Hindi kavita khandhar

खंडहर | Hindi kavita Khandhar

खंडहर

( Khandhar )

 

 

खड़ा खंडहर कह रहा महलों की वो रवानिया

शौर्य पराक्रम ओज भरी कीर्तिमान कहानियां

 

कालचक्र के चक्रव्यूह में वर्तमान जब जाता है

बस यादें रह जाती है अतीत बन रह जाता है

 

उसे ऊंचे महल अटारी खड़ी इमारते भारी भारी

समय के थपेड़े खाकर ढह जाती बुनियादें सारी

 

दिन साल महीने गुजरे सदियां बीतती जाती है

खंडहर की निशानियां उस वैभव को बतलाती है

 

कभी आलीशान महल थे ठाट बाट से भरपूर

हाथी घोड़े नौकर चाकर दरबारों में थे मशहूर

 

वक्त सदा ना रहे एकसा आंधी तूफां पतझड़ आते

समय के साथ साथ सारी सृष्टि में  परिवर्तन आते

 

परिवर्तन कुदरत का नियम है हालात बदल जाते

वक्त के साथ-साथ मानव के जज्बात बदल जाते

   ?

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

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