जमाने में मेरा हाल

( Zamane mein mera haal )

 

बदजात जमाने से मेरा हाल न पूछों
जो जानना हो कुछ मेरे पास तुम आओ
मैं बेहतर बताऊंगा दूसरे से यार न पूछों
मैं चलता चला जाऊंगा फिर ठहर नही पाऊंगा
दूसरे से मेरी मंजिल को मेरे यार न पूछो
बदजात जमाने से मेरा हाल न पूछों
मैं रह के तेरे संग दिल मे भरता था मैं रंग
जो जानना हो रंग मेरे पास तुम आओ
मैं बेहतर बताऊंगा दूसरे से यार न पूछों
डगर डगर मैं जरा ठहर ठहर चला था
मैं क्यों ठहर गया मेरे पास तो आओ
मैं बेहतर बताऊंगा दूसरे से यार न पूछों
बदजात जमाने से मेरा हाल न पूछों

❣️

लेखक : अंकुल त्रिपाठी निराला
(प्रयागराज )

यह भी पढ़ें : –

एक तलाश ऊंचाई छूने की | Ek talash unchai chune ki

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here