Vishv Paryavaran Divas

विश्व पर्यावरण दिवस | Vishv Paryavaran Divas

विश्व पर्यावरण दिवस

( Vishv paryavaran divas )

 

काट रहे हैं जंगल – जंगल, वृक्षारोपण भूल गए।
पर्यावरण की रक्षा करना,आखिर कैसे भूल गए।
छाँव और औषधि देकर तरुवर करते सबसे प्रेम,
धन संचय की चाह में हम प्राणवायु क्यों भूल गए।

देखो हवा जहरीली होकर श्वासों में विष घोल रही,
वृक्ष हैं धरती के श्रृंगार, उसको कैसे भूल गए ?
लाखों जीव बसेरा करते उन हरी -भरी डालों पर,
जो भूख मिटाते जीव जगत की कैसे उसे भूल गए।

ऐशो-आराम के चक्कर में धरती बंजर कर डाली,
वृष्टि और सृष्टि की रक्षा, आखिर कैसे भूल गए ?
फल – मेवे देते – देते, कभी नहीं हैं थकते पेड़,
हवा, पानी, पर्यावरण को आखिर कैसे भूल गए।

ठंडी-ठंडी हवा के झोंके, राही की थकन मिटाते,
उस मृदुल छाया के संग कोयल का गाना भूल गए।
हरियाली जब नहीं रहेगी, खुशहाली होगी गायब,
क्यों बने वृक्षों के भक्षक, रक्षक होना भूल गए।

 

रामकेश एम.यादव (रायल्टी प्राप्त कवि व लेखक),

मुंबई

यह भी पढ़ें :-

https://thesahitya.com/lagam-nahin-hai/

Similar Posts

  • जायज | Jayaz

    जायज ( Jayaz )    विरोध के लिए ही विरोध होना जायज नहीं विरोध योग्य हो तो विरोध भी जरूरी है सत्य है हर आदमी हर कहीं सही नही होता किंतु ,वही हर जगह गलत भी नहीं होता स्वयं को देखकर ही और का भी विरोध, हो लबादे मे रहकर,कीचड़ फेंकना ठीक नही होगा रास्ता…

  • एक लड़की, रजनीगंधा सी

    एक लड़की,रजनीगंधा सी मस्त मलंग हाव भाव, तन मन अति सुडौल । अल्हड़ता व्यवहार अंतर, मधुर मृदुल प्रियल बोल। अधुना शैली परिधान संग, चारुता चंचल चंदा सी । एक लड़की, रजनीगंधा सी ।। अंग प्रत्यंग चहक महक , नव यौवन उत्तम उभार । आचार विचार मर्यादामय , अंतःकरण शोभित संस्कार । ज्ञान ध्यान निज सामर्थ्य…

  • हिन्द की हिंदी | Kavita Hindi Ki Hindi

    हिन्द की हिंदी ( Hindi Ki Hindi )   स्वर ध्वनि शब्दों की हिंदी भाषा अमृत धारा सी बह रही है रगो में शीतल सरिता सी चलकर सांसों के सागर में बह रही है।   अनमोल कितना मधुरमयी है दुनिया भी तुमको पहचानती है तेरी प्रसंशा का राग की धुन सुबह सवेरे खूब बज रही…

  • रामलला प्राण प्रतिष्ठा पर | Ramlala Pran Pratistha Par

    रामलला प्राण प्रतिष्ठा पर ( Ramlala Pran Pratistha Par )   रामलला प्राण प्रतिष्ठा पर,सविनय हार्दिक निमंत्रण सह्रदय करबृद्ध निवेदन, सानुग्रह शुभ मंगल प्रयोजन। बाईस जनवरी दिव्य बेला, घर द्वार उत्सविक आयोजन । विधिवत भव्य आराधना स्तुति, मर्यादा पुरुषोत्तम श्री चरण । रामलला प्राण प्रतिष्ठा पर,सविनय हार्दिक निमंत्रण ।। दीप प्रज्वलन प्रकाश श्रृंगार, स्वच्छ परिवेश…

  • दिल की बातें | Dil ki baatein

    दिल की बातें ( Dil ki baatein )   सुनो , बरसों पहले जो नहीं किया वो अब कर दो तो सही जो तब नहीं कहा , वो अब कह दो तो सही…   मौसम तब भी थे, मगर दस्तूर न थे अब दस्तूर है ,तो लौटा लो वो गया मौसम तो सही….   दिल…

  • बदलाव | Badlav

    बदलाव ( Badlav )  ( 2 )  मतलब के निकल जाते ही मिलने का ढंग बदल जाता है व्यवहार बदल जाता है पल भर मे ही ईमान बदल जाता है… प्रेम के मिल जाते ही फूल बदल जाता है बदल जाती हैं भावनाएं वह पुराना दिल बदल जाता है…. मिल जाए यदि कोई पद ऊंचा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *