Tu Kaun

तु कोन है मेरे लिए | Tu Kaun

तु कोन है मेरे लिए

( Tu kaun hai mere liye ) 

 

कैसे बतावू तु कोन हे मेरे लिए,
तु क्या है मेरे लिए ||

बचपन का रंगबिरंगी किस्सा है तू
दिल के करीब का हिस्सा है तु

कड़कती धूप मे छाव है तू
मेरे लिए एक हंसी शाम है तू

ऐ दोस्त! अंधेरे का उजाला है तू
दिल की खुशियों का ताला है तू

आंखों मे हर वक्त आये वह ख्वाब है तू
मेरे हर सवाल का जवाब है तू

मेरे जिवन का अनमोल खाजाना है तू
पहली मोहब्बत का फसाना है तू

ऐ दोस्त ! पतंग की डोर है तू
मेरे दिल मे बसा हुआ शोर है तू

जिंदगी जीने का सलीका सिखाया तुने
अपनी मंजिल पे चलना बताया तुने

अब कोई और नहीं तेरे दिल के सिवा
ऐ दोस्त ! मेरा आज भी तू मेरा कल भी तू

 

नौशाबा जिलानी सुरिया
महाराष्ट्र, सिंदी (रे)

यह भी पढ़ें :-

ऐ जिंदगी तुझे | Aye zindagi

Similar Posts

  • Hindi Diwas Poem | मातृभाषा को समर्पित

    मातृभाषा को समर्पित ( Matri bhasha ko samarpit )  ***** ( विश्व हिंदी दिवस पर )   हे विश्व विभूषित भाषा हिंदी, संस्कृत से जन्म जो पाई, महिमा महान जग छाई।। शुत्र चतुर्दश माहेश्वर के, शिव डमरू से पाया। ऋषी पांणिनी व्याख्यायितकर, आभूषण पहनाया। बावनवर्णों से वर्णांका की शोभा हो बढ़ाई, महिमा महान जग छाई।।…

  • जवानी का मौसम | Jawani ka Mausam

    जवानी का मौसम! ( Jawani ka mausam )    कटेगा सुकूँ से सफर धीरे -धीरे, होगी खबर उसको मगर धीरे-धीरे। मोहब्बत है जग की देखो जरुरत, उगने लगे हैं वो पर धीरे-धीरे। उबलने लगा अब अंदर का पानी, चलाएगी खंजर मगर धीरे-धीरे। आठों पहर मेरे दिल में वो रहती, लड़ेगी नजर वो मगर धीरे-धीरे। जवानी…

  • वर्तमान समझ | Vartman Samaj

    वर्तमान समझ ( Vartman Samaj )   शिक्षा का विकास हुआ,समझ अधूरी रह गई पूरे की चाहत मे ,जिंदगी अधूरी रह गई बन गए हों कई भले ही महल अटारी चौबारे मुराद भीतर ही मन की,दम तोड़ती रह गई बिक गए पद,सम्मान औ प्रसंशा के मोल मे माता स्वाभिमान की,छाती पिटती रह गई सोच बदली…

  • नवरात्रि पर्व ( अश्विन ) सप्तम दिवस

    नवरात्रि पर्व ( अश्विन ) सप्तम दिवस नवरात्रि पर्व पर पहले अपना करो सुधार ।आत्म रमण में जाने के यह सुखद भव पार ।निज पर शासन फिर अनुशासन सुखकार ।खुद पहले सुधरे तो सुधरे यह सारा संसार ।नवरात्रि पर्व पर पहले अपना करो सुधार ।आगम में प्रभु ने बतलाया शाश्वत नित्य धर्म की छायाआत्मा के…

  • आदत | Aadat Kavita

    आदत ( Aadat )   मीठा मीठा बोल कर घट तुला तोलकर वाणी  मधुरता  घोल  फिर मुख खोलिए   प्रतिभा छिपाना मत पर घर जाना मत सत्कार मेहमानों का हो आदत डालिए   प्रातः काल वंदन हो शुभ अभिनंदन हो सेवा  कर्म  जीवन  में  आदत  बनाइए   रूठे को मना लो आज करना है शुभ…

  • Kavita | अधरों पर मुस्कान है कविता

    अधरों पर मुस्कान है कविता ( Adharon par muskan hai kavita )   अधरों पर मुस्कान है कविता कवि ह्दय के भाव है कविता उर  पटल  पर  छाप छोड़ती सप्त सुरों की शान है कविता   वाणी का उद्गार है कविता वीणा की झंकार है कविता छू  जाती  मन  के तारों को देशभक्ति का गान…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *