीं

    तुमसा बेवफा जमाने में नहीं   जब भी छेडा किस्सा वो पुराना, प्रेम से मैं महीनों सो ना न पाई चैन से मेरा दिल बेचैन था उस अनजानी सी टीस से  मैं महीनों सो ना पाई चैन से तुमतो मुडकर खो गए अपनी दुनियाँ में कहीं तेरी आहट से धड़कता दिल रहा मैं वहीं से…