हादसे | Kavita Hadse

हादसे

( Hadse )

आस्था या अंधविश्वास
भक्ति या भीड़ बदहवास
भगदड़ में छूटते अपनों के हाथ
कदमों से कुचलता हर सांस
माथा टेकने का तृष्ण
कौन भगवान कौन भक्त
मेहरानगढ़ यां हाथरस
भयभीत बच्चों के शव
असीमित चीखें अस्त व्यस्त
ह्रदय विदारक दृश्य
अनेकों दीपक हुए अस्त
कैसी विडम्बना है ये वत्स
रुकता नहीं अज्ञानता का तमस
फिर कोई भगवान बनकर
मासूम दिलों को करेगा ज़ब्त
फिर आंख मूंद कर देखेंगे
अंधेरों में डूबती मृत्यु का सत्य

शिखा खुराना

शिखा खुराना

यह भी पढ़ें :-

हबीब | Nazm Habib

Similar Posts

  • प्रभु वंदना | Prabhu Vandana

    प्रभु वंदना ( Prabhu Vandana ) (  मनहरण घनाक्षरी छंद 8,8,8,7 वर्ण )   दीनबंधु दीनानाथ सबका प्रभु दो साथ संकट हर लो सारे विपदा निवारिये   रण में पधारो आप जनता करती जाप सारथी बन पार्थ के विजय दिलाइये   मन में साहस भर हौसला बुलंद कर जन-जन मनोभाव सशक्त बनाइये   मुरली की…

  • शत् शत् वंदन हीरा बा | Shat Shat Vandan Heera Ba

    शत् शत् वंदन हीरा बा ( Shat Shat Vandan Heera Ba )   १०० वर्षों की जीवन यात्रा आप पूरी कर पाई, प्रधानमंत्री की माॅं होकर भी घमंड़ ना दिखाई। अनुशासित ज़िंदगी जिकर सबको है समझाई, दामोदरदास मूलचन्दजी संग विवाह ये रचाई।। सदा रहेंगे भारतीय आपके राजमाता आभारी, दिया ऐसा कोहिनूर जिन्होंने हिन्द को हमारी।…

  • हिंदी दिवस पर छोटी सी कविता

    हिंदी दिवस पर छोटी सी कविता ( Hindi diwas par chhoti si kavita ) सामान्य व साधारण भाषा बोलकर जीवन जीना नहीं होता है कोई विशेष काम, असाधारण प्रतिभा का धनी ही जीतता है जीवन का कठिन संग्राम । प्रवाह के साथ तो हर कोई बहता है, उसके विपरीत जो चलने वाला ही हर मुश्किल…

  • हिन्दी | Hindi par poem

    हिन्दी ( Hindi )   बावन वर्णों से सजी हुई,मधुमय रसधार बहाती है। यह हिन्दी ही है जो जग में,नवरस का गीत सुनाती है।। संस्कृत प्राकृत पाली से शुभित, हिंदी जनमानस की भाषा, तू ज्ञान दीप बनकर प्रतिफल,कण कण में भरती है आशा, हिम नग से सागर तक अविरल, सौहार्द मेघ बरसाती है।। यह हिन्दी…

  • हिन्दी के अन्तर के स्वर

    हिन्दी को भारत की राष्ट्रभाषा मान्य किये जाने के लिये १९७५ में लोकसभा में प्रस्तुत प्रस्ताव अमान्य कर दिये जाने के क्षोभ और विरोध में “हिंदी के अंतर के स्वर” शीर्षक रचना लिखी गई।१९७६ में मारीशस के द्वितीय विश्व हिंदी सम्मेलन में यह रचना प्रस्तुत हुई तो यह वहाॅं प्रशंसित और अभिनन्दित हुई।इस रचना के…

  • जब उनसे मुलाकात हुई | Geet

    जब उनसे मुलाकात हुई ( Jab unse mulaqat hui )   खिल गई मन की बगिया मधुर सुहानी रात हुई महक उठा दिल का चमन जब उनसे मुलाकात हुई   साज सारे थिरक उठते मधुर वीणा के तार बजे होठों पर सुर मुरली के मधुर हंसी चेहरे पे सजे गीतों की मोहक बहारें संगीत की…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *