Vishwakarma ji par kavita

सृजन के देव विश्वकर्मा | Vishwakarma ji par kavita

सृजन के देव विश्वकर्मा

( Srijan ke dev vishwakarma )

 

नवसृजन के आदिदेव सृजक विश्वकर्मा महाराज।
अस्त्र-शस्त्र आयुध पूजा साधक करते पूर्ण काज।

 

कलाकार करे ध्यान आपका झोली विद्या से भरते।
भवन निर्माण कला कौशल शिल्पी साधना करते।

 

भित्ति चित्र काष्ठकला स्वर्ण रजत भूषण जवाहरात।
मुंह बोले मूर्तिकलाये चित्रकारी की हो अनोखी बात।

 

संगीत का हर साज जब साधक स्वर में गाता है।
रचनाकार आदिदेव प्रभु विश्वकर्मा को मनाता है।

 

कृति रचना शब्द शिल्प बेजोड़ बने ले सुरलय ताल।
विश्वकर्मा देव कृपा हो मिले यश वैभव उन्नत भाल।

?

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

नमो नमो मोदी हरे | Narendra Modi par kavita

Similar Posts

  • वनिता सुरभि, पारिजात ललांत सी

    वनिता सुरभि,पारिजात ललांत सी   कोमल निर्मल सरस भाव, अंतर प्रवाह विमल सरिता । त्याग समर्पण प्रतिमूर्ति, अनंता अत्युत्तम कविता । सृजन उत्थान पथ पर, महिमा मंडित सुकांत सी । वनिता सुरभि, पारिजात ललांत सी ।। स्नेहगार ,दया उद्गम स्थल, अप्रतिम श्रृंगार सृष्टि का । पूजनीय कमनीय शील युत, नैतिक अवलंब दृष्टि का । उमा…

  • इस बार दिवाली में | Is Baar Diwali Mein

    इस बार दिवाली में ( Is Baar Diwali Mein ) चौखट पर रख आना एक दिया इस बार दिवाली मेंप्राण निछावर कर दिए जिसने देश की रखवाली में तम ने है किया बसेरा दिन रात घनघोर काली मेंचौखट पर रख आना एक दिया इस बार दिवाली में बिंदी छूटा कंगन टूटा सुना सुना जीवन है…

  • भागीदारी | Bhagidari par Kavita

    भागीदारी ( Bhagidari )   संस्थाओं में हमारी क्या है? कितनी है? कभी सोची है! इतनी कम क्यों है? हम इतने कम तो नहीं! फिर बौखलाहट बेचैनी क्यों नहीं? कानों पर जूं तक रेंगती नहीं, हम सब में ही है कमी; हालत बहुत है बुरी। न सोचते कभी न विचारते न स्वयं को निखारते! न…

  • मन का आंगन | Man ka Aagan Kavita

    मन का आंगन ( Man ka aagan )   बात  अकेले  पन की हैं । उसमें उलझे पन की है ।। उलझन  में  सीधा रस्ता । खोज रहे जीवन की है ।। कांटे  भरे  चमन  में  एक । तितली के उलझन की है ।। नहीं एक भी फूल खिला । सूने उस मधुबन की है…

  • बरसाने की राधै | Barasane ki Radhe

    बरसाने की राधै ( Barasane ki Radhe )   वृंदावन में बसे गोवर्धन गिरधारी, बरसाने की राधै रानी लगे प्यारी। यमुना किनारे राधा श्याम पुकारे, खोजते- खोजते राधा रानी हारी।। मुरली बजाते आये कृष्ण-मुरारी, राधा रानी पानी घघरी लेके आई। दोनों यूँ मिले क़दम पेड़ के नीचे, बहुत दिनों से नही मिले हो जैसे।। राधा…

  • गजानंद जी चले | Gajanand ji Chale

    गजानंद जी चले ( Gajanand ji Chale ) गजानन जी चले अपने धामचलो सखी झूमे नाचे करें उन्हें प्रणाम। झांकी सजाओ बनाओ मोदक पकवानमूषक पर होके सवार चले गजानन जीआया बुलावा मां पार्वती कागजानन जी चले अपने धामचलो सखी झूमे नाचे करें उन्हें प्रणाम भक्तों की पड़ी भीड़ देने को विदाईआज तो सारा जग है…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *