जीवन का उद्देश्य | Poem on the purpose of life in Hindi

जीवन का उद्देश्य

( Jeevan ka uddeshya )

 

जीवन क्या बहती सरिता लक्ष्य को पहचान लो
सपनों को पंख लगाकर मानव नई उड़ान भरो

 

हौसला हृदय में लेकर सद्भावों के भाव भरकर
हर्ष खुशी प्रेम बांटे होठों पे हंसी मुस्कान लेकर

 

जिंदगी का सफर सुहाना जीने की राहें चुन लो
पल पल में खुशियां बरसे नित नए स्वप्न बुन लो

 

लक्ष्य साधे जीवन का उन्नति की बढ़कर डगर
कर्मभूमि उतर पड़े कर्मवीर चले सुहाना सफर

 

आंधी तूफान धूप छांव सी सुख दुख का लगे मेला
पहचानो जीवन क्या है बसंती बयार सा अलबेला

 

मधुर मधुर पुरवाई बहती बहारों में झूम लो
खुशियों के सुहाने पल आगे बढ़कर चूम लो

 

आओ सुहाने सफर में हम गीत मधुर गाते चले
प्यार के मोती लुटाकर प्यारे हम मुस्काते चले

 

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

मतदान | मनहरण घनाक्षरी | Poem on voting in Hindi

Similar Posts

  • Hindi Poetry On Life | Hindi Poem -भाग्यहीन

    भाग्यहीन ( Bhaagyaheen )   कहाँ  गए  रणछोड  द्रौपदी, पर  विपदा अब भारी है। रजस्वला तन खुले केश संग,विपद में द्रुपद कुमारी है।   पूर्व जन्म की इन्द्राणी अब, श्रापित सी महारानी है। पांच महारथियों की भार्या, धृत की जीती बाजी है।   हे केशव हे माधव सुन लो, भय भव लीन बेचारी है। नामर्दो…

  • Hindi Kavita | Best Hindi Poetry -चमौली हादसा

    चमौली हादसा ( Chamoli Haadsha ) ********** टूटा ग्लेशियर फिसला हिमयुक्त पर्वत शिखर बाढ़ नदियों में आई, कीचड़युक्त मलबे में फंस कईयों ने जान है गंवाई। टनल में कार्यरत कई मजदूर अब भी हैं लापता, जाने कहां से आई ऐसी ये आपदा? शासन, प्रशासन ने दु:ख है जताया, आपदा प्रबंधन दल ने पूरी मुस्तैदी से…

  • मधुरिम-बंसत | Madhurim Basant

    मधुरिम-बंसत ( Madhurim-Basant ) तुम आये हो नव-बंसत बन कर मेरे प्रेम – नगर में दुष्यंत बन कर कुंठित हो चुकी थीं वेदनाएँ बिखर गई थीं सम्भावनाएँ आज पथरीली बंजर ह्रदय की धरा को चीर कर फिर फूटा एक प्रेम अंकुर….. पतझड़ की डोली हो गई विदा विदाई के गीत गाने लगी वियोगी हवा अतीत…

  • माता पिता | Kavita Mata Pita

    माता पिता ( Mata Pita )   माता पिता छोड़ चले मुझे अधर झूल में दुआ आशीष छोड़ चले मुझे अधर झूल में दुखों का पहाड़ टूटा मेरे सिर पर भारी प्यार ममता छोड़ चले मुझे अधर झूल में अनुभव नहीं था कोई बोझ उठाने का ज़रा भरा परिवार छोड़ चले मुझे अधर झूल में…

  • Hindi Kavita -भारत का गौरव

    भारत का गौरव ( Bharat Ka Gaurav )     राम तेरे आर्याव्रत अब, शस्त्र नही ना शास्त्र दिखे। धर्म सनातन विघटित होकर,मात्र अंहिसा जाप करे।   शस्त्रों की पूजा करते पर, शस्त्र उठाना भूल गए, रणचंडी का वैभव भूले, खड्ग खप्पर सब भूल गए।   परशुराम का परशु अब तो, यदा कदा ही दिखता…

  • समझ मे क्यों नही आया | Samajh mein Kyon Nahi Aaya

    समझ मे क्यों नही आया ( Samajh mein kyon nahi aaya )   जितना भी मांगा था रब से, उससे ही ज्यादा ही पाया। मन पागल ना शुक्ररा निकला, जब देखा रोता ही पाया। प्रेमिका माँगी पत्नी दे दी, एक नही दो दो से मिला दी। जो मांगा वो सबकुछ दे दी, पर मन को…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *