वोट देना जरा संभाल के | Vote Dena

वोट देना जरा संभाल के

( Vote dena jara sambhal ke ) 

 

नए-नए नेता ले टोली, धवल वेश और मीठी बोली।
उमड़ पड़ा हुजुम यहां, बंद तिजोरी नेताजी खोली।
वादे मधुर बड़े कमाल के, बदल देंगे ढंग हाल के।
नेता फिर भी सशक्त चुने, वोट देना जरा संभाल के।
वोट देना जरा संभाल के

कुर्सी के दीवाने नेता, कितने ही जाने-माने नेता।
शतरंजी चालों के माहिर, शातिर बड़े सयाने नेता।
रूख बदल देते हवा का, प्रलोभन में डाल के।
धरना प्रदर्शन सभाएं, करतब बड़े कमाल के।
वोट देना जरा संभाल के

खुला खर्चा हो आम सभाएं, जाने धन कहां से लाएं।
चमचों की चांदी हो जाती, नेता जीत यदि पा जाए।
जनता के रखवाले रामजी, दिन फिर जाए कंगाल के।
सत्ता का सुख नेता भोगे, बस राजनीति की चाल से।
वोट देना जरा संभाल के

 

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

आन बान शान हिंदी | Aan Baan Shaan Hindi

Similar Posts

  • प्यारा भास्कर | Poem on sun in Hindi

    प्यारा भास्कर ( Pyara bhaskar )   रोज़ाना निकलता आसमान चीरकर, अंधेरा मिटाता आता प्यारा भास्कर। ख़ुश होते सब सूर्य नारायण देखकर, वन्दना करों सूरज को जल चढ़ाकर।। देता सारे जग को प्रकाश, उजियारा, हर लेता यह सारे ब्रह्मांड का अंधेरा। प्यारी- प्यारी भोर लगे बहुत निराली, सवेरे सवेरे सुहानी लगती यह लाली।। नदियों का…

  • कैसे मनाऊँगी मैं होली | Kavita Kaise Manaungi main Holi

    कैसे मनाऊँगी मैं होली ? ( Kaise Manaungi Main Holi )    कैसे मनाऊँगी मैं होली अगर नहीं तुम आओगे। कैसे लूँगी मीठी करवट, अगर नहीं तुम आओगे। साथ-साथ खाई थी कसमें जो जीने -मरने की, सराबोर करूँगी किसको अगर नहीं तुम आओगे। मालूम है मुझको कि तू हो सरहद की रखवाली में, लौटेगा बिना…

  • बेटी का घर | Beti ka Ghar

    बेटी का घर ( Beti ka ghar )    बेटी का नहीं होता कोई अपना घर न्यारा, घर चाहे पिता का हो या पति का, होता है पराया। “पराये घर जाना है” से शुरू होकर, “पराए घर से आई है” पे खत्म हो जाता है ये फ़साना। जिसको बचपन से था अपना माना, बड़ा मुश्किल…

  • नंदवन के घर आनंद लाल

    नंदवन के घर आनंद लाल दयावान ही चक्रधारी है ,मुरलीवाला ही चमत्कारी है lराधा – कृष्ण – रुक्मणि है ,तरल लीला , कृष्ण लीला lसखी राधा तो सखा सुदामा l मुरली अगर सुरों की लीला ,तो मेघ सजे वर्षा की लीला lउँगली बनी गोवर्धन लीला ,कद्रू पुत्र यमुना कुंड लीला lआलम, मीरा, सुर में भी…

  • |

    पहचान | Pahchan par Bhojpuri Kavita

    पहचान ( Pahchan )    हम बिगड़ ग‌इल होती गुरु जी जे ना मरले होते बाबु जी जे ना डटले होते भ‌इया जे ना हमके समझ‌इते आवारा रूप में हमके प‌इते बहिन जे ना स्नेह देखाइत माई जे ना हमके खियाइत झोरी में ना बसता सरीयाइत आवारा रूप में हमके पाइत सुते में हम रहनी…

  • मानव, पानी और कहानी

    मानव, पानी और कहानी   जीवन झर झर झरता, है झरने सा, झरना झर झर बहता, है जीवन सा, मानव के ऑखो मे पानी, नदी, कूप, तालों मे पानी, पानी की कलकल है जरूरी, ऑखों की छलछल है जरूरी, मानव, पानी और कहानी, है धरती की यही निशानी, जीवन की जो कहानी है, झरने में…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *