वनिता सुरभि, पारिजात ललांत सी

वनिता सुरभि,पारिजात ललांत सी

 

कोमल निर्मल सरस भाव,
अंतर प्रवाह विमल सरिता ।
त्याग समर्पण प्रतिमूर्ति,
अनंता अत्युत्तम कविता ।
सृजन उत्थान पथ पर,
महिमा मंडित सुकांत सी ।
वनिता सुरभि, पारिजात ललांत सी ।।

स्नेहगार ,दया उद्गम स्थल,
अप्रतिम श्रृंगार सृष्टि का ।
पूजनीय कमनीय शील युत,
नैतिक अवलंब दृष्टि का ।
उमा रमा शारदा सरिस,
उत्संग मोहक बिंदु विश्रांत सी।
वनिता सुरभि, पारिजात ललांत सी ।।

अद्भुत तेज पुंज उज्ज्वल,
जग ज्योति अखंडित ।
हर युग अति गुणगान,
गरिमा महिमा शीर्ष मंडित ।
ऊर्जस्वित कर प्राण सकल ,
शक्ति भक्ति प्रेरणा दृष्टांत सी ।
वनिता सुरभि, पारिजात ललांत सी ।।

संस्कृति संस्कार धर्म रक्षक,
परंपरा मर्यादा युक्त चरित्र ।
नैतिक सात्विक पथ गामिनी ,
व्यक्तित्व कृतित्व पवित्र ।
अथक श्रम उत्सर्ग साधना,
सदा प्रणत प्रभा सुशांत सी ।
वनिता सुरभि, पारिजात ललांत सी ।

महेन्द्र कुमार

नवलगढ़ (राजस्थान)

Similar Posts

  • तुम मत रोना प्रिय | Poem tum mat rona priye

    तुम मत रोना प्रिय ( Tum mat rona priye )   तुम मत रोना प्रिय मेरे, यह तेरा काम नही है। जिससे मन मेरा लागा, मोरा घनश्याम वही है।।   जो राधा का है मोहन, मीरा का नटवर नागर। वो एक रसिक इस जग का, मेरा मन झलकत गागर।।   शबरी की बेरी में दिखे…

  • शीर्ष लोकतंत्र | Shirsh Loktantra

    शीर्ष लोकतंत्र ( Shirsh loktantra )    हिंद अनुपमा,दिव्य भव्य नव्य रोहक शीर्ष लोकतंत्र वैश्विक श्रृंगार, शासन प्रशासन नैतिक छवि । सुशोभित प्रथम स्थान संविधान, लिखित रूप अंतर ओज रवि । प्राण प्रियल राष्ट्र ध्वज तिरंगा, शौर्य शांति समृद्धि संबोधक । हिंद अनुपमा,दिव्य भव्य नव्य रोहक ।। बाघ उपमित राष्ट्रीय पशु, देश पक्षी शोभना मोर…

  • मैं एक खिलौना हूं | Main ek Khilona Hoon

    मैं एक खिलौना हूं ( Main ek khilona hoon )    चाभी से चलने वाला एक खिलौना हूं किसी की खुशियों की खातिर घूमनेवाला खिलौना हूं मैं एक खिलौना हूं…… मैं ,इंसानों सा जीनेवाला नही मेरा कोई जीवन नही रिवाजों के सांचे मे कैद हूं संस्कारों की सीख का पुतला हूं अच्छाई या बुराई का…

  • दिलों की दिवाली | Diwali Poem 2021

    दिलों की दिवाली ( Dilon ki diwali )   खुशियों के दीप जलाओ घर-घर मौज मनाओ दिलों  की  दिवाली  आई प्यार भरे गीत गाओ   आओ जी आओ आओ सारे घर वाले आओ रंगों  से  रोशन करके दीपों से घर सजाओ   आस्था  विश्वास नेह से चंदन थाल सजा लेना धूप दीप पावन आरती सारे…

  • नारी की वेदनाएं

    नारी की वेदनाएं नारी को हि बोझ अपना समझ रहे हो क्यों ?गर्भ में हि कोख से उसे हटा रहे हो क्यों ? निर्जन पथ पर बचा न पाती अस्मत नारी,नोच रहे क्यों दानव बनकर नर बलात्कारी | दासी मानकर चाहते हैं गुल्लामी उसकी,कन्या को पूज कर चाहते हैं कृपा भी उसकी | अशिक्षित हि…

  • यह मेरा हिंदुस्तान है | Hindi Poetry

    यह मेरा हिंदुस्तान है ( Yah mera hindustan hai )   यह मेरा हिंदुस्तान है, यह मेरा हिंदुस्तान है। ध्वज तिरंगा हाथों में, ले राष्ट्रगीत गाते हैं।   सरहद के सिपाही, सीमा के सभी जवान। आंधी तूफानों से भिड़, आगे बढ़ते जाते हैं।   कूद पड़े मैदानों में, धरती मां के लाडले। बलिदानी राहों पर,…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *