Upwas chhand

उपवास | Upwas chhand

उपवास

( Upwas )

मनहरण घनाक्षरी

 

नेम धर्म व्रत करे
विश्वास श्रद्धा भाव से
प्रभु सुमिरन कर
उपवास कीजिए

 

जब तप योग ध्यान
सर्व शक्ति हरि मान
दुर्गुण दोष मन से
त्याग सुधा दीजिए

 

मन से करें जो पूजा
व्रत निराहार रख
कामना पूरी कर दे
माला जप लीजिए

 

उपवास बड़ा खास
घट बढ़ता विश्वास
मन मंदिर में दीप
ज्योत जला दीजिए

 

 ?

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

धरती के भगवान | Kavita dharti ke bhagwan

Similar Posts

  • रक्तदान | Raktdan par chhand

    रक्तदान ( Raktdan ) मनहरण घनाक्षरी   रक्तदान महादान, देता है जीवन दान। जीवन बचाएं हम, रक्तदान कीजिए।   आओ बचाएं सबका, जीवन अनमोल है। मानव धर्म हमारा, पुण्य कार्य कीजिए।   सांसो की डोर बचाले, जोड़े रक्त का नाता भी। जरूरतमंद कोई, रक्त दान दीजिए।   किस्मत संवर जाती, भाग्य के खुलते द्वार। परोपकार…

  • कृष्ण लला | मत्त गयंद सवैया

    कृष्ण लला कृष्ण लला अवतार लिए चॅंहु ओर बजे दिन रैन बधाई। सोहर गाय रहीं ब्रज नार सुहासित नंद जसोमति माई। अंबर से अवनी तक आज सभी नर नार रहे मुसकाई। खेल रचा बिधना चुपचाप निहार रहे क्षण मंगलदाई।। केशव बेटिन को दुख कष्ट निवार धरा पर लाज बचाओ घूम रहे चॅंहु ओर दुशासन चीर…

  • जेठ की गर्मी | Chhand jeth ki garmi

    जेठ की गर्मी ( Jeth ki garmi ) मनहरण घनाक्षरी     चिलचिलाती धूप में, अंगारे बरस रहे। जेठ की दुपहरी में, बाहर ना जाइये।   गर्मी से बेहाल सब, सूरज उगले आग। तप रही धरा सारी, खुद को बचाइये।   त्राहि-त्राहि मच रही, प्रचंड गर्मी की मार। नींबू पानी शरबत, सबको पिलाइये।   ठंडी…

  • शालीनता | देव घनाक्षरी | Chhand Shalinta

    शालीनता ( Shalinta )   शालीनता सुशीलता सौम्य स्वभाव बनाए संस्कार हमारे शुभ हो कीर्ति पताका गगन   विनय धीरज धर भाव विमल धार लो उर आनंद बरसे हरसे मन का चमन   बहती पावन गंगा प्रेम सिंधु ले हिलोरे सत्कार मिले सबको, कर जोड़ करें नमन   सुंदर सी सोच रख विनम्र हो भाव…

  • शारदे माँ | लावणी छंद

    शारदे माँ ( 16 , 14 मात्रा पर यति अनिवार्य 30 मात्रा का मात्रिक छंद पदांत गुरु वर्ण अनिवार्य )    भक्तों को विद्या देती हैं , कृपा शारदे माँ करतीं । दिखा मार्ग भी उत्तम हमको , बुद्धि ज्ञान से ही भरतीं ।। अपने शरणागत पर माता , हाथ माथ अपना धरतीं । भक्तों…

  • चुगली रस | Chhand in Hindi

    चुगली रस ( Chugli Ras ) मनहरण घनाक्षरी   चुगलखोर कान में, भरते रहते बात। चुगली रस का सदा, रसपान वो करें।   कैकई कान की कच्ची, मंथरा की मानी बात। चौदह वर्ष राम को, वनवास जो करें।   चिकनी चुपड़ी बातें, मीठी मीठी बोलकर। कानाफूसी पारंगत, चुगलियां वो करें।   चुगली निंदा जो करे,…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *