Yakeen

यकीन | Yakeen

यकीन

( Yakeen ) 

 

भले दे न सको तुम मुझे अपनापन
मेरा यूं मेरापन भी ले नाही पाओगे
उस मिट्टी का ही बना हुआ हूं मैं भी
इसी गंध मे तुम भी लौट आओगे…

फिसलन भरी है जमीन यहां की
फिसलते ही भले चले जाओगे
महासागर बनकर बैठा हुआ हूं मैं
मुझी मे तुम भी कभी मिल जाओगे…

चाहा हूं दिल की अथाह गहराइयों से
तैरकर कोई छू ले भले तुम्हे चाहे
हम भी रहते हैं तुम्हारे दिल मे कहीं
जुबां कह न पाना फितरत है तुम्हारी…

दिल की बातों को समझ लेता है दिल
शब्दों की उसे जरूरत ही नही होती
खामोश पलकें भी कह देती हैं कुछ
मुफ्त को चीज कभी महंगी नही होती,..

सदियों से रही है लगी तलब आपकी
यकीन है हमे भी अपनी चाहत पर
कल भी थे आप,कल भी होंगे आप मेरे
आज ही तो सबकुछ होता नही यहां पर

 

मोहन तिवारी

( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

https://thesahitya.com/tapan/

Similar Posts

  • चन्दन | Chandan kavita

     “चन्दन” ( Chandan : Kavita ) –>”चन्दन तुम बन जाओ”……|| 1.कहने को लकडी है, ठंडक समेटे है | भीनी सी खुशबू है, विष-धर लपेटे है | घिंस के जब पत्थर पर, माथे में लगता है | ऊंगली महकाती है, चन्दन वो लकडी है | –>”चन्दन तुम बन जाओ”……|| 2.चन्दन की राहों में, उलझन हजारों हैं…

  • शिरोमणि महाराणा प्रताप | Maharana Pratap veer ras Kavita

    शिरोमणि महाराणा प्रताप ( Shiromani Maharana Pratap )   जेष्ठ मास शुुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाते जयंती लिया जन्म महाराणा ने कुंभलगढ़ के दुर्ग में उदय सिंह  पिता थे उनके तो जयवंत कबर माता थी वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप पौत्र राणा सांगा के चेतक था प्रिय घोड़ा उनका कवच पहन 72 किलो का हाथ…

  • रख | Kavita

    रख ( Rakh : Hindi Kavita  )   खुशियो भरा पिटारा रख । दिल मे जज्बा प्यारा रख ।। तुझे अकेले चलना है । आगे एक सितारा रख ।। मन मे हो मझधार अगर । अपने साथ किनारा रख ।। धुन्धले पन के भी अंदर । सुंदर एक नजारा रख ।। दुनिया से जो भिड़ना…

  • सुभाष चंद्र बोस : Poem on Subhash Chandra Bose

    सुभाष चंद्र बोस शायद सदियों में होती हैंपूरी एक तलाश,शायद विश्वासों को होतातब जाकर विश्वास। शायद होते आज वो जिंदाभारत यूं ना होता,शायद दुश्मन फूट-फूट करखून के आँसू रोता। आजादी की भेंट चढ़ गयेहुआ अमर बलिदान,श्रद्धा पूर्वक नमन आपकोहे वीरों की शान। मोल असल इस आजादी कीआपने हीं समझाया,दिया जवाब हर इक ईंटों कापत्थर बन…

  • भारत का डंका | Bharat ka Danka

    भारत का डंका ( Bharat ka danka )   भारत का डंका बजता था, विश्व गुरु कहलाता था। मेरा देश स्वर्ण चिड़िया, कीर्ति पताका लहराता था। ज्ञान विज्ञान धर्म आस्था, नीति नियम योग आचार। मानवता प्रेम समर्पण, जन-जन भरा था सदाचार। कला कौशल वीरता भरी, स्वाभिमान सिरमौर रहा। संत सुरों की पावन भूमि, ज्ञान भक्ति…

  • हे गगन के चंद्रमा | Poem on hey gagan ke chandrama

    हे गगन के चंद्रमा ( Hey gagan ke chandrama )   तुम हो गगन के चन्द्रमा, मै हूँ जँमी की धूल। मुझको तुमसे प्रीत है, जो  बन गयी  है शूल।   तेरे  बिन ना कटती राते, दिल  से  मैं मजबूर, हे  गगन  के  चन्द्रमा, तू आ जा बनके फूल।   रात अरू दिन के मिलन…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *