हिंदी कविता

  • गुरु शिष्य का भाग्य संवारते | Kavita

    गुरु शिष्य का भाग्य संवारते ( Guru shishya ka bhagya sanwarte )   किस्मत का ताला खुल जाता, गुरु शिष्य का भाग्य विधाता। ज्ञान ज्योति जगा घट घट में, अंतर्मन उजियारा लाता।   शिल्पकार मानव निर्माता, शत शत वंदन हे गुण दाता। बुरे मार्ग से हमें बचाओ, प्रगति का मार्ग दिखलाओ।   गढ़कर नित नये…

  • फूलों सा मुस्काता चल | Hindi Poetry

    फूलों सा मुस्काता चल ( Phoolon sa muskata chal )   फूलों सा मुस्काता चल, राही गीत गाता चल। मंजिल  मिलेगी  खुद, कदम  बढ़ाना  है।   आंधी तूफान आए, बाधाएं मुश्किलें आए। लक्ष्य  साध  पथ  पर, बढ़ते  ही जाना है।   नेह मोती बांट चलो, हंस हंस खूब मिलो। अपनापन  रिश्तो  में, हमको  फैलाना है।…

  • तुम्हे चाहा अधिक सारे जहां से | Kavita

    तुम्हे चाहा अधिक सारे जहां से ( Tumhe chaha adhik sare jahan se )   तुम्हे चाहा अधिक सारे जहां से। मुकद्दर मैं मगर लाऊ कहां से।। ऐ  मेरी  जाने  गजल  तू  ही  बता, कौन हंसकर हुआ रूखसत यहां से।। किसी भी चीज पे गुरुर न कर, हाथ खाली ही आया है वहां से।। मैं …

  • जल बिन | Kavita

    जल बिन ( Jal Bin )   इकदिन समंदर भी सूख जाएगा व्यर्थ पानी बहाया जा रहा  घर-घर लगाकर समरसेबुल व्यर्थ पानी बहाया जा रहा    जहां थी जरूरत सभी को इक गिलास पानी की वहां चलाकर समरसेबुल व्यर्थ पानी बहाया जा रहा   पानी का कीमत इक दिन जाकर मैं मछलियों से पूछा, वो…

  • शटर उठा दो | Kavita

    शटर उठा दो ( Shatar utha do )   मेरे ख्याल रूपी ब्रेड पे बटर लगा दो। दिल का बन्द है दुकान तुम शटर उठा दो।   मिला के नयन नयनों से यू आँखे चार कर लो। पनीर तल के रखा है कि तुम मटर मिला दो।   पुलाव बन रही ख्यालों में थाली लगा…

  • पुत्री की वेदना शराबी पिता से | Kavita

    पुत्री की वेदना शराबी पिता से ( Putri ki vedna sharabi pita se )   पापा मेरी किताब , मेरे अरमान है,  मेरी खुशी है, मेरा भविष्य है,          सब बेच मेरी खुशियों का          शराब पी गए, पापा मां का मंगलसूत्र सुहाग है मांग का सिंदूर है,      सब बेच उनके अरमानों का       …

  • संसय | Kavita

    संसय ( Sansay )   मन को बाँध दो दाता मेरे,मेरा मन चंचल हो जाता है। ज्ञान ध्यान से भटक रहा मन,मोह जाल मे फंस जाता है।   साध्य असाध्य हो रहा ऐसे, मुझे प्रेम विवश कर देता है। बचना चाहूं मैं माया से पर, वो मुझे खींच के ले जाता है।   वश में…

  • बंधु अपने दिल की सुन | Geet

    बंधु अपने दिल की सुन ( Bandhu apne dil ki soon )   चल राही तू रस्ता चुन, बंधु अपने दिल की सुन। बंधु अपने दिल की सुन,बंधु अपने दिल की सुन। अपनी धुन में बढ़ता जा, उन्नति शिखर चढ़ता जा। आंधी से तूफानों से, हर मुश्किल से लड़ता जा। हौसला करके बुलंद, गा मस्ती…

  • प्रतिशोध | Pratishodh

    प्रतिशोध ( Pratishodh )   मै हार नही सकता फिर ये, जंग जीत दिखलाऊंगा। फिर से विजयी बनकर के भगवा,ध्वंजा गगन लहराऊगा।   मस्तक पर चमकेगा फिर सें, चन्दन सुवर्णा दमकांऊगा। मै सागर जल तट छोड़ चुका पर,पुनः लौट कर आऊँगा।   जी जिष्णु सा सामर्थवान बन, कुरूक्षेत्र में लौटूंगा। मैं मरा नही हूँ अन्तर्मन…

  • Kavita | बरस बरस मेघ राजा

    बरस बरस मेघ राजा ( Baras baras megh raja )   मेघ राजा बेगो आजा, बरस झड़ी लगा जा। सावन सुहानो आयो, हरियाली छाई रे।   अंबर बदरा छाये, उमड़ घुमड़ आये। झूल रही गोरी झूला, बागा मस्ती छाई रे।   रिमझिम रिमझिम, टिप टिप रिमझिम। बिरखा फुहार प्यारी, तन मन भाई रे।   ठंडी…