पथिक प्रेमी

पथिक प्रेमी | Kavita

पथिक प्रेमी

( Pathik Premi )

 

हे पथिक मंजिल से भटके, ढूंढता है क्या बता।
क्यों दिखे व्याकुलता तुझमें, पूछ मंजिल का पता।
यू ही भटकेगा तो फिर सें, रस्ता ना मिल पाएगा,
त्याग संसय की घटा अरू, पूछ मंजिल का पता।

 

जितना ही घबराएगा तू, उतना ही पछताएगा।
वक्त पे ना पहुचा तो, मुश्किल में तू पड जाएगा।
क्या पता मंजिल तुम्हारा, अब भी देखे रास्ता,
तू ना पहुचा जो वहाँ कोई, और ही आ जाएगा।

 

हे पथिक मुझकों बता क्या, तू ही है वो साँवरा।
जिसका रस्ता देखे राधा, बन गयी सु बाँवरा।
आज है उठने को डोली,पतित पिय के आस की,
तू अगर वो ही है तो फिर, पीछा कर बारात का।

 

हीर राँझा को मिली ना, सैती भी ना मुराद से।
प्रीत पूरा ना हो पाया, राधा का भी श्याम से।
अब भी भटके है पथिक बन,प्रीत के आकाश में,
सुप्त मन से शेर लिखता, पथिक प्रेमी प्यार से।

 

✍?

कवि :  शेर सिंह हुंकार

देवरिया ( उत्तर प्रदेश )

 

शेर सिंह हुंकार जी की आवाज़ में ये कविता सुनने के लिए ऊपर के लिंक को क्लिक करे

यह भी पढ़ें : –

यादें | Kavita

Similar Posts

  • 25 दिसंबर की शाम | 25 December ki Sham

    25 दिसंबर की शाम ( 25 December ki Sham )   बुझा हुआ सा रहता था एक इंसान, जो कहीं भी जाने से कतराता था। एक शाम चला गया दोस्तों के साथ, जहाँ क्रिसमस का मेला लगता था। शहर से कुछ दूर, एक राह खामोश थी। चर्च से थोड़ी दूर एक लड़की बेहोश थी। टहलता…

  • जिन्दगी चार दिन की | Zindagi Char Din Ki

    जिन्दगी चार दिन की ( Zindagi Char Din Ki ) लहरों के संग चलो ठिठोली करते हैं, बस एक बार तुम हम हम तुम बनते हैं। आओ ज्वार संग भाटा के साथ जाने के लिए , जिन्दगी चार दिन की खुश रहो कुछ पाने के लिए । हाँ ठीक समझे वक्त को साथ लेकर आना,…

  • नशामुक्त अभियान | Nasha Mukt Abhiyan

    नशामुक्त अभियान ( Nasha mukt abhiyan )    सबको मिलकर रचना है इतिहास हिन्दुस्तान में, नामुमकिन कुछ नहीं इंसानों के लिए जहान में। दीप ज्ञान का जलाना‌ है ये लिया क़लम हाथ में, नशीलें-पदार्थ ना आनें देंगे हिन्ददेश महान में।। जीतेंगे यह युद्ध भारतीय नशामुक्त अभियान में, बीड़ी-सिगरेट और तंबाकू जला देंगे श्मशान में। नही…

  • सिया के राम | Poem Siya Ke Ram

    सिया के राम ( Siya Ke Ram )   सिया के राम जन्म लेकर, पतित का नाश करेगे अब। ताड़का खर दूषण के संग, नाराधम मारेगे वो अब।   धरा पर पाप बढा जब,नारायण राम रूप सज धज, मनोहर रूप भुजा कोदंड, धरा से पाप मिटेगा अब।   प्रकट भयो नवमी को श्रीराम,पूर्णिमा जन्म लिए…

  • लक्ष्य

    लक्ष्य   है दुनिया में ऐसा कौन? जिसका कोई लक्ष्य न हो।   तृण वटवृक्ष सिकोया धरा धरणीपुत्र गगन हो।   प्रकृति सभी को संजोया कण तन मन और धन हो।   खग जल दिवा-रजनी बाल वृद्ध जन व पवन हो।। है दुनिया ०   सब संसाधन यहीं हैं,सही है, कहां दौड़ते ऐ विकल मन…

  • ऐ ख़ुदा यही है दुआ मेरी | Ai Khuda

    ऐ ख़ुदा यही है दुआ मेरी ( Ai Khuda Yahi Hai Dua Meri )     ऐ ख़ुदा यही है दुआ मेरी , मैं गिरूँ न दिल के मक़ाम से मेरी  जिंदगी  को  नवाज़  दे तू मुहब्बतों  के  इनाम  से   ये हयात देख महक रही ,मेरी शायरी भी चमक रही “तेरे ज़िक्र से ,तेरी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *