Tip-tip karti boonde

टिप-टिप करती बूंदे | Tip-Tip karti Boonde

टिप-टिप करती बूंदे

( Tip-tip karti boonde )

 

आसमान‌ से बरस रहा है आज झमाझम पानी,
झूमो‌ नाचों ख़ुशी मनाओ मिलकर दिल जानी।
टिप टिप करती बूॅंदे लगती है सभी को सुहानी,
चलों सोनू मोनू ‌टीना बीना करें सभी मनमानी।।

जूता-चप्पल कोई ना पहनो भागो दौड़ो सरपट,
उछल कूद का आनन्द लो आओ सब झटपट।
बरस रहा है प्यार धनाधन आज इस धरती पर,
ला रही है पानी बदरिया काली-पीली नटखट।।

हरा भरा अब होगा ऑंगन खेत और खलिहान,
नाच उठेगा मन-मयूरा बन ये पशु पक्षी इंसान।
अटूट नाता है बरसात का धरती माता के साथ,
मिट्टी भी सोना उगलेगी जय हो इन्द्र भगवान।‌।

बरसों इतना कि भर जाएं सभी कुॅंए व तालाब,
सपने सारे सच हो सबके‌ सोचा जिसने ख़्वाब।
पर्यावरण भी शुद्ध होगा काम में होगा विकास,
बनकर घूमें हम सभी जैसे आया कोई नवाब।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

Similar Posts

  • पिता की स्नेहाशीष पाती | Papa par kavita

    पिता की स्नेहाशीष पाती ( श्रृद्धांजलि )  एक स्नेहाशीष चिट्ठी को तरसता मेरा मन आज बरबस दिवंगत पिता को याद करता है दस बरस पहले अनायास जो चले गए थे तुम आज भी आप की चिट्ठी की राह तकती हूँ कईं पत्रों को भेजकर कुशल पूछा करते थे अक्सर बेटी को नेह देने का तरीका…

  • संविधान का निर्माता | Samvidhan ka Nirmata

    संविधान का निर्माता ( Samvidhan ka nirmata )    ख़ुदा का नूर बनकर आया वह संविधान का निर्माता, सबको समान अधिकार मिले जिनका ये अरमां था। चुप-चाप गरल पीता रहा पर दिलाकर रहा समानता, ख़ुद पढ़ो फिर सबको-पढ़ाओ ऐसा जो कहता था।। तुम आज झुक जाओ कागज की पुस्तकों के सामने, फिर कल को देखना…

  • नीलकंठ महादेव | Neelkanth Mahadev par Kavita

    नीलकंठ महादेव ( Neelkanth Mahadev )    सारी दुनिया का गरल पी नीलकंठ कहलाए। ध्यान मग्न भोले शंकर शीश जटा गंग बहाए। भस्म रमाए तन पे बैठे हैं गले सर्पों की माला। हाथों में त्रिशूल धारे शिव बाबा डमरू वाला। बाघांबर धारी भोले शिव हे नंदी के असवार। सब देवों के देव शंभू सारे जग…

  • बड़े भैया | Bade Bhaiya

    बड़े भैया ( Bade Bhaiya )   लिख देती हूं हर रोज एक पैगाम , मन के जुड़े तार से, पढ़ लेता है वो मन की बात, और संभाल लेता बड़े प्यार से, कहने को तो बहुत दूर है मुझसे, लेकिन करीब लगता ज्यादा सांसों से, मैंने कभी जो सोचा नहीं सपनों में, बड़े भैया…

  • चलिए तो तीरथ | Chaliye to Tirath

    चलिए तो तीरथ ( Chaliye to Tirath )   एक पल तू- गीत उर गुनगुनाले संग अपंग होले रंग मायूस चढ़ाले खुशियां गुरबे बांट ले खामोशियां वक्त की छट जाएगी एक पल तू- मीत मन बिठाले गले हंसके लगाले प्रेम ह्रदय बसाले दुख जन हरले खाइयां ताउम्र मिट जाएगी एक पल तू- प्रीत जग जगाले…

  • अलसायी कलम | Alsaayi Kalam

    अलसायी कलम ( Alsaayi kalam )    यह निढाल कलम सुस्ताये से अल्फाज़ करवट ले मुँह मोड़कर यह मेरी डायरी के पन्ने हाथ लगाने पर कुछ यूं उखड़े से आँखें बंद किये कसमसाते हुये लिहाफ़ में मानो और दुबक गये हाथों से मेरे छिटक लिये दबी आवाज़ में मानो कह रहे रात है गहराती हमें…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *